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  निःसंदेह, ईश्वर ने मेरी बेटी फ़ातेमा के हृदय और पूरे शरीर को उसकी हड्डियों तक ईमान से परिपूर्ण कर दिया है। इस प्रकार से कि वे ईश्वर के आज्ञापालन …
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016 10:42

हज़रत अली अलैहिस्सलाम

अपने परिजनों का सम्मान करो क्योंकि वे तुम्हारे पर हैं जिनसे तुम उड़ते हो और वे तुम्हारी अस्ल व जड़ हैं जिनकी तरफ तुम लौट कर आओगे और वे तुम्हारे …
उन पापों से ईश्वर की शरण चाहता हूं जो मेरे शीघ्र विनाश के कारण हैं। मौत को निकट करते हैं और शहरों को लोगों से खाली कर देते हैं। उन …
जान लो कि ईश्वर के निकट सबसे प्रशंसनीय कार्य वह है जो जारी रहे यद्यपि वह काम कम ही क्यों न हो।
अगर कोई अपने पड़ोसी को दुख पहुंचाएगा तो वह स्वर्ग में नहीं जा सकता। 
बेशक तुम्हारा पालनहारा कुछ दिनों में अधिक क्षमादान करता है तो होशियार रहो और स्वयं को उसका पात्र बनाने का प्रयास करो।“ 
रविवार, 31 जनवरी 2016 10:36

हज़रत अली अलैहिस्सलाम

ईश्वर उस इंसान पर दया करे जो किसी व्यक्ति से तत्वदर्शी बात सुने तो उसे अच्छी तरह सीख ले और जब उसका मार्गदर्शन किया जाये तो उसे स्वीकार करे। 
जो भी अपने मोमिन भाइयों के लिए दुआ करे अर्श से आवाज़ आयेगी कि इसका एक लाख गुना स्वयं तुम्हारे लिए होगा।“
माफ़ न किए जाने वाले पापों में से एक पाप यह है कि पाप करने वाला यह कहे कि काश इस पाप के अलावा किसी और का दंड न दिया …
मंगलवार, 26 जनवरी 2016 10:53

हज़रत अली अलैहिस्सलाम

जिसे ईश्वर ने क़नाअत प्रदान किया है वह सबसे अच्छा जीवन व्यतीत करने वाला है।
शनिवार, 23 जनवरी 2016 13:59

हज़रत अली अलैहिस्सलाम

पिछड़ेपन का एक कारण सक्षम लोगों की कंजूसी है।
बुधवार, 20 जनवरी 2016 10:24

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम

ईश्वर के सबसे अच्छे बंदे वे हैं कि जो जब भलाई करते हैं तो ख़ुश होते हैं और जब ग़लती करते हैं तो क्षमा चाहते हैं और जब उन्हें कोई …
मंगलवार, 19 जनवरी 2016 13:40

इमाम हसन अस्करी(अ)

चेहरे का सुन्दर होना विदित सुन्दरता है और बुद्धि व अच्छी सोच आंतरिक सुन्दरता है” 
रविवार, 17 जनवरी 2016 12:29

हज़रत अली अलैहिस्सलाम

जो अपनी ज़रूरत पर संतोष करे वह आराम से रहेगा।
शनिवार, 16 जनवरी 2016 12:24

पैग़म्बरे इस्लाम (स)

जो व्यक्ति कंजूसी करे और स्वतंत्रता व अधिकार के साथ अपने माल से अच्छे लोगों को न दें तो ईश्वर उसके माल को बुरे लोगों के अधिकार में दे देगा।
धर्म की समझ पैदा करो क्योंकि धर्म की पहचान, आत्मज्ञान व ईश्वरीय उपासना की कुंजी है।
मंगलवार, 12 जनवरी 2016 11:50

इमाम जाफ़र सादिक़(अ)

ग़लत अनुमान लगाना उसी चीज़ के आधार पर है जो अपने मन में सोचते हो, अगर आसान समझोगे तो आसान है और अगर कठिन समझोगे तो कठिन है और अगर …
सोमवार, 11 जनवरी 2016 12:42

पैग़म्बरे इस्लाम (स)

ईश्वर अपनी नेअमत के प्रभाव को अपने बंदे में देखना चाहता है।
रविवार, 10 जनवरी 2016 12:37

पैग़म्बरे इस्लाम (स)

ईश्वर अपनी नेअमत के प्रभाव को अपने बंदे में देखना चाहता है।
वह हममें से नहीं है जो अपनी दुनिया को परलोक के कारण या अपने परलोक को दुनिया के कारण छोड़ दे।
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