समाचार
बृहस्पतिवार, 28 जून 2012 20:36

नशा, पैरों की ज़न्जीर

नशा, पैरों की ज़न्जीर
प्रतिवर्ष 26 जून को, अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ रोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है, अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ रोधी दिवस के अवसर पर मादक पदार्थ एवं अपराध से मुक़ाबले के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्यालय यूएनओडीसी एक नारा देता है। इस अवसर पर मादक पदार्थों से मुक़ाबले के लिए विभिन्न देशों द्वारा उठाये गये क़दमों तथा इस मार्ग में उत्पन्न चुनौतियों और उनके निवारण का उल्लेख किया जाता है। 26 जून, मादक पदार्थों से मुक़ाबले का प्रतीक बन गया है, इस अवसर पर मादक पदार्थों के उत्पादन, तस्करी एवं सेवन के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाता है, इस विध्वंसकारी सामाजिक समस्या के उन्मूलन हेतु सरकारों के दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निरोधक दिवस के अवसर पर प्रस्तुत है विशेष चर्चा।पिछले पच्चीस वर्षों से प्रतिवर्ष नशे और मादक पदार्थों से मुक़ाबले के विषय पर यूएनओडीसी के कार्यालय सहित विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है ताकि घरों को उजाड़ने वाले एवं विनाशकारी नशीले पदार्थों से मुक़ाबला करने हेतु राष्ट्रों के राजनीतिक संकल्प को दर्शाया जा सके। इस संदर्भ में शिक्षा द्वारा नशे से दूर रहने, नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों की समाज में वापसी में संचार माध्यमों की भूमिका, पोस्त की अवैध पैदावार का उन्मूलन, मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त प्रमुख नेटवर्कों का विघटन, नशे एवं मादक पदार्थों का मुक़ाबला करने हेतु देशों के बीच परस्पर सहयोग जैसे कार्यक्रमों का मादक पदार्थों की तस्करी एवं नशे की लत से ग्रस्त देशों में जागरुकता के उद्देश्य से आयोजन किया जाता है। परन्तु दुर्भाग्यवश विभिन्न समाजों में कुछ लोगो की इस बुराई एवं लत में रूची के हम साक्षी हैं। मादक पदार्थों के घातक दुष्परिणाम समाज में अनेक विनाशकारी बुराईयों को जन्म देते हैं, परिणामस्वरूप अपराधों में वृद्धि हो जाती है तथा नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का पतन हो जाता है।संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित आंकड़ों से पता चलता है कि अभी भी विश्व में 20 करोड़ लोग मादक पदार्थों जैसे अफीम, हेरोइन, मारिजुआना अथवा गांजा, कोकीन और दूसरे अनेक प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। गंभीर चिंता का विषय यह है कि मादक पदार्थों का सेवन करने वालों में युवाओं के अनुपात में निरंतर वृद्धि हो रही है तथा पारम्परिक नशीले पदार्थों के स्थान पर सिंथेटिक मादक पदार्थों के सेवन में युवाओं की रूची बढ़ती जा रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि विभिन्न देशों में इस प्रकार के पदार्थों के सेवन में वृद्धि हुई है, वास्तव में मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त माफ़िया की रूची नये समावेश से मादकों के उत्पादन में बढ़ गयी है। प्रतिदिन रासायनिक वाष्पशील पदार्थों के मिश्रण से नये नये फ़ार्मूलों का प्रयोग कर साइकोट्रापिक के रूप में नक़ली नामों से मादक पदार्थ बाज़ार में आ रहे हैं। इनमें से कुछ साइकोट्रापिक तो परम्परागत मादक पदार्थों से कहीं अधिक घातक एवं ख़तरनाक होते हैं। यही कारण है कि उनका उपचार भी उतना ही कठिन होता है। मादक पदार्थों के सौदागर प्रारम्भ में यह कह कर इन पदार्थो का वितरण करते हैं कि इनके सेवन से कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती है और नशे की लत भी नहीं पड़ती है, इस प्रकार वे लोगों को उनके सेवन के लिए आकर्षित करते हैं। प्रस्तुत किये गये आंकड़ों से पता चलता है कि मादक पदार्थों के सेवन के कारण प्रतिवर्ष विश्व में 2 लाख 50,000 लोगों की मौत हो जाती है। घरों को उजाड़ देने वाली इस समस्या ने गंभीर आर्थिक नुक़सान पहुंचाने के अतिरिक्त सामाज के मानसिक स्वास्थय को भी ख़तरे में डाल दिया है। स्पष्ट है कि मादक पदार्थों का सेवन करने वालों की संख्या में वृद्धि से माफ़िया एवं तस्करों को ही अधिक से अधिक लाभ होता है। अतः जब तक इस काले धंधे से अत्यधिक लाभ होता रहेगा तब तक इसमें लिप्त असामाजिक तत्वों का यही प्रयास रहेगा कि नशे की लत को जंजीर बनाकर अधिक से अधिक लोगों को इसमें जकड़ा जाये। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर मादक द्रव्यों के धंधे से होने वाला लाभ 500 से 700 अरब डालर के बीच है। इस काले धन का बड़ा भाग शेयर बाज़ार में निवेश कर दिया जाता है उसके बाद सफैद धन के रूप में मादक पदार्थ तस्कर उसका प्रयोग करते हैं। समाज शास्त्रियों के अनुसार इस अवैध धंधे से अंतरराष्ट्रीय माफिया को पहुंचने वाले लाभ के अतिरिक्त, विश्व की वर्चस्ववादी शक्तियां ग़रीब देशों पर अपनी धाक एवं वर्चस्व जमाने हेतु इसे हथियार के रूप में प्रयोग करती हैं। अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति इस दावे की पुष्टि के लिए काफ़ी है।वर्षों से गृहयुद्ध, विदेशी सेनाओं की उपस्थिति, आर्थिक समस्याओं और मौत के व्यापारियों की गतिविधियों की मार झेल रहे अफ़ग़ानिस्तान को दुर्भाग्यवश विश्व में मादक पदार्थों के उत्पादन के केंद्र में परिवर्तित कर दिया गया है। विश्वसनीय आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले दस वर्षों में जब से अमरीकी सेना ने इस देश में अतिक्रमण किया है मादक पदार्थों की खेती में 40 प्रतिशत वृद्धि हो गयी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में आपूर्ति की जाने वाली कुल अफ़ीम की 90 प्रतिशत मात्रा से भी अधिक अफ़ग़ानिस्तान में उत्पाद होती है। अफ़ीम के अतिरिक्त लगभग 700 टन हेरोइन अफ़ग़ानिस्तान में उत्पाद होती है। अफ़गानिस्तान हशीश उत्पादन करने में भी विश्व में प्रमुख है। ध्यान योग्य है कि अफ़ग़ानिस्तान में उत्पादन का यह अनुपात ऐसी स्थिति में है कि जब इस देश में हज़ारों विदेशी एवं नेटो के सैनिक तैनात हैं और इन सैनिकों का एक मुख्य दायित्व अफ़ग़ानिस्तान में मादक पदार्थों की पैदावार का उन्मूलन है। प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार क्षेत्र में मादक पदार्थों के तस्कर और माफिया अफ़ग़ानिस्तान से यूरोप तक एवं विश्व बाज़ार में संगठित रूप से सक्रिय हैं। वैज्ञानिक लेख शक्ति, युद्ध और अर्थव्यवस्था की लेखक सुश्री जेनिट कोर्साव सहित अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान में उत्पादन अफीम से होने वाली आय 200 अरब डालर से भी अधिक है। विश्व बैंक के आंकड़ो के अनुसार यह राशि ईरान और चीन के अतिरिक्त अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी देशों की वार्षिक आय से अधिक है।अफ़ग़ानिस्तान से ईरान की 945 कि. मी. की सीमा लगती है जिसमें 709 कि. मी. थल और 236 कि. मी. जल सीमा है। इस प्रकार वह अफ़ागानिस्तान का सबसे बड़ा एवं निकटतम पड़ोसी है। इसी संयुक्त बड़ी सीमा के कारण मादक पदार्थों की तस्करी हेतु उसे सबसे अधिक कठिनाई का सामना है।ईरान कि जो मादक पदार्थों की तस्करी के मार्ग में स्थित है पिछले 30 वर्षों से किसी थकावट के बग़ैर कमर कसे हुए है। इस्लामी गणतंत्र ईरान कि जो न केवल मादक पदार्थों को देश में आने से रोकता है बल्कि यूरोप तक उसकी तस्करी के मार्ग में मुख्य रुकावट बना हुआ है इस लक्ष्य की प्राप्ति में उसने हज़ारों सुरक्षा बलों का बलिदान दिया है। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने यह सिद्ध कर दिया है कि मादक पदार्थों के विरुद्ध लड़ाई में वह विश्व में अग्रणी तथा गंभीर है। मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लड़ाई के कारण अनेक बार संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों विशेषकर महासचिव की ओर से ईरान की सराहना की गयी है। संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थ एवं अपराध निरोधक कार्यालय के कार्यकारी निदेशक यूरी फ़िदोतोफ़ ने कुछ समय पूर्व वियना में आयोजित सम्मेलन में कहा था कि मादक पदार्थों से मुक़ाबला करने में तेहरान सुंयुक्त राष्ट्र का प्रथम सहयोगी है।यूरी फ़िदोतोफ़ ने यह कहते हुए कि मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए ईरान ने व्यापक क़दम उठाये हैं उल्लेख किया कि विश्व में मादक पदार्थों को ज़ब्त करने में ईरान का प्रथम स्थान है।अंत में मादक पदार्थों से मुक़ाबले के दिवस के अवसर पर ईरान में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के बारे में आपको विवरण दे रहे हैं। मादक पदार्थ और उससे होने वाली हानि एवं नशे की लत से दूर रहने के संबंध में समाज में जागरुकता लाने हेतु सम्मेलनों और भाषणों का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर ईरान की ओर से मादक पदार्थों से मुक़ाबला करने के लिए उठाये गये क़दमों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है और इस क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तियों की सराहना की जाती है तथा उनको सम्मानित किया जाता है।मादक पदार्थों से मुक़ाबले के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर आयोजित किये जाने वाले दूसरे कार्यक्रमों में से एक दस दिन तक चलने वाली प्रदर्शनी का आयोजन है, मादक पदार्थों से मुक़ाबला करने में सहयोगी समस्त विभाग एवं संगठन जैसे कि स्वास्थय, चिकित्सा एवं मेडिकल साईंस मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, योजना एवं कल्याणकारी विभाग. सुरक्षा बल तथा ग़ैर सरकारी संगठन इसमें भाग लेते हैं और इस क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित करते हैं।उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष मादक पदार्थों से मुक़ाबले के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर इस लड़ाई में ईरान की उपलब्धियों के अतिरिक्त बड़ी मात्रा में ज़ब्त किये गये मादक पदार्थों को सीधे एवं गंभीर लड़ाई के रूप में जलाया जाता है ताकि संभवतः आगे चलकर यह विश्व में मादक पदार्थों के पूर्णतः नष्ट का प्रतीक बन जाये। निःसंदेह, मादक पदार्थों एवं नशे की लत से लड़ाई में वैश्विक स्तर पर दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है। यदि सब देश समनव्य और एकता से इस लड़ाई के लिए उठ खड़े हों तो सफलता आवश्य प्राप्त होगी।{jcomments on}

Add comment


Security code
Refresh