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एमकेओ आतंकवादी गुट को इराक़ी सरकार की चेतावनी |
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Sunday, 25 October 2009 |
बग़दाद सरकार ने एमकेओ आतंकवादी गुट की समस्या से छुटकारा पाने के लिए ईरान की सीमा के निकट दियाला प्रांत में अशरफ़ छावनी से इस आतंकवादी गुट के समस्त सदस्यों को सऊदी अरब की सीमा के निकट बादिया मरुस्थल में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है।
इराक़ ने 15 दिसम्बर वर्ष 2009 को अशरफ़ छावनी को ख़ाली करने तथा एमकेओ को बादिया मरुस्थल में स्थानांतरित करने की अंतिम तिथि घोषित किया है। बग़दाद सरकार ने ऐसी स्थिति में यह क़दम उठाया है कि एमकेओ आतंकवादी गुट के सदस्यों ने पिछले तीन महीने के दौरान बारम्बार कई आतंकवादी कार्यवाहियां की है। जिस समय से बग़दाद सरकार ने अशरफ़ छावनी का परिवेष्टन किया और इस छावनी को अपने नियंत्रण में लिया उसी समय से इस आतंकवादी गुट के प्रमुखों ने इस गुट के सदस्यों को उकसा कर दियाला एवं अशरफ़ छावनी के निकटवर्ती क्षेत्रों में झड़पें करवाई जिसके परिणाम स्वरूप 11 लोग मारे गये। अंततः इसी के साथ इराक़ी सुरक्षा बलों ने अशरफ़ छावनी का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। और सर्वप्रथम इस छावनी का नाम नया इराक़ रख दिया है।
इस कार्यवाही के बाद बग़दाद सरकार ने एमकेओ आतंकवादी गुट के सदस्यों को इराक़ छोड़ने के लिए पहली सितम्बर तक समय दिया किन्तु यह विषय व्यवहारिक नहीं हुआ। इसी के साथ चूकिं इराक़ से एमकेओ आतंकवादी गुट को निकालने के लिए इराक़ी जनमत का दबाव बढ़ रहा है इस लिए बग़दाद सरकार ने इस देश से एमकेओ आतंकवादी गुट को निकालने के लिए कई बार समय निर्धारित किया है।
इराक़ी अधिकारियों ने इस बार गम्भीर रूप से कह दिया है कि 15 दिसम्बर, अशरफ़ छावनी से एमकेओ आतंकवादी गुट के निकलने का अंतिम समय है। कुछ टीकाकार एमकेओ आतंकवादी गुट को बादिया मरुस्थल में स्थानांतरित करने हेतु समय के निर्धारण को इराक़ द्वारा तेहरान-बग़दाद संबंधों के सुदृढ़ बनाए जाने का प्रमाण समझ रहे हैं क्योंकि ईरान और इराक़ की संयुक्त सीमाओं के निकट एमकेओ की गतिविधियों पर तेहरान के अधिकारी सदैव आपत्ति जताते रहे हैं। यह विषय, पिछले दो दश्कों के दौरान एमकेओ के अपराधिक क्रियाक्लापों से इराक़ियों के मन में उत्पन्न होने वाली कड़ुवाहट में वृद्धि का कारण बना है इसी लिए बग़दाद सरकार ने एमकेओ आतंकवादी गुट के संबंध में बग़दाद सरकार अपना अंतिम निर्णय सुना दिया है। इस आतंकवादी गुट ने न केवल इराक़ के तानाशाह सद्दाम हुसैन के शासन काल में इराक़ी जनता के विरुद्ध बास पार्टी के बहुत से अपराधों में भाग लिया बल्कि वह पिछले छः वर्षों के दौरान विशेषकर दियाला प्रांत में हिंसा फैलाने के साथ बग़दाद सरकार पर दबाव डालने के लिए अमरीकी मोहरे में परिवर्तित हो चुका था।
इराक़ के बहुत से राजनैतिक दल, इस देश में एमकेओ की उपस्थिति को इराक़ की सुरक्षा व्यवस्था को अस्त वयस्त करने का मुख्य कारक मानते हैं इसीलिए बग़दाद सरकार ने एमकेओ आतंकवादी गुट के विरुद्ध कड़े स्वर के साथ उसे अंतिम अवसर दिया ताकि वह यथाशीघ्र अपने मुख्य केन्द्र को छोड़कर बादिया मरुस्थल में स्थानांतरित हो जाए। बहुत से राजनैतिक टीकाकारों का मानना है कि उत्तरी इराक़ के संकट ग्रस्त क्षेत्र से एमकेओ को दूर करने और इसी के साथ उसे मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थानांतरित करने पर आधारित बग़दाद के फ़ैसले का कारण इस देश की सुरक्षा में विघ्न उत्पन्न करने वाले कारकों में से एक को समाप्त करना है।
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