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ईरान
बुधवार, 02 मार्च 2016 13:33

ख़लीफ़ये क़ुल्लाबी-7

हमने बताया था कि एक रात हारून रशीद ने अपने वज़ीर जाफ़र बरमक्की और मसरूर शमशीरज़न के साथ भेस बदलकर शहर में निकलने का इरादा किया ताकि लोगों के हालात से अवगत हो सके। जब वे दजला नदी पर पहुंचे तो उन्हें एक नक़ली ख़लीफ़ा के बारे में पता चला। हारून रशीद ने जब नक़ली ख़लीफ़ा को देखा तो उसकी नाव का पीछा किया और उसके ठिकाने तक पहुंच गया। हारून रशीद और उसके साथियों को वहां मौजूद संतरियों ने गिरफ़्तार कर लिया। जब उनसे उनके बारे में पूछा गया तो उन्होंने ख़ुद को व्यापारी बताया। नक़ली ख़लीफ़ा उन्हें अपने साथ महल में ले गया। उसने शाही दस्तरख़्वान लगाने का आदेश दिया। भोजन के बाद, संगीत का दौर चला। नक़ली ख़लीफ़ा संगीत की महफ़िल के बीच, कई बार मस्त हुआ और उसने अपने कपड़े फाड़ लिए। उसके सेवक हर बार उसे नए वस्त्र पहना दिया करते थे। हारून रशीद ने एक बार फटे हुए वस्त्रों से उसके शरीर पर कोड़ों के निशान देख लिए और यह बात जाफ़र बरमकी को बताई। नक़ली ख़लीफ़ा ने उन्हें काना-फूसी करते हुए देख लिया और इसका कारण पूछा। जाफ़र बरमकी ने उससे कोड़ों के घावों का कारण पूछा। नक़ली ख़लीफ़ा ने ख़लीफ़ा हारून रशीद और उसके साथियों से कहा कि उसने उन्हें पहचान लिया है। उसके बाद उसने अपनी आपबीती बताई कि पिता की मौत के बाद, उसने उनके सुनार के व्यवसाय को आगे बढ़ाया। एक दिन जाफ़र मक्की की बहन दुनिया दुकान पर आई और उसने एक सुन्दर हार और क़ीमती पत्थर दिखाने को कहा। उसने उसकी क़ीमत चुकाने के लिए युवक से अपने घर चलने के लिए कहा, घर पहुंचकर उसने युवक से कहा कि वह उसके साथ विवाह के बंधन में बंध जाए।

धीरे धीरे समय बीतता रहा, एक दिन जब दुनिया घर से बाहर जा रही थी, तो  उसने अपने पति से वादा लिया कि वह घर से बाहर नहीं जाएगा, लेकिन राजा के एक संबंधी के आग्रह पर वह घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो गया। जब वह घर वापस लौटा तो उसकी पत्नी दुनिया उसका इंतज़ार कर रही थी और बहुत ग़ुस्से में थी। उसने उसपर वादा तोड़ने का आरोप लगाया और अपने एक ग़ुलाम को आदेश दिया कि इस झूठे व्यक्ति की गर्दन मार दे, क्योंकि जो संबंध हमारे बीच था अब वह समाप्त हो चुका है।

अचानक मैंने देखा कि ग़ुलाम तलवार लिए मेरे सिर पर खड़ा है और हक़ीक़त में वह मेरी हत्या करना चाहता है। मैं दुनिया के पास गया और अपने अच्छे दिनों की उसे याद दिलाई। मैंने क़सम खाकर कहा कि मैं निर्दोष हूं, हालांकि मैंने कोई गुनाह नहीं किया था, फिर भी उससे माफ़ी की प्रार्थना की। लेकिन वह ग़ुस्से की आग में इतनी तप रही थी कि मानो उसने मेरी बात सुनी ही नहीं। एक बार फिर ग़ुलाम तलवार लेकर मेरे सिर पर खड़ा हो गया और मुझे मारने ही वाला था कि सेवक और सेविकाएं रोते बिलकते हुए दुनिया के पैरों पर गिर पड़े और कहने लगे, हे महान महिला, उससे पहली बार कोई ग़लती हुई है, उसे क्षमा कर दें, क्योंकि उसे पता नहीं था कि इससे आप दुखी होंगी। दुनिया ने चिल्लाकर कहा, तुम्हारी वजह से मैं उसे छोड़ रही हूं, लेकिन उसकी ऐसी हालत बना दूंगी कि वह कभी इसे भूलेगा नहीं और इसके बाद उसे घर से निकलना होगा। उसने यह कहकर ग़ुलाम को कोड़ा लाने का आदेश दिया और कहा कि इसे ज़मीन पर लिटा दो और कोड़ों से मारो। ग़ुलाम ने ऐसा ही किया। मेरे स्वामी, अब आप समझ गए होंगे कि मेरी कमर पर जो कोड़े के घाव हैं, उनका कारण किया है।

उसके बाद मैं रोता पीटता हुआ दुनिया के घर से बाहर निकला और अपने घर पर पहुंचा। कुछ समय बाद मेरे घाव भर गए। मैं अपनी पत्नी से मिलना चाहता था, क्योंकि मैं उससे प्यार करता था, लेकिन मुझे उससे मिलने की अनुमति नहीं थी। स्वस्थ होने के बाद, मैं अपनी दुकान पर लौटा और जो कुछ हीरे मोती थे मैंने बेच दिए और उससे मिलने वाली राशि से मैंने कई ग़ुलाम और सेवक ख़रीदे। जिस दिन मैं दुनिया से अलग हुआ, उस दिन मेरी समझ में आया कि जो बड़े लोग होते हैं, उनके दिल में जो आता है वह करते हैं। मैंने भी ऐसा बनने की कोशिश की है। मेरे पास जो कुछ दौलत थी, उससे मैंने यह महल बनाया और उसके आसपास की सब ज़मीन जायदाद ख़रीद ली। उसके बाद से प्रत्येक रात मैं राजाओं की तरह सैर के लिए निकलता हूं। मैंने अपने अग्रदूतों को आदेश दिया है कि नाव से चिल्लाकर कहें, जो कोई भी रात में दजला नदीं में दिखाई देगा, उसकी गर्दन मार दी जाएगी। पिछले क़रीब एक साल से मैं यही करता आ रहा हूं, इस प्रकार मैं अपना दुख दर्द भुलाने की कोशिश कर रहा हूं। जब नक़ली ख़लीफ़ा हारून रशीद और उसके साथियों को अपनी कहानी बता रहा था, अचानक रो रोकर कहने लगा, लेकिन इस सबके बावजूद मैं अभी तक अपनी पत्नी दुनिया को भुला नहीं पाया हूं और अभी भी उसे बहुत प्यार करता हूं।           

सोमवार, 29 फ़रवरी 2016 17:10

ख़लीफ़ये क़ुल्लाबी-6

हमने पिछले कार्यक्रम में बताया कि हारून रशीद ने एक दिन  अपने वज़ीर जाफ़र बरमकी के साथ भेस बदल कर नगर घूमने का निर्णय किया ताकि लोगों की स्थिति से अवगत हो सके। तलवार चलाने में एक दक्ष व्यक्ति भी उसके साथ था। जब वे तीनों दजला नदी में नौकायन कर रहे थे तो उन्होंने एक व्यक्ति को देखा जिसने स्वयं को ख़लीफ़ा बता रखा था। हारून रशीद जब नकली ख़लीफ़ा को देखने में सफल हो गया तो उसने उसकी नाव का पीछा किया और नकली ख़लीफ़ा की जगह देख ली परंतु नकली ख़लीफा के रक्षकों द्वारा हारून रशीद और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। हारून रशीद और उसके साथियों ने स्वयं को व्यापारी बताया था। बहरहाल गिरफ्तार हो जाने के बाद नक़ली ख़लीफ़ा, हारून रशीद और उसके साथियों को अपने महल ले गया और वहां उसने शाहाना दस्तरखान लगाने का आदेश दिया। जब खाना- पीना हो गया तो संगीत शुरु हो गया और संगीत के दौरान नक़ली ख़लीफ़ा कई बार बेहोश हो गया और वह अपने वस्त्रों को फाड़ देता था। हारून रशीद ने वस्त्रों को फाड़ने के दौरान नकली खलीफा की भुजाओं पर कोड़े के घाव के चिन्ह देख लिये और यह बात उसने अपने वज़ीर जाफ़र बरमकी के कान में कही। नकली खलीफा ने दोनों को काना- फूसी करते देख लिया और उसने उसका कारण पूछा। हारून रशीद की अनुमति से उसके वज़ीर जाफ़र बरमकी ने नकली ख़लीफ़ा से घाव का कारण पूछा। नकली ख़लीफ़ा ने हारून रशीद और उसके साथियों से कहा कि मैंने आप लोगों को पहचान लिया है। उसके बाद उसने उन लोगों से आपबीती सुनाई और कहा कि मैंने अपने पिता के मरने के बाद अपने पिता के पेशे को अपनाया। पिता एक जौहरी थे। अपने पिता के पेशे को जारी रखा यहां तक कि एक दिन नगर के एक प्रतिष्ठित घर की महिला उसकी दुकान पर आती है और वह जौहरी युवा से सुन्दर हार खरीदती है और पैसा देने के लिए उसे अपने घर बुलाती है। वहां पर सुन्दर महिला अपना परिचय जाफ़र बरमकी की बहन दुनिया के रूप में कराती है और युवा को अपने साथ विवाह करने का प्रस्ताव देती है और वह भी सहर्ष स्वीकार कर लेता है। वह कहता है दुनिया जी यह मेरे लिए बड़े गर्व की बात होगी कि आप जैसी सुन्दर और प्रतिष्ठित घर की महिला मेरी पत्नी बने। बहरहाल दुनिया ने निकाह पढ़ने वाले और निकाह की गवाही देने वालों को बुला लिया। जब वे आ गये तो उसने जो हार मुझसे लिया था उसे गर्दन से उतारा और उसे निकाह पढ़ने वाले के समक्ष रख दिया और कहा मोहम्मद अली, अली जौहरी के बेटे ने मेरा चयन अपने जीवनसाथी के रूप में किया है और इस हार को मेरे मेहर में रखा है। मैंने भी स्वीकार कर लिया। उसके बाद निकाह पढ़ने वाले ने मेरा निकाह पढ़ दिया। उसके तुरंत बाद दुनिया के घर में खुशी का शोर मचा और सब विवाह का जश्न मनाने की तैयारी में जुट गये। दास- दासियां सब खुशी मना रहे थे, फल और मिठाई लोगों में बांटी गयी। मेरे विवाह का जश्न रात तक चला। उसके बाद मेहमानों ने एक- एक करके बधाई दी और हमारे लिए शुभकामनाएं की और सब चले गये। स्वामी जी! इस प्रकार मेरा और दुनिया का संयुक्त जीवन आरंभ हुआ। एक महीना बीत गया और मैं भी उसके घर से बिल्कुल बाहर नहीं गया। यहां तक कि आजीविका के लिए भी मैं घर से बाहर नहीं गया और जब से दुनिया के घर गया था तब से दुकान भी बंद पड़ी थी। मैं उसे बहुत चाहता था इस प्रकार से मैं एक मिनट के लिए भी उससे अलग व दूर नहीं रहना चाहता था। वह भी इसी तरह मुझे चाहती थी और मुझे छोड़कर घर से बाहर नहीं जाती थी क्योंकि वह डरती थी कि ईर्ष्या करने वाली महिलाएं कहीं उससे ईर्ष्या न करें और मुझे रास्ते से हटा न दें। हम दोनों बहुत ही आराम और खुशी से रह रहे थे यहां तक कि एक दिन दुनिया ने वस्त्र और हम्माम की दूसरी आवश्यक वस्तुओं को उठाया और मुझसे कहा मोहम्मद अली मैं दासियों के साथ हम्माम जा रही हूं तुम यहीं रहो और शपथ खाओ कि घर से बाहर नहीं जाओगे ताकि मैं निश्चिंत हो जाऊं। मैंने भी उसे विश्वास दिलाने के लिए शपथ खा ली और कहा कि जब तक तुम वापस नहीं आ जाती तब तक घर से बाहर नहीं जाऊंगा। उसके बाद उसने मुझसे विदा ली और दासियों के साथ हम्माम चली गयी। अभी अधिक समय नहीं गुज़रा था कि अचानक घर का दरवाज़ा खुल गया और एक सफेद बालों वाली बुढ़िया अंदर प्रांगण में आयी। उसने सलाम किया और कहा ख़लीफा के चाचा की बेटी ज़ुबैदा ने तुम्हें अपनी मेहमानी में बुलाया है। मैंने उससे पूछा क्यों? उसने कहा तुम्हारी आवाज़ की प्रसिद्धि उन तक पहुंची है और इसी कारण वह चाहती हैं कि तुम उनकी मेहमानी में भाग लो। मैंने कहा जब तक मेरी पत्नी दुनिया घर वापस नहीं आ जायेगी तब तक मैं कहीं नहीं जाऊंगा। क्योंकि मैंने उसे वचन दिया है और शपथ खाई है। बूढ़ी महिला ने कहा अगर तुम अभी नहीं आये तो संभव है कि ज़ुबैदा नाराज़ हो जायें और उसके बाद पता है कि वह तुम्हारे साथ क्या करेंगी। जब बूढ़ी महिला ने यह कहा तो मैं समझ गया कि बात मानने के लिए अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। यह सोचकर मैं उसके साथ चल पड़ा यहां तक ज़ुबैदा के घर पहुंच गया। ज़ुबैदा ने जैसे ही मुझे देखा कहा अच्छा तो दुनिया के पति तुम हो मैंने कहा कि जी। मैंने तुम्हारे चरित्र और रूप दोनों की सुन्दरता बहुत सुनी है अब जब मैंने तुम्हें देख लिया तो समझ गयी कि लोगों ने तुम्हारे बारे में जो कुछ कहा है वह बिल्कुल सही है। तो अब तुम थोड़ा मेरे लिए कुछ गाओ। मैंने कहा हे मुसलमानों के योग्य शासक की पत्नी आपके आदेश का पालन करता हूं। उसके बाद दासियां मेरे लिए वीणा लेकर आयीं और मैंने भी उसे लिया और गाना गाया और उसे बजाया। एक- दो घंटा गुज़र गया और गाना गाने के बाद ज़ुबैदा ने कहा सचमुच चरित्र और सूरत के सुन्दर होने के अलावा तुम्हारी आवाज़ भी बहुत अच्छी है। ईश्वर तुम्हें सलामत रखे। अब अपनी पत्नी दुनिया के लौटने से पहले तुम घर चले जाओ। मैंने उसके समक्ष आदरभाव प्रकट किया और तुरंत घर लौट आया किन्तु वही हुआ जो नहीं होना चाहिये था। मेरी पत्नी दुनिया हम्माम से वापस आ चुकी थी और वह बहुत परेशान और क्रोधित थी। वह मेरी खोज में थी। जैसे ही उसने मुझे देखा, चिल्लाई और कहा हे बेवफा मैंने नहीं कहा था कि जब तक मैं वापस न आ जाऊं तब तक तुम घर से क़दम बाहर न निकालना? तुमने शपथ नहीं खाई थी? मैं जानती हूं कि तुम्हारा दिल किसी और के पास है जैसे ही तुम मौक़ा पति हो उसके पास चले जाते हो और मुझसे विश्वासघात करते हो। उसने अपनी बातों से मुझे आग की तरह जला दिया और मैंने जो कुछ कहा उस पर उसने विश्वास नहीं किया और मैं अपनी बेगुनाही को सिद्ध नहीं कर सकता था। अंत में उसने अपने एक दास को आदेश दिया कि झूठ बोलने वाले और इस विश्वासघाती व्यक्ति का सिर क़लम कर दे और जो कुछ हमारे और इसके बीच था वह समाप्त हो चुका है। 

शनिवार, 13 फ़रवरी 2016 14:18

ख़लीफ़ये क़ुल्लाबी-5

हमने कहा था कि एक रात को हारून रशीद ने अपने वज़ीर जाफ़र बरमकी के साथ भेस बदलकर शहर घुमने का फैसला किया। उनके साथ तलवार चलाने में दक्ष मसरूर नामक व्यक्ति भी था। हारून रशीद इस प्रकार से नगर के लोगों की हालत जानना चाहता था। जब वे दजला नदी में नाव से घूम फिर रहे थे तो उन्होंने ऐसे व्यक्ति को देखा जिसने अपना परिचय ख़लीफा के रूप में कर रखा था। हारून रशीद जब नक़ली ख़लीफ़ा को देखने में सफल हो गया तो उसने उसकी नाव का पीछा किया और नक़ली ख़लीफ़ा के स्थान का पता लगा लिया पर उन सबको रक्षकों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उन सबने अपने आपको व्यापारी बताया।

 

 

नक़ली ख़लीफ़ा उन सबको अपने साथ महल ले गया और उन सबके लिए शाहाना दस्तरखान लगाने का आदेश दिया। खाने के बाद संगीत बजाई गयी जिसके दौरान नक़ली ख़लीफा कई बार बेहोश हो गया। वह अपने कपड़ों को फाड़ता था और सेवक दूसरे वस्त्र पहनाते थे। वस्त्र बदलने के दौरान हारून रशीद ने देखा कि उसके शरीर पर कोड़े मारे जाने के निशान व घाव हैं। उसने इस बात को अपने मंत्री जाफ़र बरमकी से उसके कान में धीरे से बता दिया। नक़ली ख़लीफ़ा ने हारून रशीद और जाफ़र बरमको को कानाफूसी करते देख लिया। उसने  कानाफूसी का कारण पूछा। जाफर बरमकी ने हारून रशीद के आदेश से कोड़े के घाव का कारण पूछा। नक़ली ख़लीफ़ा ने सबसे पहले ख़लीफ़ा और उसके साथियों के प्रति आदरभाव व्यक्त किया और कहा मैंने इन लोगों को आरंभ से ही पहचान लिया है। उसके बाद उसने अपने जीवन की घटना बयान करने की अनुमति मांगी। हारून रशीद ने जवान युवा की ओर देखा और कहा हे अच्छे आचरण वाले युवा अपने जीवन की घटना बयान कर हम सुनने के लिए तैयार हैं। जवान युवा ने कहा मेरे स्वामी जैसाकि आप समझ गये कि मैं ख़लीफ़ा नहीं हूं और मैंने झूठ ही अपना नाम ख़लीफ़ा रख लिया है क्योंकि इसकी वजह से मैं जो भी चाहता हूं कर सकता हूं। मेरा वास्तविक नाम मोहम्मद अली है और मैं जौहरी अर्थात सुनार अली का बेटा हूं। शायद आप मेरे पिता को पहचानते हों। क्योंकि वह शहर के गणमान्य व्यक्ति थे। उन्होंने अपने मरने के बाद मेरे लिए बहुत सारा धन छोड़ा जिसमें हीरा -जवाहेरात भी शामिल हैं। मैंने भी अपने पिता के रास्ते को अपनाया और मैं भी हीरा- जवाहेरात बेचने लगा और उस संपत्ति में दिन- प्रतिदिन वृद्धि हो गयी। रात- दिन पैसा कमाने की सोच में लगा रहा।

 

 

मेरी अच्छी आवाज़ भी थी और बीन भी बजाता था। मेरी आवाज़ की प्रसिद्धि दूर- दूर तक फैल गयी। एक दिन मैं अपनी दुकान के अंदर बैठा था कि एक महिला घोड़े पर सवार होकर वहां आयी। वह बहुत मूल्यवान वस्त्र धारण किये हुए थी और उसके साथ जो दासियां थीं उससे ज्ञात था कि वह नगर के किसी प्रतिष्ठित घर की थी। वह अपने घोड़े से नीचे उतरी और तुरंत उसने मुझसे पूछा कि मोहम्द अली जौहरी तुम हो? मैंने कहा जी हां। उसने कहा मुझे गले का सुन्दर हार चाहिये जो मेरे योग्य हो। मैंने कहा जो कुछ इस दुकान में है उसे आपको दिखाता हूं जिसे भी आप पसंद करेंगी उसे गर्व से आपकी सेवा में पेश करूंगा। दुकान में बहुत से सुन्दर हार थे एक के बाद दूसरे सुन्दर हार दिखाने ले गया और उसे दिखाया परंतु उसने किसी को भी पसंद नहीं किया उसने कहा तुम्हारे पास जो बेहतरीन हार है वह मुझे दिखाओ। मैं एक छोटा और बहुत ही मूल्यवान हार ले आया और उसे दिखाया। यह वह हार था जिसे मेरे पिता ने एक लाख सिक्के में ख़रीदा था और मैं नहीं सोचता था कि बग़दाद में कोई इस हार को ख़रीद सकेगा। उसने जैसे ही उस हार को देखा कहा यही हार मुझे चाहिये। काफी समय से इस प्रकार के जवाहेरात की खोज में थी उसे तुम कितने में बेचेगो? मैंने कहा मेरे पिता ने कई साल पहले एक लाख सिक्के में ख़रीदा था।

 

 

उसने कहा कि मैं इसकी क़ीमत से 15 हज़ार सिक्के अधिक दूंगी। मैंने कहा मोहतरमा यह मेरे लिए गर्व की बात है कि आप मेरी दुकान से ख़रीद रही हैं और आप इसका जो फायदा दे रही हैं मैं उसे स्वीकार नहीं करूंगा। उसने कहा हे जवान संकोच से काम लेने की कोई बात नहीं है। मैं इस हार के बदले तुम्हें एक लाख 15 हज़ार सिक्के दूंगी परंतु इस समय मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है। तू मेरे साथ मेरे घर चल वहां पर मैं पूरे पैसे दे दूंगी। मैंने भी हार उसे दे दिया और उसके बाद दुकान बंद कर दी और उसके और उसकी दासियों के साथ चल पड़ा। गली के बाद गली तय करता हुआ नगर में उसके भव्यशाली मकान तक पहुंचा। मकान देखने से ही लग रहा था कि बग़दाद के किसी गणमान्य व्यक्ति का मकान है पंरतु नहीं जानता था कि यह किसका घर है और इस महिला का उससे क्या संबंध है। बहरहाल वह महिला अपने मकान में प्रविष्ट हुई और मैं कुछ देर तक दरवाज़े पर खड़ा रहा। कुछ देर के बाद एक दासी आयी और उसने कहा मेरी मालेकिन ने कहा है कि मकान के अंदर आओ मैं भी मकान के अंदर चला गया। दलान से गुज़र कर घर के चौड़े प्रांगड में पहुंचा। जैसे ही प्रांगड में कदम रखा मैंने उसी महिला को देखा उसने अपने चेहरे से नक़ाब हटा दिया और उसका सुन्दर चेहरा चौदहवीं के चांद की तरह चमक रहा था। वह अपने गले में सुन्दर हार भी पहने हुए थी उसने कहा काफी समय से मैं तुम पर नज़र रखे थी उसने बहुत प्यारे अंदाज में मुझसे अपना प्यार दिखाया और कहा जानते हो मैं कौन हूं? मैंने कहा मोहतरमा मैं इतना जानता हूं कि आप किसी शरीफ और गणमान्य व्यक्ति के घर की हैं। उसने कहा मेरा नाम दुनिया है और मैं ख़लीफा के मंत्री जाफ़र बरमकी की बहन हूं। जवान युवा ने जैसे ही यह कहा जाफर बरमकी बेचैन हो गया उसने आपत्ति करनी चाही परंतु हारून रशीद ने उसे रोक दिया और कहा जाफर चुप रहो ताकि यह जवान पूरी घटना बयान कर सके।

 

 

मंत्री ने उसके आदेश का पालन किया और वह चुप हो गया। नक़ली ख़लीफा ने कहा दुनिया ने मुझसे कहा तुम मुझसे विवाह करोगे? मैंने कहा दुनिया जी आप गणमान्य परिवार की हैं और मैं एक जौहरी का बेटा हूं। मैं कहां और आप कहां? उसने कहा हे मोहम्मद अली बहाना मत बनाओ। अगर तुम मुझसे विवाह नहीं करना चाहते हो तो इससे अधिक तुमसे दिल न लगाऊं और अगर मुझे योग्य समझते हो तो बता दो ताकि मैं आदेश दूं अभी निकाह पढ़ने वाले और गवाहों को बुलाया जाये और हमारा विवाह हो जाये। मैंने भी सहर्ष स्वीकार कर लिया।

शनिवार, 06 फ़रवरी 2016 16:02

ख़लीफ़ये क़ुल्लाबी-4

पुराने समय की बात है, एक रात हारून रशीद ने अपने मंत्री जाफ़र बरमकी और प्रसिद्ध तलवार चलाने वाले मसरूर के साथ वेष बदल कर शहर जाने का फ़ैसला किया ताकि लोगों की स्थिति को निकट से देख सकें। जब वह दजला नदी के किनारे पहुंचे तो उन्होंने नाविकों से कहा कि वे उन्हें दजला नदी में घुमाएं। एक बूढ़े व्यक्ति ने उनसे कहा कि अभी दजला नदी में घूमने फिरने का समय नहीं है क्योंकि हर रात हारून रशीद अपनी नौका पर सवार होकर दजला नदी घूमने निकलता है और उसके पहरेदार यह बांग लगाते हैं कि इस दौरान जो भी नदी में दिखा उसकी गर्दन मार दी जाएगी। हारून रशीद को यह सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ। उसने उस ढोंगी ख़लीफ़ा को देखने की ठान ली।

 

उसने कुछ पैसे देकर उस बूढ़े व्यक्ति को नदी में घूमने के लिए तैयार कर लिया और अंततः वह ढोंगी ख़लीफ़ा को देखने में सफल हुआ। उसने ढोंगी ख़लीफ़ा की नौका देखी और उसक पीछा करने लगा और जैसे ही वह ढोंगी ख़लीफ़ा की नौका के निकट पहुंचा उसके सिपाहियों ने उसे गिरफ़्तार कर लिया। हारून रशीद ने स्वयं को व्यापारी बताया। ढोंगी ख़लीफ़ा उन्हें अपने साथ अपने महल में लाया और उसने शाही दस्तरख़ान बिछाने का आदेश दिया। खाना खाने के बाद संगीत का कार्यक्रम था और ढोंगी ख़लीफ़ा संगीत की ताल में आपे से बाहर हो गया और उसने अपने सारे कपड़े फाड़ दिए और उसके बाद सेविकाओं ने उसको नया वस्त्र पहनाया। जब उसे नये वस्त्र पहनाये जा रहे थे तभी ख़लीफ़ा हारून रशीद ने ढोंगी ख़लीफ़ा के शरीर पर कोड़े के घाव देखे और उसने जाफ़र बरमकी को चुपके से यह बात बता दी। ख़लीफ़ा ने उन्हें बात करते देख लिया और उसने पूछा कि तुम लोग क्या बातें कर रहे हो। जाफ़र बरमकी ने कपड़े के फटने को बहाना बनाकर बात टाल दी।

ढोंगी ख़लीफ़ा ने कहा कि यह वे वस्त्र हैं जिन्हे हमने परिश्रम से कमाये पैसे से ख़रीदा है और इसके साथ जो चाहता हूंकरता हूं और उसके बाद उसे दोबारा नहीं पहनता और बैठक में बैठ किसी एक व्यक्ति को पांच सौ सिक्को के साथ भेंट कर देता हूं।

मंत्री ने जब यह देखा कि संभव है कि उस युवा को उसकी बातें बुरी लगी हों, तो उसने कहा कि महाराज, संपत्ति आप की है, आपकी जो इच्छा हो उसे करें, यह कितना अच्छा है कि आपके इस काम का दूसरे लोग भी लाभ उठा रहे हैं।

 

 

ढोंगी ख़लीफ़ा को जाफ़र बरमकी की बात पसंद आई और उसने उन कपड़ों से एक कपड़ा और एक हज़ार सिक्के, उन्हें उपहार स्वरूप दे दिए। हारून रशीद हर क्षण उस युवा के कार्य से आश्चर्य चकित होता जा रहा था। उसने एक बार फिर अपना मुंह अपने मंत्री के कान के निकट किया और कहा कि जाफ़र, अब हमको यह देखना है कि इस युवा का काम क्या है, वह यह काम जो कर रहा है इसका लक्ष्य क्या है? उससे उस कोड़े के निशान के बारे में पूछो जो मैंने उसकी पीठ पर देखा है। मंत्री ने कहा कि महाराज बेहतर है कि जल्दबाज़ी न करें, कहीं मामला बिगड़ न जाए। यदि आप धैर्य करें तो बहुत शीघ्र ही सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। हारून रशीद ने कहा कि मैं सौगंध खाता हूं यदि तुमने नहीं पूछा तो जब महल लौटेंगे तो जल्लादों को तुम्हारी गर्दन मारने का आदेश दे दूंगा।

 

ढोंगी ख़लीफ़ा ने एक बार फिर उनको काना फूसी करते देख लिया। उसने पूछा कि तुम दोनों बहुत अधिक काना फूसी कर रहे, मुझे भी बताओ की तुम क्या बात कर रहे थे। जाफ़र बरमकी ने उत्तर दियाः महाराज आप ही की अच्छी अच्छी बातें हो रही थीं। खलीफ़ा ने कहाः कुछ छिपाओ नहीं, जो बातें कर रहे थे वह खुलकर बताओ। जाफ़र ने कहाः महाराज गुस्ताख़ी माफ़, जब आप पर्दे के पीछे अपना वस्त्र बदल रहे थे, उसी समय कुछ क्षणों के लिए पर्दा हट गया और मेरे मित्र ने आपके शरीर पर कोड़े के निशान देखे, अब इनको जिज्ञासा है कि यह कोड़े के निशान आपके शरीर पर कैसे लगे। युवा ने जब यह सुना तो वह हंसने लगा और उसने कहाः अब मेरी समझ में आया कि तुम लोग काना फूसी क्यों कर रहे थे। उसके बारे में जानने में कोई समस्या नहीं है, काश, शीघ्र मुझसे ही पूछ लिया होता, तो मैं तुम्हें बता देता।

 

मेरी कहानी और इन कोड़ों के निशान की कहानी बहुत लंबी है, यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हें बताऊं। जाफ़र बरमकी ने कहा, जी महाराज, हम पूरी तरह सुनने को तैयार हैं।  युवा ने कहा, महाराज, जब मामला यहां तक पहुंच गया है तो अब व्यापारियों के रूप से बाहर आएं, मैंने आप लोगों को पहचान लिया है। मैं भलिभांति जानता हूं कि आज मेरे मेहमान, मुसलमानो के कमान्डर,  उनके मंत्री जाफ़र बरमकी और प्रसिद्ध तलवार चलाने वाला मसरूर हैं। मैंने आरंभ में ही आप लोगों को पहचान लिया था और यह प्रयास किया कि ऐसी मेहमान नवाज़ी की जाए जो आप के योग्य हो। यह रहस्य न बताने का कारण यह था कि मैंने सोचा कि महान ख़लीफ़ा स्वयं अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं, इसीलिए मैं चुप रहा किन्तु अब आप मेरे बारे में जानना चाहते हैं तो मैं आप लोगों से अनुमति लेकर अपनी कहानी सुनाता हूं क्योंकि मेरी कहानी में कुछ बिन्दु हैं जिनसे आपको कष्ट हो सकता है।  जाफ़र बरमकी ने एक बार फिर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास किया किन्तु अब कोई फ़ायदा नहीं था। हारून ने युवा से कहा कि हे भले मनुष्य, अब तू हमें अपनी कहानी सुना, हम सब सुनने को तैयार हैं।(AK)   

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मंगलवार, 02 फ़रवरी 2016 17:24

ख़लीफ़ये क़ुल्लाबी-3

हमने बताया था कि एक रात हारून रशीद ने अपने मंत्री जाफ़र बरमक्की और मसरूर शमशीरज़न के साथ भेस बदलकर शहर में निकलने का इरादा किया ताकि लोगों के हालात से अवगत हो सके। जब वे दजला नदी पर पहुंचे तो उन्होंने एक नाविक से कहा कि उन्हें दजला की सैर कराए। बूढ़े आदमी ने उनसे कहा कि यह घूमने फिरने का वक़्त नहीं है। इसलिए कि हर रात हारून रशीद दजला पहुंचकर नाव से सैर करता है और उसके एलची एलान करते हैं कि जो कोई भी इसके बाद, दजला में दिखाई देगा उसकी गर्दन मार दी जाएगी। हारून रशीद उसकी यह बात सुनकर आश्चर्य में पड़ गया, लेकिन पैसे देकर उसने नाविक को राज़ी कर लिया और झूठे ख़लीफ़ा को देखने में सफल हो गया। ख़लीफ़ा ने नाविक को अधिक पैसे देकर अगली रात के लिए भी दजला की सैर के लिए तैयार कर लिया। अंततः वे बनावटी ख़लीफ़ा तक पहुंचने में सफल हो गए, लेकिन वे ख़लीफ़ा के संतरियों के हाथों गिरफ़्तार हो जाते हैं। जब वे ख़लीफ़ा से व्यापारी के रूप में अपना परिचय कराते हैं तो ख़लीफ़ा उन्हें अपने साथ महल में ले जाता है और मेहमानों की भांति उनका स्वागत करता है। महल की एक एक चीज़ को देखकर वे अचरज में पड़ जाते हैं। इस बीच, बड़ा सा दस्तरख़ान लगाया जाता है और सब दस्तरख़ान पर बैठकर खाने में व्यस्त हो जाते हैं।

 

 

कुछ देर बाद, हारून ने वज़ीर के कान के पास अपना मूंह ले जाकर उससे कहा, जाफ़र मैं असली ख़लीफ़ा हूं, इसके बावजूद मेरे महल में इस तरह का ताम झाम नहीं है और मैंने अपने दस्तरख़ान पर कभी भी ऐसी ऐसी अनुकंपायें नहीं देखी हैं। काश हम यह जान सकते कि यह युवा क्या करता है और कैसे यहां तक पहुंचा है।

ख़लीफ़ा ने हारून रशीद और जाफ़र बरमक्की को कानाफूंसी करते हुए देख लिया और कहा, लोगों के समूह में बैठकर कानाफूंसी करना असभ्यता है, अगर कुछ बताने योग्य है तो कहो ताकि हम भी सुन लें। जाफ़र बरमक्की ने माफ़ी मांगते हुए कहा, श्रीमानजी मेरे साथी कह रहे हैं कि हम अब तक कई देशों की यात्रा कर चुके हैं और अनेक राजाओं के दस्तरख़ान पर बैठ चुके हैं, लेकिन हमने कभी ऐसा शानदार दस्तरख़ान नहीं देखा था। कितना अच्छा होता अगर इन समस्त अनुकंपाओं के साथ कोई गाने वाला भी होता। ख़लीफ़ा ने बरमक्की की बात सुनकर निकट ही रखे हुए एक तबले पर हाथ मारा। तुरंत हाल का द्वार खुला और संगीत के उपकरण के साथ एक युवक अंदर आया और हाल में एक कुर्सी पर बैठ गया। उसने साज़ के तारों को छेड़ा और गाना शुरू कर दिया। कुछ देर वह गाता बजाता रहा कि अचानक बनावटी ख़लीफ़ा सिंहासन से उठा और होश खो बैठा और उसने अपने वस्त्रों को फाड़ डाला। सेवकों ने तुरंत वहां पर्दा खींचा और उसके वस्त्र बदले औऱ पुनः सिंहासन पर बैठा दिया। ख़लीफ़ा जब थोड़ा सा होश में आया तो उसने मनमोहक आवाज़ वाले सेवक से कहा कि फिर से गाना और बजाना शुरू करे। सेवक ने भी अनुपालन किया और गंमगीन गीत गाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद, ख़लीफ़ा रोने लगा, अपने स्थान से उठा और फिर क़ीमती वस्त्रों को फाड़ डाला। सेवकों ने पुनः उसे नए वस्त्र पहनाए और सिंहासन पर बैठा दिया।

 

 

ख़लीफ़ ने एक बार फिर तबले पर हाथ मारा, हाल का द्वार खुला और इस बार दो युवा सेवक अंदर आए। वे भी आकर कुर्सियों पर बैठ गए। उनमें से एक ने संगीत उपकरण उठाया और बजाना शुरू कर दिया और दूसरे ने मीठी आवाज़ में गाना शुरू कर दिया। ख़लीफ़ा यह दर्द भरे शेर सुनकर फिर से बेक़ाबू होने लगा, वह चीख़ने चिल्लाने लगा और फिर से उसने अपने कपड़े फाड़ डाले और बेहोश होकर फ़र्श पर गिर पड़ा। इस बार भी सेवक वही पर्दा लाए और पर्दे के पीछे उसके वस्त्र बदले और नए वस्त्र पहना दिए। इस दौरान हारून रशीद की नज़र ख़लीफ़ा के नंगे बदन पर पड़ गई। बनावटी ख़लीफ़ा की कमर पर कोड़ों के निशान और पुराने घाव थे। हारून ने जैसे ही उस युवक के शरीर पर कोड़ों के निशान देखे तो जाफ़र से कहा, जाफ़र यह युवक कोई चोर है। वज़ीर ने पूछा, हे ख़लीफ़ा आपको कैसे पता चला। हारून ने कहा, उसकी कमर पर मैंने कोड़ों के निशान देखे हैं। निश्चित रूप से उसे गिरफ़्तार किया गया होगा और चोरी के अपराध में कोड़े लगाए गए होंगे।

बनावटी ख़लीफ़ा जब नए वस्त्र ग्रहण करके सिंहासन पर बैठ गया तो उसने देखा कि उसके मेहमान फिर से कानाफूसी कर रहे हैं। उसने पूछा कि हे सज्जन व्यापारियो, फिर से तुम एक दूसरे के कान में कुछ कह रहे हो और कुछ हमसे छुपा रहे हो।

 

 

जाफ़र बरमक्की ने जवाब दिया, आप से हटकर हम कोई बात नहीं कर रहे हैं, मालिक। मेरा साथी कह रहा है कि हम अब तक कई देशों की यात्रा कर चुके हैं और अनेक राजाओं से मिल चुके हैं, लेकिन कभी किसी राजा को इतने क़ीमती वस्त्र फाड़ते हुए नहीं देखा। मेरे दोस्त का कहना है कि इतने क़ीमती वस्त्रों को फाड़ना अच्छा काम नहीं है।

ख़लीफ़ा ने कहा, यह वह वस्त्र हैं जिन्हें मैंने अपने हाथों से परिश्रम करके ख़रीदा है और जो मेरा दिल चाहेगा मैं वह करूंगा। इसके अलावा मैं पुनः उन्हें नहीं पहनता हूं, बल्कि 500 सिक्के के साथ इस सभा में उपस्थित किसी व्यक्ति को उपहार स्वरूप दे देता हूं।

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बुधवार, 27 जनवरी 2016 17:22

ख़लीफ़ये क़ुल्लाबी-2

हमने बताया था कि एक रात हारून रशीद ने अपने वज़ीर जाफ़र बरमक्की और मसरूर के साथ भेस बदलकर शहर में निकलने का इरादा किया ताकि लोगों के हालात से अवगत हो सके। जब वे दजला नदी पर पहुंचे तो उन्होंने एक नाविक से कहा कि उन्हें दजला की सैर कराए। बूढ़े आदमी ने उनसे कहा कि यह घूमने फिरने का वक़्त नहीं है। इसलिए कि हर रात हारून रशीद दजला पहुंचकर नाव की सैर करता है और उसके एलची एलान करते हैं कि जो कोई भी इसके बाद, दजला में दिखाई देगा उसकी गर्दन मार दी जाएगी। हारून रशीद उसकी यह बात सुनकर आश्चर्य में पड़ गया, लेकिन पैसे देकर उसने नाविक को राज़ी कर लिया और झूठे ख़लीफ़ा को देखने में सफल हो गया। ख़लीफ़ा ने नाविक को अधिक पैसे देकर अगली रात के लिए भी दजला की सैर के लिए तैयार कर लिया।

 

 

दूसरी रात, हारून रशीद ने अपने वज़ीर और मसरूर शमशीरज़न को बुलाया और कहा, तैयार हो जाओ, उस ख़लीफ़ा से मिलने चलना है। यह सुनकर वे हंसने लगे और अपना भेस बदलने चले गए। थोड़ी देर बाद वे तैयार होकर आ गए और तीनों महल से बाहर निकले ताकि उस झूठे ख़लीफ़ के बारे में कोई जानकारी जुटा सकें। जब वे दजला नदी पर पहुंचे तो उन्होंने उस बूढ़े आदमी को देखा कि वह उसी जगह पर उनका इंतज़ार कर रहा है। उन्होंने उसे सलाम किया और नाव पर बैठ गए। अभी बूढ़े आदमी ने अपनी नाव चलाई भी नहीं थी कि उन्होंने देखा दूर से उस झूठे ख़लीफ़ा की नाव उनकी ही ओर आ रही है। वे वहीं रुक गए यहां तक कि नाव उनके निकट आ गई। पिछली रात की भांति उसमें कई सेवक और ग़ुलाम थे और एलची चिल्ला चिल्लाकर लोगों को चेतावनी दे रहे थे कि नदी से दूर चले जाएं।

हारून रशीद ने कहा, ईश्वर की सौगंध अगर यह सब अपनी आँखों से नहीं देखता, तो मुझे यक़ीन नहीं होता। उसके बाद अपनी जेब से 10 सिक्के निकाले और बूढ़े नाविक को देते हुए कहा, यह पैसे लो और अंधेरे में चुपके से नाव का पीछा करो। नदी के किनारे किनारे अंधेरे में वे हमें नहीं देख पायेंगे।

 

 

बूढ़े व्यक्ति की नज़र जब सिक्को पर पड़ी तो उसने बिना कुछ कहे उन्हें ले लिया और नाव चलाने लगा। वे उस नाव का पीछे करने लगे, यहां तक कि नदी के किनारे एक विशाल बाग़ तक पहुंच गए। वहां कुछ सेवक और ग़ुलाम हाथों में मशाले लिए उनका इंतज़ार कर रहे थे। जब वहां नाव पहुंची तो झूठा ख़लीफ़ा उससे उतर गया और वहां उपस्थित लोग उसके लिए सजा हुआ ख़च्चर लेकर आए। झूठा ख़लीफ़ा उस पर बैठ गया और अपने सेवकों के आगे आगे चलने लगा। हारून रशीद ने बूढ़े आदमी से कहा नाव को किनारे पर लगा दे ताकि वे उससे उतर सकें। उसके बाद, हारून रशीद, जाफ़र बरमक्की और मसरूर शमशीरज़न नाव से उतर गए और उन लोगों के पीछे चलने लगे। अभी कुछ क़दम ही गए थे कि चौकीदारों ने उन्हें देख लिया और पकड़ लिया। उन्होंने चौकीदारों से बहुत विनती की कि उन्हें छोड़ दिया जाए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ और वे उन्हें झूठे ख़लीफ़ा के पास ले गए।

उस झूठे ख़लीफ़ा ने क्रोधित होकर उनसे पूछा, यहां किस तरह पहुंचे और किसने उन्हें यहां का पता बताया है। उन्होंने जवाब दिया, हे ज़िल्ले इलाही, हम अजनबी व्यापारी हैं और इस शहर में नए हैं। हम इस इलाक़े में सैर के लिए निकले थे कि आप के लोगों ने हमें पकड़ लिया और वे हमें यहां ले आए।

 

 

झूठे ख़लीफ़ा ने ऊपर से नीचे तक उनपर एक निगाह डाली और कहा, तुम्हारा भाग्य अच्छा था कि तुम अजनबी हो और तुम्हें यहां के नियमों के बारे में जानकारी नहीं है, वरना आज रात को ही तुम्हारी गर्दन मारने का आदेश दे देता। यह कहकर उसने अपने वज़ीर को इशारा किया कि उन्हें उसके महल लाया जाए और मेहमानों की भांति उनका स्वागत किया जाए। वज़ीर ने आज्ञा का पालन किया और कहा, व्यापारियों तुम लोग मेरे साथ आओ, आज रात तुम मुसलमानों के शासक के मेहमान हो। वे वज़ीर के साथ चल दिए और चलते गए चलते गए यहां तक कि एक विशाल और बड़े महल पहुंच गए। महल में लगे हुए समस्त पत्थर मर मर थे और उसके द्वारों को सोने और क़ीमती लकड़ी से बनाया गया था। जब द्वार खुला और वे अंदर गए तो वहां एक बड़ा हाल था, जिसके सामने एक बड़ा सा हौज़ था। पूरे हाल में क़ीमती क़ालीन बिछे हुए थे, उसके अंत में एक मोतियों से जड़ा हुआ एक सिंहासन रखा हुआ था, जहां झूठा ख़लीफ़ा बैठता था। झूठा ख़लीफ़ा वहां जाकर बैठ गया और सेवक और दरबारी पंक्तियां बनाकर खड़े हो गए। थोड़ी देर बाद, हाल के चारो ओर लगे पर्दे हटने लगे, सेवक बड़ा सा दस्तरख़ान लेकर आए और उन्होंने वह हाल के बीच में बिछा दिया। एक के बाद एक नौकर और ग़ुलाम फल और खाने लेकर आने लगे और दस्तरख़ान पर लगाने लगे। झूठे ख़लीफ़ा ने हारून और उसके साथियों की ओर देखकर कहा, हे अजनबी व्यापारियों आगे आओ और इस दस्तरख़ान की अनुकंपाओं से लाभ उठाओ। वे यह सब देखकर अचरज में थे, आगे बढ़े और दस्तरख़ान पर बैठ गए और खाने में व्यस्त हो गए।

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शनिवार, 23 जनवरी 2016 16:59

ख़लीफ़ये क़ुल्लाबी-1

एक रात को हारून रशीद ने अपने मंत्री जाफर बरमकी को बुलाया और उससे कहा जाफर आज रात मैं थका हूं और मैं महल से बाहर चलना चाहता हूं और बग़दाद की गलियों में टहलना चाहता हूं। आओ हम व्यापारियों का वस्त्र धारण करते हैं और विदित में अज्ञात व अनजान बनकर शहर में घूमते हैं ताकि लोगों की हालत से भी अवगत हो जायेंगे। मंत्री ने कहा मेरे स्वामी आप जो आदेश करें मैं वही अंजाम दूंगा।

 

उसके तुरंत बाद राजशाही का वस्त्र उतारा और उसके स्थान पर साधारण वस्त्र पहन लिया। ख़लीफ़ा हारून रशीद ने कहा मैं यह नहीं चाहता कि मेरे साथ अंग रक्षक और दूसरे तामझाम आयें केवल एक तलवार चलाने वाले को सूचित करो और वही हमारे साथ आये। मंत्री ने आदेश का पालन किया और तलवार चलाने वाले मसरूर को सूचित किया और वह उनके साथ आ गया। इस प्रकार तीनों आदमी महल से बाहर गये। वे बग़दाद शहर में इधर- उधर गये यहां तक कि वे दजला नदी के किनारे पहुंचे। कुछ देर तक दजला के किनारे खड़े रहे। वहां उन्होंने देखा कि एक बूढ़ा आदमी नदी के किनारे अपनी नाव में बैठा हुआ है। उन लोगों ने उसे बुलाया और कहा हे बूढ़े सज्जन अपनी नाव से हमें दजला के उस पार ले चलेगा इसके बदले में हम तुझे सोने का एक सिक्का देंगे। बूढ़े व्यक्ति ने कहा यह काम संभव नहीं है।

 

यह समय दजला में घुमने -टहलने का नहीं है। हर रात को हारून रशीद ख़लीफा नाव पर बैठ कर इधर- उधर जाता है और उसके ढिंढ़ोरा पीटने वाले आवाज़ देते हैं कि हे लोगो खलीफा ने कहा है कि जो भी इसके बाद दजला में होगा उसकी गर्दन मार दी जायेगी या उसे उसकी नाव के पाल से लटका दिया जायेगा ताकि वह मर जाये। जब खलीफा हारून रशीद और उसके मंत्री जाफर बरमकी ने यह बात सुनी तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने कहा हे बूढ़े व्यक्ति तुझे दो सिक्के देंगे मुझे नदी के उस पार छोटे मीनार तक पहुंचा दे जब ख़लीफा हारून रशीद दजला से गुज़रेगा जायेगा तो हम छिप कर उसे देखेंगे। बूढ़े व्यक्ति ने स्वीकार कर लिया और कहा, पहले पैसा दो फिर तीनों आदमी सवार हो जाओं। उन लोगों ने पहले पैसा दिया और उसके बाद नाव में बैठ गये। बूढ़े व्यक्ति ने नाव चलाना आरंभ किया अभी नाव अधिक दूर नहीं गयी थी कि अचानक उन लोगों ने एक नाव देखा जिस पर सैकड़ों चेराग़ जल रहे थे और वह नदी के बीच गुज़र रही थी। बूढ़े व्यक्ति ने कहा देखा मैंने कहा था कि ख़लीफा हर रात को दजला नदी में नाव में सवार होकर आता है। ईश्वर हम पर दया करे।

 

 

अगर वह हमें देख लेगा तो हम सबको अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। यह बात उसने कही और नाव को तेज़ी से मीनार की ओर ले गया। जब वे मीनार तक पहुंच गये तो तुरंत नाव से उतर गये और मीनार की सीढ़ियों से ऊपर गये और छिपकर प्रतीक्षा करने लगे कि ख़लीफा की नाव निकट आ जाये। जिस नाव में क़ुल्लाबी या नक़ली ख़लीफा बैठा था उसके अगले भाग में एक शक्तिशाली व्यक्ति खड़ा था और उसके हाथ में सोने का एक चेराग़दान था जिसमें अगरबत्ती जल रही थी और उसकी महक चारों ओर फैल रही थी। नाव के पीछे की ओर दूसरा व्यक्ति खड़ा था जो बहुत क़ीमती वस्त्र पहने हुए था और उसके हाथ में भी सुनहरा चेराग़दान था। नाव के भीतर बहुत सारे दास- दासियां थीं और उनमें से हर एक किसी न किसी काम में व्यस्त था। नाव के ठीक बीच में एक सोने का एक तख्त रखा हुआ था जिस पर एक जवान बैठा हुआ था और मंत्री और तलवार चलाने वाले दो व्यक्ति उसके दायें-बायें खड़े थे। हारून रशीद ने जब यह दृश्य देखा तो उसने आश्चर्य से अपने मंत्री की ओर देखा और कहा जाफर क्या यह मेरा एक बेटा नहीं है? मैं इस अंधेरे में अच्छी तरह से नहीं देख पा रहा हूं इस पर जाफर बरमकी ने कहा हे मेरे स्वामी अगर आप थोड़ा ध्यान से देखें तो समझ जायेंगे कि वह अजनबी है।

 

 

हारून रशीद ने कहा अजीब! ईश्वर की सौगन्ध जो इस नाव के बीच में बैठा है उसके अंदर मुझसे जो कि वास्तविक ख़लीफा हूं कोई चीज़ कम नहीं है। जो इसके दाहिनी ओर खड़ा है वह तुम्हारी तरह है और जो उसकी बायीं ओर खड़ा है वह स्वयं हमारे मसरूर जैसा है। मैं भ्रम में पड़ गया हूं तुम ही बताओ मैं जो देख रहा हूं वह सही है? जाफर बरमकी ने कहा ईश्वर की सौगन्द मुझे भी बड़ा आश्चर्य है मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। कुछ देर में नाव वहां से गुज़र गयी। नाव चलाने वाले बूढ़े व्यक्ति ने कहा। ईश्वर का धन्याद कि सब कुछ ठीक-ठाक गुज़र गया। अब नाव पर बैठो ताकि वापस चलें। हारून रशीद ने पूछा क्या यह नाव हर रात दजला से गुजरती है? नाविक ने कहा हां एक वर्ष के निकट है कि ख़लीफ़ा हर रात नाव पर बैठकर दजला से जाता है।

 

हारून रशीद ने कहा हे भले बूढ़े व्यक्ति अगर तू कल भी ख़लीफा की नाव दिखाने ले आये तो हम तूझे सोने का पांच सिक्का देंगे। इस शहर में हम नये हैं अब तक हमने इतने निकट से ख़लीफा को नहीं देखा था और यह हमारे लिए बड़े गर्व की बात है। बूढ़े व्यक्ति ने स्वीकार कर लिया और वे नाव में बैठकर वापस आ गये।

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बुधवार, 13 जनवरी 2016 16:37

सिन्दबाद की कहानी

फार्स में सिन्दबाद नाम का एक राजा रहता था। उसके पास प्रशिक्षित बाज़ एक बाज़ था जिसे वह बहुत चाहता था और उसे अपने से अलग नहीं करता था। सिन्दबाद के आदेश से बाज़ की गर्दन में सोने का बना एक छोटा प्याला बांध दिया गया था ताकि जब भी उसे प्यास लगे उससे पानी पी ले। एक दिन राजा सिन्दबाद और उसके मंत्री व दास शिकार करने गये। वह सदैव की भांति अपने साथ बाज़ को भी ले गया था। उनकी जाल में एक हिरन फंस गया था। राजा के साथ में जो लोग थे उन्होंने हिरन को चारों ओर से घेर लिया। हिरन ने जाल को फाड़ दिया और वह बाहर निकल कर भागना चाह रहा था। राजा सिन्दबाद ने चिल्ला कर कहा भागने न पाये।

 

 

जिसके सामने से हिरन भाग जायेगा मैं उसकी हत्या का आदेश दे दूंगा। अभी राजा की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि हिरन ने उसकी ओर छलांग लगायी और उसके ऊपर से कूद कर भाग गया। राजा के दासों ने मंत्री को देखा और चुप रहे। मंत्री ने धीरे से राजा के कान में कहा कि हिरन आपके सिर के ऊपर से भागा है। अब क्या करना चाहिये? राजा सिन्दबाद मंत्री के कहने का तात्पर्य समझ गया। वह घोड़े पर सवार हुआ और चिल्ला कर कहा हिरन के पीछे जा रहा हूं और जब तक उसे पकड़ नहीं लूंगा वापस नहीं आऊंगा। यह कहकर उसने हिरन का पीछा किया। बाज़ राजा के कंधे पर बैठा हुआ था। उसने अपने परों को फैलाया और तेज़ी से उड़ा। वह हिरन तक पहुंच गया और अपनी तेज़ चोंच से हिरन की आंखों को फोड़ दिया। हिरन अंधा हो गया अब वह भाग न सका। कुछ ही क्षणों में राजा सिन्दबाद वहां पहुंच गया। उसने हिरन को पकड़ा और उसे ज़िबह कर दिया। उसके बाद उसने हिरन को घोड़े पर रख लिया। इसके बाद वह एक पेड़ की छांव में बैठ गया ताकि थोड़ा विश्राम करे। पेड़ की एक डाल से बूंद-2 करके पानी ज़मीन पर टपक रहा था । राजा सिन्दबाद प्यासा था। वह पानी देखकर प्रसन्न हो गया। सोने का छोटा प्याला उसने बाज़ की गर्दन से खोला और जहां पानी टपक रहा था वहां उसे रख दिया।

 

 

प्याला पानी से भर गया। राजा सिन्दबाद उसे पीने के लिए अपने मुंह के निकट ले गया अचानक बाज़ उड़कर आया और उसे अपने पंख से धक्का मार कर गिरा दिया। प्याला ज़मीन पर गिर गया और उसमें का सारा पानी बह गया। राजा सिन्दबाद ने बाज़ को एक नज़र देखा और प्रेम से कहा तू भी प्यासा है? थोड़ा धैर्य कर। उसके बाद उसने दोबारा प्याले को वहां रख दिया जहां पानी टपक रहा था। दोबारा प्याला भर गया। इस बार उसने प्याले को बाज़ की चोंच के सामने कर दिया और कहा कि पहले तू पी ले उसके बाद मैं किन्तु इस बार भी बाज़ ने अपने पंखों से पानी को ज़मीन पर गिरा दिया। राजा सिन्दबाद ने स्वयं से कहा निश्चित रूप से यह चाहता है कि सबसे पहले मैं अपने घोड़े को पानी पिलाऊं। यह सोचकर उसने दोबारा प्याले को पानी से भरा। इस बार वह उसे घोड़े के समक्ष ले गया। अभी घोड़े ने पानी को मुंह तक नहीं लगाया था कि बाज़ ने उड़कर उसे अपने पंखों से गिरा दिया। अब राजा को क्रोध आ गया। उसने बाज़ की ओर देखा और कहा दुष्ट बाज़ न खुद पानी पी रहा है और न किसी दूसरे को पीने दे रहा है। इसके बाद क्रोध में उसने म्यान से तलवार निकाली और उसने उससे बाज़ के पंख काट दिये। बाज़ खून से रंगीन हो गया। घायल पक्षी की नज़रों से दुःख झलक रहा था। उसने राजा सिन्दबाद को अपनी नज़रों से देखा उसके बाद उसने अपने सिर से पेड़ की डाल की ओर संकेत किया। राजा बाज़ के इशारे को समझ गया।

 

 

उसे सिर उठाकर ऊपर देखा तो उसने विश्वास न करने वाला दृश्य दिखाई दिया। मरा हुआ बड़ा व डरावना सांप जो डाल में लिपटा हुआ था और उसके मुंह से बूंद -2 कर उसका विष टपक रहा था। राजा सिन्दबाद यह दृश्य देखकर हतप्रभ रह गया। इसके बाद वह अपने किये पर बहुत शर्मीन्दा हुआ और चीख मारी। घायल बाज़ को हाथ में लिया और उसके खून से रंगीन पंखों को चूमा और कहा मेरे दयालु पक्षी तूने मुझे बचा लिया और मैंने तेरे साथ क्या किया। उसके बाद उसने बाज़ को अपनी छाती से लगा लिया और घोड़े पर बैठा और तेज़ी से महल की ओर आया। वह थका और दुःखी महल पहुंचा। हिरन को महल के रसोइघर में दिया और सिंहासन पर बैठ गया जबकि उसकी बग़ल में बाज़ भी था। बाज़ अंतिम सांसें ले रहा था। राजा सिन्दबाद क्रोध और पछतावे के साथ उसे देख रहा था और उसके पंखों को प्यार कर रहा था और सहला रहा था। अंततः बाज़ ने अंतिम सांस ली और राजा सिन्दबाद के हाथ में दम तोड़ दिया। राजा रह गया परंतु जीवन भर पछताता रहा। 

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मंगलवार, 05 जनवरी 2016 15:45

अबूसब्र और अबूक़ीर की कहानी-6

हमने आपको यह बताया था कि इस्कंदरिया शहर में एक रंगरेज़ और एक नाई रहते थे। उनका नाम अबू क़ीर और अबू सब्र था। वे आपस में दोस्त थे। वे दोनों रोज़ी की तलाश में दूसरे शहर जाते हैं और बड़ी कठिनाई के बाद नए शहर में रोज़ी रोटी का इन्तेज़ाम करने में सफल हो जाते हैं। एक राजा की मदद से रंगरेज़ी की दुकान खोल लेता है जो बहुत चलती है और दूसरा सार्वजनिक हम्माम बनवाता है जिसे लोग बहुत पसंद करते हैं। इसी प्रकार पूरी कहानी के दौरान आपको यह बताया कि अबू क़ीर एक झूठा व धोखेबाज़ व्यक्ति था जब्कि अबू सब्र जो नाई था, ईमानदार व सच्चा आदमी था। कहानी यहां तक पहुंची थी कि अबू क़ीर राजा के पास जाता है और अबू सब्र के ख़िलाफ़ कान भरता है और कहता है कि अबू सब्र आपको जान से मारना चाहता है। उसने एक ज़हरीली दवा बनायी है।

 

 

अगर इस बार बादशाह सलामत उसके हम्माम में जाएंगे तो वह आपसे कहेगा कि उस दवा को बदन पर मलवाएं कि उससे रंग अधिक साफ़ होता है। अगर आपने उस दवा को बदन पर मलवा लिया तो उसमें मौजूद ज़हर फ़ौरन असर करेगा और आप की मौत हो जाएगी। बादशाह यह सुन कर बहुत ग़ुस्सा हुआ और उसने अबू क़ीर से कहा कि वह इस बात को किसी को न बताए। उसके बाद उसने अबू क़ीर की बात की सच्चाई को परखने के लिए हम्माम जाने का फ़ैसला किया। अबू सब्र को बादशाह के हम्माम आने के इरादे की ख़बर दी गयी। अबू सब्र ने हम्माम तय्यार कर दिया और राजा का इंतेज़ार करने लगा। राजा अपने साथियों के साथ हम्माम पहुंचा। अबू सब्र भी विगत की तरह राजा को नहलाने के लिए हम्माम में गया। राजा के हाथ पैर धुलाए। उसके बाद उसने राजा से कहा कि बादशाह सलामत मैंने एक दवा तय्यार की है अगर आप उसे अपने बदन पर मलेंगे तो आपका रंग और साफ़ हो जाएगा। राजा ने कहा, दवा लाओ देखूं। अबू सब्र दवा ले आया। राजा ने दवा को सूंघा तो वह बहुत बद्बूदार थी। वह समझ गया कि यह वही ज़हरीली चीज़ है जिसके बारे में अबू क़ीर ने बताया था। बादशाह ने चिल्ला कर अपने सिपाहियों को हुक्म दिया, इस धोखेबाज़ व्यक्ति को गिरफ़्तार कर लो।

 

 

अबू सब्र को गिरफ़्तार कर लिया। राजा भी ख़ामोशी से हम्माम से बाहर निकला और महल की ओर लौट गया। महल में अबू सब्र को हाथ बांध कर राजा के सामने लाया गया। राजा ने हुक्म दिया कि अबू सब्र को गाय की खाल में लपेट कर नदी में डाल दिया जाए। जिस व्यक्ति को यह काम सौंपा गया उसका नाम क़िब्तान था। वह नदी के बहुत दूर क्षेत्र की ओर ले गया और उससे कहा, हे भाई! मैं एक बार तुम्हारे हम्माम आया था तो तुमने बहुत अच्छा व्यवहार किया था। तुमने ऐसा क्या किया जो राजा तुमसे इतना क्रोधित हो गया और उसने तुम्हें जान से मारने का हुक्म दे दिया। अबू सब्र ने कहा कि ईश्वर की सौगंध मैंने कोई बुरा काम नहीं किया और मैं यह भी नहीं जानता कि किस जुर्म की सज़ा में मुझे जान से मारने का हुक्म दिया गया है। क़िब्तान ने कहा कि ज़रूर किसी ने तुम्हारे बारे में राजा के कान भरे हैं। मैं तुम्हें नहीं मारुंगा। पहली नाव से तुम्हें तुम्हारे शहर भेज दूंगा। उसके बाद अबू सब्र को मछली पकड़ने का जाल दिया और कहा,तुम इस जाल से मछली पकड़ों। चूंकि मैं राजा के महल के लिए मछली पकड़ता हूं और आज राजा के आदेश के कारण मछली नहीं पकड़ सकता। एक घंटे में राजा के नौकर आएंगे मछली लेने के लिए तो जो मछली तुम पकड़ना उसे राजा के नौकरों को दे देना कि वे लेते जाएं। तुम मेरे लौटने का इंतेज़ार करना।

 

 

 

दूसरी ओर राजा का हाल सुनिए। नदी राजा के महल की खिड़की से होकर गुज़री थी। राजा जिस वक़्त यह देखने के लिए अबू सब्र को नदी में कहां डुबोते हैं, महल की खिड़की के पास खड़ा हुआ कि अंगूठी उसके हाथ से नदी में गिर गयी। यह अंगूठी जादुयी थी और राजा के क्रोधित होने की हालत में उसमें से तलवार की तरह बिजली निकलती और राजा के दुश्मन की गर्दन मार देती थी। राजा ने किसी से अंगूठी गिरने की बात न बतायी। और इस राज़ को अपने मन में छिपाए रखा। उधर अबू सब्र का हाल सुनिए। उसने कुछ मछलियां पकड़ीं और उसमें से एक मछली अपने लिए रख ली। मछली का पेट उसने चीरा ताकि उसे साफ़ करे तो अचानक उसकी नज़र मछली के पेट में मौजूद अंगूठी पर पड़ी। अबू सब्र ने अंगुठी पहन ली। उसे उस अंगूठी के जादू के बारे में कुछ नहीं मालूम था। उसी वक़्त राजा के दो नौकर उसके पाए पहुंचे। अबू सब्र ने अपना हाथ उनकी ओर बढ़ाया ही था कि अचानक अंगूठी से आग जैसी बिजली निकली और उसने दोनों नौकरों के सिर धड़ से जुदा कर दिए। अबू सब्र यह देख कर हैरत में पड़ गया और सोच में डूब गया। कुछ देर बाद क़िब्तान पहुंचा।

 

 

जैसे ही उसकी नज़र राजा के नौकरों के शव पर पड़ी वह घबरा गया। उसने अबू सब्र की ओर नज़र उठायी ताकि उससे दोनों नौकरों के मारे जाने का कारण पूछे की उसकी नज़र अबू सब्र के हाथ में पड़ी अंगूठी पर पड़ी। क़िब्तान ने चिल्ला कर कहा, अपनी जगह से हिलना नहीं और हाथ भी मत हिलाना वरना मैं भी मारा जाउंगा। अबू सब्र को यह सुनकर बहुत हैरत हुयी और वह उसी तरह मूरत बना खड़ा रहा। क़िब्तान ने कहा, यह अंगूठी कहां से मिली। अबू सब्र ने सारी घटना सुनायी। क़िब्तान ने उससे कहा कि यह अंगूठी जादुई है और इसके ज़रिए एक लश्कर को ख़त्म किया जा सकता है। अबू सब्र ने कुछ सोचा और कहा, मुझे राजा के पास ले चलो। क़िब्तान राज़ी हो गया और उसने कहा कि ठीक है ले चलूंगा। चूंकि अब मुझे तुम्हारे बारे में कोई चिंता नहीं है तुम अगर चाहो तो राजा और उसके दरबारियों को ख़त्म कर सकते हो। इसके बाद क़िब्तान ने अबू सब्र को नाव पर सवार किया और राजा के महल पहुंचा। अबू सब्र को महल पहुंचाया। देखा कि राजा अपने सिंहासन पर बैठा है और बहुत दुखी है। राजा के दुखी होने का कारण वह अंगूठी थी जो नदी में गिर गयी थी।

 

 

राजा ने जैसे ही अबू सब्र को देखा तो कहा, तुम अभी भी ज़िन्दा हो? अबू सब्र ने सारी घटना सुनायी और कहा कि इस वक़्त आपकी जादू की अंगूठी मेरे पास है। मैं आया हूं कि इसे आपके हवाले कर दूं। अंगूठी लीजिए और अगर मैंने कोई ऐसा जुर्म किया है कि मुझे जान से मार दिया जाए तो मुझे मारने से पहले मेरा जुर्म मुझे बताइये। राजा ने अबू सब्र को गले लगाया और कहा, तुम एक शरीफ़ व्यक्ति हो। उसके बाद राजा ने अबू क़ीर की बातें उसे बतायीं। अबू सब्र ने भी अबू क़ीर से अपनी दोस्ती और उसके साथ सफ़र के बारे में राजा को बताया और कहा कि अबू क़ीर ने ही उस दवा के बनाने का सुझाव दिया था। राजा ने आदेश दिया कि अबू क़ीर को गिरफ़्तार करने के बाद शहर की गलियों में फिराया जाए और फिर गाय की खाल में लपेट कर नदी में डाल दिया जाए। अबू सब्र ने राजा से कहा, बादशाह सलामत! मैं अपनी शिकायत वापस लेता हूं, उसे माफ़ करके आज़ाद कर दीजिए। राजा ने कहा कि अगर तुम माफ़ भी कर दो तब भी मैं उसे माफ़ नहीं करुंगा। उसे जुर्म की सज़ा मिलनी चाहिए। उसके बाद राजा ने सिपाही को आदेश दिया कि अबू क़ीर को सज़ा दे। उसके बाद अबू सब्र राजा की ओर से दी गयी नाव पर सवार होकर अपने नौकरों व धन के साथ अपने शहर लौट गया। लहरें अबू क़ीर के शव को तट पर ले आयी थीं। अबू सब्र अबू क़ीर के शव को शहर ले गया और दफ़्न कर दिया। उसके बाद उसने अबू सब्र के लिए एक मक़बरा बनाने और उसके दरवाज़े पर यह लिखने का आदेश दिया, “जिसकी प्रवृत्ति बुरी हो उससे भलाई की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।”

 

 

अबू सब्र वर्षों अच्छा जीवन बिताने के बाद इस दुनिया से चल बसा। उसकी वसीयत के अनुसार,उसे भी उसके दोस्त अबू क़ीर के बग़ल में दफ़्न कर दिया गया और वह मक़बरा अबू क़ीर व अबू सब्र के नाम से मशहूर हुआ। 

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अबू क़ीर रंगरेज़ और अबू सब्र नाई था। अबू क़ीर झूठा और धोखेबाज़ था लेकिन अबू सब्र ऐसा नहीं था। धंधा नहीं हो पाने के कारण दोनों ने यात्रा का निर्णय किया। सफ़र में अबू क़ीर बस खाता और सोता था और अबू सब्र काम करता था। ज़्यादा काम करने के कारण अबू सब्र बीमार पड़ गया। अबू क़ीर ने अपने दोस्त को उसी हालत में छोड़ा और शहर में काम ढूंढने निकल पड़ा।

 

शहर में जितने रंगरेज़ थे वह काले रंग के अलावा और कोई रंग नहीं जानते थे। इस तरह अबू क़ीर ने वहां के राजा की मदद से अपना कारोबार खड़ा कर लिया और उसकी आमदनी होने लगी। उसकी दुकान राजा का रंगख़ाना के नाम से मशहूर हो गई। अबू सब्र भी तबीयत में सुधार आने के बाद काम की तलाश में निकला और उसने राजा की मदद से एक सार्वजनिक हम्माम बना लिया। उसने एलान कर दिया कि हमाम में नहाने के लिए जिसके पास जितने पैसे हैं उतने ही दे दे। उसने हम्माम का दरवाज़ा खोल दिया और लोग झुंड के झुंड आने लगे और हम्माम में नहाने लगे। लोग नहाते और फिर जितने पैसे उनके पास होते थे उसी हिसाब से नहाने का पैसा देकर चले जाते थे। सबू सब्र ने देखा कि रात होने से पहले ही उसका संदूक़ पैसों से भर गया है। अगले दिन अबू सब्र को सूचना दी गई कि रानी हम्माम में नहाने के लिए आने वाली हैं। अबू सब्र ने एलान कर दिया कि आज हम्माम में पुरुषों का आना मना है। उसने संदूक़ पर एक दासी को बिठा दिया और ख़ुद घर चला गया।

 

 

रानी अपनी दासियों के साथ हम्माम में गई और लौटते समय एक हज़ार सिक्के दे गई। उसके बाद से नियम हो गया कि सुबह से दोपहर तक हम्माम पुरुषों के लिए और दोपहर से रात तक महिलाओं के लिए विशेष रहेगा। एक दिन क़बतान भी हम्माम में आया जो समुद्री यात्रा में अबू सब्र के साथ बहुत मेहरबानी से पेश आया था। अबू सब्र ने उससे नहाने के पैसे नहीं लिए। अब अबू क़ीर का क़िस्सा सुनिए। हम्माम की ख्याति अबू क़ीर तक पहुंची। एक दिन वह भी घोड़े पर सवार होकर हम्माम पहुंचा उसके साथ आठ ग़ुलाम थे। अबू सब्र उसे देखकर बहुत खुश हुआ। अबू क़ीर ने नाराज़ होकर कहा कि ख़ूब दोस्ती निभाई है तुमने। इतने दिन हो गए मुझे तुम्हारी कोई ख़बर नहीं मिली। इसी शहर में कपड़े रंगने की मेरी दुकान है जो बहुत मशहूर है लेकिन तुम कभी नहीं आए। मैं तुमको ढूंढ ढूंढ के थक गया। मैं अपने ग़ुलाम रोज़ाना सराय में भेजता था कि तुम्हारे बारे में लोगों से पूछे लेकिन तुम्हारा कुछ पता ही नहीं चला। अबू सब्र ने कहा कि अरे तुम भूल गए मैं तो तुम्हारी दुकान पे आया था। तुमने मुझ पर चोरी का इलज़ाम लगा दिया और मेरी पिटाई भी करवाई और बाहर निकाल दिया।

 

 

अबू क़ीर सकपका गया और फिर खिसयानी हंसी हंसते हुए कहने लगा तो वह तुम थे। मैं क़सम खाता हूं तुम्हारे जैसा ही एक व्यक्ति रोज़ आकर मेरी दुकान से चोरी करता था। यह कहकर अबू क़ीर बहुत शर्मिंदा हो गया। उसने अफ़सोस के साथ कहा कि मैं कितना घटिया इंसान हूं कि अपने दोस्त पर चोरी का इलज़ाम लगा बैठा। लेकिन ग़लती तुम्हारी भी है। तुमने अपना परिचय क्यों नहीं करवाया। अब तुम मुझे माफ़ कर दो। अबू सब्र ने विनम्रता से कहा कि मैंने तुम्हें माफ़ किया। अब तुम हम्माम में जाओ। मैं अभी आकर नहाने में तुम्हारी मदद करता हूं। अबू क़ीर ने कहा कि नहाने से पहले मैं यह जानना चाहता हूं कि तुमने यह हम्मा कैसे खोला और यह इतना चल पड़ा। अबू सब्र ने पूरी कहानी और राजा से मिलने वाली मदद के बारे में अबू क़ीर को बता दिया। इसके बाद अबू क़ीर हम्माम में गया और नहाकर बाहर निकला। अबू सब्र ने उसे चाय पिलाई और मिठाई खिलाई। जाते समय अबू क़ीर ने नहाने का पैसा देना चाहा तो अबू सब्र ने लेने से इंकार कर दिया।

 

 

उसने कहा कि हम आपस में मित्र हैं पैसे की क्या बात है। अबू क़ीर ने कहा कि तुम्हारा बहुत शुक्रिया। चलते चलते एक बात कहना चाहता हूं जो तुम्हारे बहुत काम आएगी। तुमने जो हम्माम बनाया है बहुत अच्छ और ख़ूबसूरत है लेकिन इसमें एक कमी है। अबू सब्र ने ताज्जुब से पूछा कि क्या कमी है। अबू क़ीर ने कहा कि हमारे शहर में चूने से एक दवा बनाई जाती थी और नहाते समय उसे लोग बदन पर मलते थे जिससे बदन बहुत साफ़ हो जाता था। तुम यह दवा बनाओ और जब राजा नहाने आए तो उसे इस दवा के बारे में बताओ और उसे उससे नहलाओ। राजा को वह दवा पसंद आएगी और वह तुम्हें इनाम देगा। अबू सब्र ने कहा कि यह तो बड़ी अच्छी बात तुमने बताई। मैं एसा ही करूंगा। अबू क़ीर विदा लेकर चल पड़ा। अबू क़ीर ईर्ष्यालु व्यक्ति था। उसने यह चाल चली थी कि अबू सब्र बदनाम हो जाए। वह सीधे राजा के महल पहुंचा और वहां जाकर उसने राजा से कहा कि मैं आपको बहुत चाहता हूं। मैं आपको एक बड़े राज़ के बारे में सूचित करने आया हूं। राजा ने कहा कि बताओ। अबू क़ीर ने कहा कि मैंने सुना है कि आपके आदेश से एक हम्माम बनाया गया है। राजा ने कहा कि हां एक ग़रीब व्यक्ति आया था। उसने मुझे हम्माम के फ़ायदे गिनवाए। मैंने हम्माम बनाने का आदेश दे दिया। अबू क़ीर ने कहा कि क्या आप हम्माम में नहाने गए हैं। राजा ने कहा कि हां गया हूं। अबू क़ीर ने कहा कि चलिए अच्छा हुआ कि उस दुष्ट व्यक्ति ने आपको अब तक नुक़सान नहीं पहुंचाया है लेकिन आप जान लीजिए कि एक बार फिर अगर आप वहां गए तो आपकी मौत हो जाएगी। राजा ने हैरत से पूछा कि क्यों? अबू क़ीर ख़ुद बहुत दुष्ट आदमी था, उसने कहा कि अबू सब्र नाम का व्यक्ति आपका दुशमन है। उसने आपकी हत्या के लिए हम्माम बनवाया है।

 

 

वह आपको हम्माम में विषाक्त कर देना चाहता है। उसने एक दवा बनाई है जिसमें ज़हर है। जब आप हम्माम में जाएंगे तो वह कहेगा कि लाइए यह दवा आपके बदन पर लगा दूं ताकि आपका शरीर ख़ूब साफ़ हो जाए। यह दवा लगाने से आपकी मौत हो जाएगी। इस व्यक्ति ने दूसरे राजा को जो आपका शत्रु है वचन दिया है कि आपकी हत्या कर देगा और आपकी जेल में बंद उस राजा की पत्नी और बच्चों को स्वतंत्र करवाएगा। मैं वहां उस राजा की जेल में था और मैंने राजा से कहा कि मैं उसके लिए कई प्रकार के रंग बनाउंगा और मैने एसा ही किया और इसके बदले मुझे जेल से आज़ादी मिल गई।

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