मंगलवार, 30 अगस्त 2011 17:12

ईद की विभूतियां और इसके लाभ

ईद की विभूतियां और इसके लाभ
ईद वास्तव में ईश्वर पर आस्था रखने वालों के जीवन में निर्णायक परिवर्तनों की सूचक है। क्योंकि ईद धर्म की महानता तथा मन की इच्छाओं के विरुद्ध संघर्ष में विजय का दिन है। इस शुभ दिन में ईश्वर पर आस्था रखने वाले ईश्वर का गुणगान करते हैं हम भी इस शुभ अवसर पर आप सब की सेवा में बधाई प्रस्तुत करते हैं।

 

इस्लाम में उपासना कुछ इस प्रकार से है कि उसमें व्यक्तिगत आयामों के साथ ही साथ सामाजिक आयामों पर भी ध्यान दिया गया है। इसी लिए ईद में व्यक्तिगत उपासना तथा आध्यात्म के पहलुओं के साथ ही साथ राजनीतिक व सामाजिक आयाम भी नज़र आते हैं। ईद के दिन लोगों का ईदगाह या मस्जिदों में एकत्रित होना मुसलमानों के मध्य एकता व समरसता में प्रभावी हो सकता है। वे ईद के दिन एक साथ एकत्रित होकर एक दूसरे की समस्याओं और इसी प्रकार विचारों से अवगत हो सकते हैं। इस सामारोह में द्वेष व शत्रुता, मित्रता व सदभावना में बदल जाती है और धर्म पर आस्था रखने वाले एक पंक्ति में खड़े होकर एक दूसरे से एकता व निकटता का अधिक आभास करते हैं। ईद, एक ओर मनुष्य और ईश्वर के मध्य आध्यात्मिक संबंध की भी सूचक है तो दूसरी ओर मनुष्य के अपने भाइयों के साथ संबंधों को भी दर्शाती है। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम के पौत्र इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम ईद के दिन को सामारोह, उत्सव तथा एक दूसरे की सहायता का दिन मानते हैं और अपनी एक प्रार्थना में जो उनकी प्रार्थनाओं के संकलन सहीफए सज्जादिया की ४५वीं प्रार्थना है, इस प्रकार कहते हैः हे ईश्वर! हम तेरी ओर लौटते हंप अपनी उस ईद के दिन जिसे तूने ईमान व आस्था रखने वालों के लिए ईद व उत्सव और अपने धर्म के अनुयाइयों के लिए एकत्रित होने और एक दूसरे की सहायता करने का दिन बनाया है।

 

पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम भी ईद के दिन के आयोजनों को सामाजिक आयामों के बारे में कहते हैः ईद का दिन इस लिए है ताकि मुसलमान इस दिन एकत्रित हों और ईश्वर के प्रति, उसकी असीम कृपाओं के लिए आभार प्रकट करें। इस प्रकार से यह दिन, ईद का दिन, एकत्रित होने का दिन और फ़ित्र अर्थात खोलने का तथा ज़कात व दक्षिणा का दिन है। ईश्वर को यह बहुत पसन्द है कि इस दिन मुसलमान एकत्रित हों और उस समारोह में इस दिन का सम्मान करें।

इस वर्ष की ईद, इस्लामी जगत में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के साथ है। वर्तमान युग में इस्लामी चेतना में विस्तार, एक एसी वास्तविकता है जो मुसलमानों को उज्जवल भविष्य की शुभसूचना देती है। आज कुछ इस्लामी देशों में मुसलमान, भिन्न प्रकार के वातावरण में रमज़ान गुज़ार कर ईद मना रहे हैं। मिस्र, ट्यूनेशिया और लीबिया के लोग, स्वतंत्रत वातावरण में और इस्लाम विरोधी व पश्चिमवादी तानशाहों से मुक्त होकर हर वर्ष से अधिक उत्साह व उल्लास के साथ ईद मना रहे हैं । दूसरी ओर, बहरैन और यमन के लोग, अपने शहीदों को श्रंदाजलि अर्पित करके उस उज्जवल भविष्य के बारे में सोच रहे हैं जिसमें वह भी अत्याचारी शासकों के बिना ईद मना पाएगें और इस महान उद्देश्य तक पहुंचने के लिए वे अपने संकल्प को अधिक मज़बूत कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण दिन में जो मुसलमानों को, एकत्रित होने का स्वर्णिम अवसर प्रदान करता है, शोषितों व पीड़ितों की सहायता करके इस्लाम की महानता को उजागर कर सकते हैं। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने भी ईद के सामाजिक आयाम पर बल देते हुए कहते हैं कि ईद, एकता व समरसता का दिन है। सभी शक्तियों व योग्यताओं को एक दूसरे से जोड़ने और उन्हें जीवन के मंच पर लाने का दिन है। ईद इस्लाम व पैग़म्बरे इस्लाम की महानता, इस्लाम की प्रतिष्ठा तथा वंचितों की पुंजी है।

ईद के दिन मुसलमान, संकल्प से भरे पवित्र मन के साथ ईश्वर के सामने शीश नवाते हैं और इसी के साथ हर प्रकार के वर्चस्ववाद व साम्राज्यवाद को भी नकारते हैं। ईद के दिन अल्लाहो अकबर अर्थात ईश्वर सब से बड़ा है के नारे मुसलमानों में साम्राज्य विरोधी भावना के सूचक हैं। ऐसी परिस्थितियों में जब विश्व की वर्चस्ववादी शक्तियां इस्लाम की छवि को बिगाड़ने में व्यस्त हैं ईद सहित धार्मिक उत्सव, मुसलमानों के सामाजिक जीवन में नये प्राण फूंक सकते हैं।

 

ईद के दिन एक महत्वपूर्ण काम ज़कात या दान देना है जो अनिवार्य है। हर मुसलमान के लिए अनिवार्य है कि वह अपना सामान्य आहार जैसे चावल या गेहूं या फिर उसकी विशेष मात्रा के हिसाब से पैसे ईद की सुबह निर्धनों को दे। वास्तव में फ़ितरा कहा जाने वाला यह दान, रोज़ा रखने वाले की ओर से ईश्वर के प्रति आभार तथा उपहार होता है और इससे धनवानों और निर्धनों के मध्य संबंध मज़बूत होते हैं। ईद के दिन हरेक अपनी शक्ति भर निर्धनों के दुख दर्द बांटता है। इस से अधिक पीड़ा की बात और क्या हो सकती है कि विश्व के किसी भाग में कुछ मनुष्य भूख से तड़प रहे हों और हज़ारों लोग विशेषकर बच्चे और महिलाएं, भूख और कुपोषण के कारण मृत्यु के कगार पर हों। आजकल सोमालिया के लोगों की यही दशा है। सोमालिया में भुखमरी में ग्रस्त बच्चों और महिलाओं की कराह दिलों को दुख से भर देती है। उनका जो भी धर्म हो वह सब इस सूखाग्रस्त क्षेत्र में ईश्वर की कृपा और विश्ववासियों की सहायता की आशा लगाए हैं। फ़ितरा दान इन लोगों की सहायता का एक उचित व प्रभावी साधन हो सकता है।

ईद के दिन दिये जाने वाले इस विशेष प्रकार के दान के प्रयोग के स्थानों को भी स्पष्ट किया गया है। इस धन को, सहयोग की भावना जागृति करने, इस्लामी समाज में स्वास्थ्य व उपचार व संस्कृति की दशा सुधारने जैसे कामों में प्रयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार फ़ितरा नामक दान को उन लोगों का क़र्ज चुकाने में भी प्रयोग किया जा सकता है जो अपना क़र्ज़ा चुकाने में अक्षम हो और जिन्होंने पाप करने के लिए क़र्ज़ न लिया हो। इसी प्रकार इस रक़म को, मस्जिद , स्कूल, पुल, रेलवे, अस्पताल निर्माण तथा इसी प्रकार के अन्य सामाजिक व सार्वाजिनक कामों में प्रयोग किया जा सकता है। मुसलमान, ईद के दिन फ़ितरा देकर, वास्तव में रमज़ान के महीनों की उन दुआओं और प्रार्थनाओं के एक भाग को व्यवहारिक बनाते हैं जिन्हें वे एक महीने तक हर नमाज़ के बाद निर्धनों की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए पढ़ते थे। ईश्वर से निकटता के उद्देश्य और उपासना की भावना से दिया जाने वाला फितरा दान, आध्यात्म तक पहुंचने के लिए भौतिकता को साधन बनाने जैसा है। फ़ितरा दान, भौतिकता और सांसारिक माया मोह तथा इच्छाओं से छुटकारा पाने का अभ्यास है और ईश्वर पर ईमान रखने वाले मनुष्य को, हर उस वस्तु से दूर और मुक्त होना चाहिए जिस पर भौतिकता व संसार का रंग चढ़ा हो। क़ुरआने मजीद के सूरए आला की आयत नंबर चौदह और पंद्रह में कहा गया है कि निश्चित रूप से वह सफल हुआ जिसने स्वंय को पवित्र किया और अपने पालनहार को याद रखा तथा नमाज़ पढ़ी। इस आयत का एक आशय फ़ितरा दान देना है। इतिहास में आया है कि ईद के दिन पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम सदैव ही ईद की नमाज़ पढ़ने के लिए जाने से पहले फितरा दान बांटते थे और सूरए आला की इन दो आयतों को पढ़ते थे।

 

अंत में हम एक बार फिर ईद की बधाई देते हुए इमाम जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की एक प्रार्थना के कुछ अंश पढ़ रहे हैं। वे कहते हैं हे पालनहार, मुहम्मद और उनकी संतान पर सलाम भेज और ईद फ़ित्र के दिन को हमारे लिए शुभ ईद बना और उसे हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ दिन बना जो हमारे लिए आया है। हे ईश्वर! इस दिन कि जो पापों के विनाश के लिए सब से अच्छा दिन है, हमारे सारे ढके छुपे और खुले पापों को क्षमा कर दे।

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