सोमवार, 23 जुलाई 2012 18:25

ओलंपिक और मीडिया

ओलंपिक और मीडिया

वर्तमान संसार में संचार माध्यम और संपर्क के सामूहिक संसाधन, समाजों में सक्रिय व प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। रेडियो, टेलीवीजन, फ़िल्म, समाचार पत्र, पत्रिका, पुस्तक और इन्टरनेट जैसे संपर्क के संसाधन की संचार माध्यमों में गणना की जाती है कि जिनके विकास के दुष्परिणामों में से एक संबोधकों की बुद्धि में फेरबदल करना और उनके वैचारिक आदर्शों को परिवर्तित करना है। शोध इस बात के सूचक हैं कि संचार माध्यमों के स्थाई आक्रमण, लोगों की जीवन शैली को परिवर्तित करने के लिए वस्तुओं की ख़रीदारी के लिए विज्ञापनों की परिधि में ही केवल नहीं होते बल्कि संचार माध्यम बड़े की सूक्ष्य और बड़े ही ग़ैर आभासीय तरीक़े से समान व्यवहार और एक दृष्टिकोण की बात को संबोधकों के सामने रखते हैं और उनके व्यवहार के पूर्ण परिवर्तन का कारण बनते हैं।

हालिया कुछ वर्षों में ग्लोबल नेटवर्क या वर्ल्ड वाइड नेटवर्क जैसे शब्दों का प्रयोग संचार माध्यमों और संपर्क की दुनिया में धड़ल्ले से हो रहा है और विशेषज्ञों ने इस के बारे में थ्योरी और दृष्टिकोण पेश किए हैं। यदि संक्षेप में या पूर्ण रूप से इन दृष्टिकोणों को प्रमाणित करना चाहें तो हमें कहना चाहिए कि बहुत से देशों में सोच विचार के ढांचे को राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर बनाया जाता है और उस पर सुन्दर व मनमोहक मुखौटा लगाकर संचार माध्यमों द्वारा दूसरे देशों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। वास्तव में पश्चिमी जगत में संचार माध्यमों की वर्चस्व की शैली से स्थिति को ऐसा ढाल दिया जाता है कि लोगों के सोच विचार और उनका जीवन उसी रंग रूप में ढल जाता है जैसा कि संचार माध्यमों के स्वामी चाहते हैं।

संचार माध्यमों के इस क़बाईली ढांचे को स्वरूप प्रदान करने का महत्त्वपूर्ण साधन साइबर स्पेस है कि पश्चिम में जिसका महत्त्व दिन प्रतिदिन बढ़ता और गहराता जा रहा है किन्तु यही साइबर स्पेस सबसे बड़ा साम्राज्यवादी है। उदाहरण स्वरूप विकासशील देशों के लिए साइबर स्पेस के प्रयोग के लिए बहुत सी बाधाएं मौजूद हैं। इन बाधाओं में से महत्त्वपूर्ण वित्तीय क्षमता और इलेक्ट्रानिक ढांचे का न होना है और पूर्ण रूप से इस स्थिति में उत्तरी गोलार्ध के धनी देश, इलेक्ट्रानिक विकास के ढांचों और संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए ऋणदाता के रूप में रूचि व्यक्त करते हैं। इस प्रकार से पर्दे के पीछे बैठे स्वामी, साइबर शासकों की सहायता से विकासशील देशों को अपने उपनिवेशों में परिवर्तित करने और लोगों के मन मस्तिष्क व विचारों को प्रभावित करने और अपने दृष्टिकोण थोपने की शक्ति पा लेते हैं।

वर्ष 1996 में अमरीकी विचारक सैमुएल हैंटीग्टेन ने एक दृष्टिकोण पेश किया जिसमें सैन्य व राजनैतिक वर्चस्व और आर्थिक साम्राज्यवाद की विचारधारा प्रस्तुत की किन्तु आज का ग्लोबल कैपिटलिज्म, साम्राज्यवाद की इन शैलियों से लाभ उठाने के अतिरिक्त साइबर स्पेस और सोशल नेटवर्क द्वारा भी दूसरे देशों के लोगों को अपना निशाना बनाता है। वर्तमान समय में अब नवीन संचार माध्यमों का प्रयोग इस बारे में भी होने लगा कि विश्व की सांस्कृतिक, सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक घटनाओं के बारे में अन्य देशों की जनता के दृष्टिकोणों को कैसे प्रभावित किया जाए।

संचार माध्यमों के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का मानना है कि 21वीं शताब्दी में संचार माध्यमों की चुनौतियों में से एक लोगों के मन मस्तिष्क पर संचार उपकरणों का वर्चस्व और उससे उत्पन्न ख़तरे हैं। ईरानी प्रोफ़ेसर डाक्टर मुहम्मद रहीम अएवज़ी का कहना है कि 21वीं शताब्दी की महत्त्वपूर्ण चुनौतियों में युद्ध के आधुनिक उपकरणों और मीडिया को मिलाकर लड़ा जाने वाला नवीन युद्ध है। ये युद्ध आरंभ में मनोवैज्ञानिक अभियान से आरंभ होते हैं और सैन्य झड़प के समय और उसके बाद बहुत ही चतुराई से व्यापक रूप से जारी रहते हैं। प्रभावित करने वाली तकनीकों के साथ आधुनिक संचार माध्यमों के प्रकट होने के कारण संकटों को उत्पन्न करने, कम करने और उन्हें व्यापक करने में संचार माध्यमों की भूमिका बढ़ गयी हैं। इस प्रकार से कि प्रभावित करने वाली यह शैली अतीत की प्रवृत्ति से बहुत ही भिन्न रूप में सामने आई है। इस प्रकार से यह दावा किया जा सकता है कि कुछ संचार माध्यम, संकटों को कम करने और विश्व की शांति व सुरक्षा की रक्षा करने के बजाए युद्ध की आग भड़काने और संकटों को उत्पन्न करने की चेष्टा में हैं।

संचार माध्यमों के इस विषैले वातावरण के पाये जाने और इसके दुष्परिणामों के कारण इस क्षेत्र के कर्ताधर्ता, साम्राज्यवाद द्वारा संपर्क के सामूहिक उपकरणों का दुरुपयोग करने से मुक़ाबला करने की दिशा में पेशावराना संदेह उत्पन्न करने की सोच रहे हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में शोधकर्ता वर्तमान वातावरण में संचार माध्यमों की स्वाधीनता और उनके सुरक्षित रहने के उपायों की समीक्षा कर रहे हैं और अपने शोध के परिणाम को संपर्क के सामूहिक उपकरणों के हवाले करेंगे। अतीत में इस संबंध में बहुत सी पुस्तकें और आलेख छपे और क्षेत्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर विभिन्न कांफ़्रेंसों का आयोजन हुआ कि इस कार्यवाही का एक उदाहरण ओलंपिक मीडिया के रूप में निकला जो विश्व में संचारिक सूचना के क्षेत्र के ज़िम्मेदारों और अधिकारयों के समक्ष पेश किया गया।

ओलंपिक मीडिया के नाम से प्रसिद्ध World Media Summit का दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “वैश्विक संचार माध्यम और 21वीं शताब्दी की चुनौतियां” के नारे के साथ रूस की राजधानी मास्को में चार जुलाई से 7 जुलाई तक चला जिसकी मेज़बानी समाचार एजेन्सी इतरतास ने की। बीजिंग में वर्ष 2008 में इस वैश्विक सम्मेलन की पहल उस समय की गयी जब विश्व के 12 बड़े संचार माध्यमों के कार्यकारी प्रबंधक इस नगर में मौजूद थे। शेनहुआ, एसोशिएटेड प्रेस, राइटर्ज़, इतरतास, क्यूडू और कुछ अन्य समाचार एजेन्सियों जैसे संचार माध्यमों के प्रमुख ने सचिवालय का गठन किया और इस सम्मेलन के आयोजन, इसके विषय और संदेश के बारे में विचार विमर्श किया।

इस प्रकार से चीन की राष्ट्रीय समाचार एजेन्सी शेन्हुआ के सुझाव और मेज़बानी से ओलंपिक मीडिया के नाम से विश्व संचार माध्यमों का सम्मेलन पहली बार अक्तूबर वर्ष 2009 में बीजिंग में आयोजित हुआ जिसमें विश्व के 170 संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों और ईरान की समाचार एजेन्सी मेहर और इर्ना के प्रबंध निदेशकों से बने एक प्रतिनिधि मंडल ने भाग लिया। उसके बाद दिसम्बर वर्ष 2011 में बीजिंग में प्रधान परिषद ने एक बैठक के दौरान सर्वसम्मति से वर्ष 2012 में मास्को में सम्मेलन के आयोजन पर सहमति व्यक्त की।

मास्को में मीडिया ओलंपिक का सम्मेलन, बीजिंग में वर्ष 2009 के सम्मेलन की भांति, संसार की महत्त्वपूर्ण समाचारिक संस्थाओं से जुड़ी मीडिया की प्रमुख हस्तियों और संचार माध्यमों की व्यापक उपस्थिति सहित विभिन्न तथ्यों के साथ बहुत ही महत्त्वपूर्ण था और समस्त आधुनिक व पारंपरिक संचार माध्यमों का महा सम्मेलन समझा जाता है जिसमें समाचार एजेन्सियां, समाचार पत्र, सेटेलाइट संपर्क नेटवर्क और डीजिटल संचार माध्यम सम्मलित थे।

वैश्विक मीडिया प्रमुखों ने मीडिया ओलंपिक के दूसरे सम्मेलन को विश्व समुदाय की प्रगति और विकास के मार्ग में प्रभावी क़दम बताया और आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन भविष्य में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में मीडिया वार को कम करने के लिए उचित भूमिका प्रशस्त करने वाला होगा। विश्व के मीडिया प्रमुखों ने इसी प्रकार एक दूसरे को समझने के लिए सरकारों और राष्ट्रों के मध्य अधिक से अधिक परस्पर वार्ता और सहयोग पर भी बल दिया और सही व विश्वसनीय समाचारों के निष्पक्ष व न्यायप्रिय कवरेज के लिए सामूहिक प्रयास की मांग की। रूस के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मास्को के महापौर, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव और यूनीसेफ़ के प्रबंधक भी सम्मेलन में उपस्थित हुए और उन्होंने मेहमानों से भेंटवार्ता की।

विश्व मीडिया की इस बैठक में घटने वाली रोचक घटनाओं में से एक बीबीसी के क्रियाक्लापों के बारे में इस नेटवर्क के प्रबंधक के बयान की विश्व मीडिया प्रमुखों द्वारा आलोचना थी। निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्त्व पर आधारित बीबीसी नेटवर्क के प्रबंधक के बयान के बाद इस बैठक में भाग लेने वालों ने बीबीसी समाचार चैनलों द्वारा कुछ देशों में समाचारों को सेन्सर करने की आलोचना की और घोषणा की कि मध्यपूर्व के परिवर्तनों, लंदन की सड़कों पर जनता के प्रदर्शनों के समाचार को सेन्सर करने और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के संबंध में बीबीसी के नकारात्मक क्रियाकलापों के दृष्टिगत, यह समाचार एजेन्सी स्वतंत्र संचार माध्यमों के बारे में फ़ैसला करने की योग्यता नहीं रखती।

एक अन्य रोचक बात ईरान की समाचार एजेन्सी इर्ना और रूस की समाचार एजेन्सी इतारतास के मध्य भविष्य में सहयोग को विस्तृत करने की दिशा में सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर था। वैश्विक स्तर पर समाचार चैनलों के सामने आने वाले महत्त्वपूर्ण मामले, वैश्विक राजनैतिक परिवर्तनों में समाचार चैनलों की भूमिका और आर्थिक संकट की स्थिति में उनके क्रियाकलाप, उन महत्त्वपूर्ण विषयों में से थे जिन की सम्मेलन में भाग लेने वालों ने समीक्षा की। इसी प्रकार क्रांतियों और युद्धों के दौरान संचार माध्यमों की भूमिका, पश्चिम के सूचना एकाधिकार के बजाए विविधपूर्ण माडलों की आवश्यकता और इसी प्रकार सामाजिक चैनलों में सामाजिक एकजुटता, इस सम्मेलन में चर्चा होने वाले मुख्य विषयों में से था।

इस सम्मेलन के समापन पर वर्ष 2014 में मीडिया ओलंपिक के तीसरे सम्मेलन की मेज़बानी बहरैन की राष्ट्रीय एजेन्सी को सौंप दी गयी।

प्रत्येक दशा में विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिया ओलंपिक सम्मेलन एक ही शर्त पर सफल हो सकता है जब स्वतंत्र और ग़ैर पश्चिमी संचार माध्यम, पश्चिमी संचार माध्यमों के एकाधिकार कम करने और सही सूचना के प्रसारण के लिए संपर्क के सामूहिक संसाधनों की वास्तविक स्वतंत्रता की दिशा में इस अवसर से भरपूर लाभ उठाएं।        

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