२४ सितम्बर १८०५ ईसवी को फ़्रांस के तानशाह नेपोलियन बोनापार्ट की सैनिक कार्रवाई समाप्त हुई। यह कार्रवाई ऑस्ट्रिया के आक्रमण का सामना करने के लिए की गयी थी। फ़्रांस के २ लाख सैनिकों ने ऑस्ट्रिया की सेना को भारी पराजय का सामना करवाया ऑस्ट्रिया हालॉकि स्वयं को फ्रांस का नित्र बताता था किंतु रुस और ब्रिटेन से गुप्त वार्ताएं करके नेपोलियन को हराने का इरादा रखता था।***२४ सितम्बर सन १९३९ ईसवी को जर्मनी के बम्बार विमानों ने हॉलैंड की राजधानी वरसा पर आक्रमण आरंभ किया। द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभ में होने वाली यह बम्बारी तीन दिनों तक जारी रही। इस बम्बारी के बाद वारसा की जनता ने ११ दिनों तक कठोर संघर्ष किया किंतु अंतत: उसे जर्मनी की सेना के सामने हथियार डालना पड़ा। हिटलर ने नाज़ी सेना के कमांडरों को आदेश दिया था कि जिस प्रकार से भी संभव हो इस शहर पर क़ब्ज़ा करें। वरसा नगर पट बम्बारी में कम से कम १५ हज़ार लोग मारे गये थे।
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२४ सितम्बर सन १९७४ ईसवी को अफ्रीकी देश गीनी बीसाओ ने पुर्तग़ाल से अपनी स्वाधीनता की घोषणा की वर्ष १४४६ ईसवी में पुर्तग़ाल के युवराज प्रिंस हेनरी और उनके साथियों ने इस देश की खोज की जिसके बाद यह देश पुर्तग़ाल का उपनिवेश बन गया। १७वीं और १८वीं शताब्दी में पुर्तग़ाल का भाग हो चुका यह देश योरोप वालों के दास व्यापार के केंद्रों में था। १९६० के दशक के आरंभ से इस देश की जनता ने पुर्तग़ाल के विरुद्ध अपना संघर्ष तेज़ कर दिया। यहॉ तक कि सन १९७० ईसवी में इस देश का दो तिहाई भाग स्वतंत्रता प्रेमियों के अधिकार में आ गया। पुर्तग़ाल ने अंतत: वर्ष १९७४ ईसवी में इस देश को स्वाधीन कर दिया। यह देश उत्तर पश्चिमी अफ़्रीक़ा महाद्वीप में अटलॉटिक महासागर के तट पर स्थित है।***
३ मेहर सन १३२१ हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार मोहम्मद यूसुफ़ ज़ादे का हमदान में निधन हुआ। वे ग़म्मामे हमदानी के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्हें तर्क शास्त्र दर्शनशास्त्र और साहित्य विशेष कर फार्सी शायरी में दक्षता प्राप्त थी। इसी के साथ वे ईरान की संविधान क्रान्ति के साहसी संघर्षकर्ता थे। किंतु जब इस क्रान्ति में अत्याचारियों ने भी वास्तविक नेताओं के कॉधे से कॉधा मिला लिया तो गम्मामे हमदानी ने राजनीति से सन्यास ले लिया और सामाजिक तथा साहित्यिक गतिविधियों में संलग्न हो गये।
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