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रविवार, 08 फ़रवरी 2015 13:15

क्रांति के बाद ईरान की प्रगति और विकास

क्रांति के बाद ईरान की प्रगति और विकास

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफ़लता ने ईरानी राष्ट्र के लिए विकास एवं प्रगति के नए द्वार खोले। ऐसी सफ़लता जिसने ईरान के वैज्ञानिक एवं आर्थिक विकास में बहुमूल्य योगदान दिया।

 

 

ईरान की इस्लामी क्रांति को 36 वर्ष बीत रहे हैं। इस अवधि में ईरान ने दबाव एवं प्रतिबंधों के बावजूद, प्रौद्योगिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समेत विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की। किसी भी देश की प्रगति में अवरोध उत्पन्न करने के लिए आर्थिक दबाव और प्रतिबंध दो मुख्य कारक होते हैं। लेकिन ईरानी राष्ट्र ने इन दो बड़ी रुकावटों के बावजूद, प्रतिरोध की शैली को अपनाते हुए कठिनाईयों को सहन किया और चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित कर दिया।

ईरानी राष्ट्र ने दर्शा दिया कि वह आर्थिक दबावों का मुक़ाबला करने की योग्यता रखता है। इस दौरान उसने बहुत ही कठिन परिस्थितियों में उत्पादन, परमाणु तकनीक, नवीन ऊर्जा एवं नैनो टेक्नॉलॉजी के क्षेत्रों में प्रगति की।

 

 

ईरान को प्रगति से रोकने के लिए अमरीका और पश्चिम ने भारी निवेश किया ताकि ईरान को कमज़ोर कर सकें। लेकिन वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार वे अपने इस उद्देश्य में नाकाम हो गए। स्कोपस वेबसाइट पर दिए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, टेक्नॉलॉजी के उत्पादन में विश्व में ईरान का 16वां नम्बर है। 

पिछले साल नैनो टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में ईरान में छपने वाले लेखों के दृष्टिगत विश्व में ईरान का 8वां और इलाक़े में पहला नम्बर था। ईरानी शोधकर्ताओं के प्रयास से क्षेत्र और विश्व में विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में ईरान के स्थान में वृद्धि हुई है। इस्लामी जगत की वेबसाईट आईएससी की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, विश्व भर में टेक्नॉलॉजी के उत्पादन में ईरान की 1.58 प्रतिशत भागीदारी है। पिछले वर्ष ईरान में टेक्नॉलॉजी की प्रगति के संबंध में लिखा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में ईरान ने इलाक़े में प्रथम स्थान प्राप्त किया है और स्टेम सेल के क्षेत्र में दूसरा स्थान ग्रहण किया है। स्टेम सेल के क्षेत्र में ईरानी वैज्ञानिकों ने 1200 लेख लिखकर विश्व में 28वां और क्षेत्र में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ईरान ने इस्लामी जगत में पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि विश्व में 23वां स्थान।

 

 

2013 में ईरान ने नैनो अविष्कारों में विश्व में 38वा स्थान प्राप्त किया, हालांकि 2012 और 2011 में उसका स्थान 30वां था। 2013 में नैनो के विषय पर लिखे गए लेखों के मुताबिक़, विश्व में ईरान का 8वां स्थान था। 2008 से 2013 तक कुल मिलाकर ईरान में नैनो टेक्नॉलॉजी के 168 उत्पाद बनाए। ईरान विश्व के उन गिने चुने देशों में से है कि जिन्होंने नैनो टेक्नॉलॉजी के राष्ट्रीय कार्यक्रम का संकलन किया है।

ईरान ने यह प्रगति ऐसी स्थिति में की है कि जब अमरीका और पश्चिम ने तेल पर प्रतिबंध लगाकर और निवेश एवं विदेशी मुद्रा में अव्यवस्था पैदा करके ईरान की प्रगति को प्रभावित करने का भरपूर प्रयास किया है।  

 

 

ईरान को विकास एवं प्रगति से रोकने के लिए अमरीका और उसके घटक देशों ने काफ़ी पूंजी निवेश किया ताकि ईरान को प्रतिबंधों के मुक़ाबले में कमज़ोर दर्शा सकें।

गत वर्षों में पश्चिम ने दो सामरिक लक्ष्यों के तहत ईरान पर आर्थिक दबाव डाला। पहला लक्ष्य बुनियादी ज़रूरतों की आपूर्ति में उत्पादन के क्षेत्र में ईरान की अक्षमता को दर्शाना था, लेकिन यह शैली सफल नहीं हो सकी और ईरान ने दर्शा दिया कि आधारभूत क्षेत्रों में वह आर्थिक दबावों का मुक़ाबला करने की योग्यता रखता है। इस प्रकार, अभाव उत्पन्न करने का विचार असफ़ल हो गया और उसके स्थान पर उन्होंने ईरान की प्रगति के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने की नीति अपनायी। यह रणनीति पहले मार्ग की तुलना में बहुत अधिक ख़तरनाक है। इस रणनीति के तहत तकनीक के स्वदेशीकरण के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने और देश में उत्पादन के स्तर को नीचे लाने के लिए ईरान की अर्थव्यवस्था को मूल रूप से लक्ष्य बनाया गया और प्रतिबंधों को भी इसी लक्ष्य की ओर केन्द्रित कर दिया गया। इस परिप्रेक्ष्य में ईरान के तेल उद्योग को पश्चमी प्रतिबंधों में मुख्य रूप से निशाना बनाया गया कि जो ईरान की आय का मूल स्रोत है और जिसकी ईरान के आर्थिक विकास में भूमिका है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में ईरानी आर्थिक प्रगति एवं उत्पादन की योग्यता को शून्य पर पहुंचाना है।

 

 

लेकिन ईरान ने परपमाणु तकनीक समेत हर क्षेत्र में प्रतिरोध की नीति अपनाकर स्टेम सेल, क्लोनिगं, टेक्नॉलॉजी और नैनो टेक्नॉलॉजी में उदाहरणीय प्रगति की है और विश्व में 10वां स्थान ग्रहण किया है।

13 आबान, छात्र दिवस एवं विश्व साम्राज्यवाद से मुक़ाबले के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमरीका से ईरानी राष्ट्र के मुक़ाबले का एक महत्वपूर्ण पाठ प्रतिरोध, ईश्वर पर भरोसा और अधिकारियों के बीच एकता एवं उनके अथक प्रयास हैं। वरिष्ठ नेता ने अमरीका से ईरान के निरंतर मुक़ाबले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महान मुक़ाबले की एक महत्वपूर्ण ज़रूरत, निर्माण एवं ज्ञान के क्षेत्र में देश की व्यापक प्रगति के लिए प्रयास करना एवं डटे रहना है ताकि विकास एवं सफलता के लिए भूमि प्रशस्त की जा सके।

 

 

पश्चिम ने ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित परमाणु अनुसंधान केन्द्र को परमाणु ईंधन देने से इनकार कर दिया था जिसके कारण ईरान स्वदेशी तकनीक पर आधारित परमाणु ऊर्जा के उत्पादन पर बाध्य हुआ। इस अनुसंधान केन्द्र में विभिन्न रोगों के उपचार के लिए दवाईयों का उत्पादन किया जाता है, जिसके लिए 20 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन की ज़रूरत होती है।

परमाणु तकनीक अनेक श्रेत्रों में प्रगति का आधार है और वर्तमान समय में यह कुछ ही देशों के पास है। औद्योगिक आयाम से यूरेनियम के संवर्धन की टेक्नॉलॉजी में ईरान का विश्व में पांचवां स्थान है।

चिकित्सा के क्षेत्र में परमाणु तकनीक का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण है। ईरान ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आज ईरान में अनेक जटिल रोगों का इस तकनीक के आधार पर उपचार किया जा रहा है।

 

 

वर्तमान समय में दुनिया भर में प्रतिदिन 40 से 50 हज़ार रोगियों का परमाणु तकनीक से निर्मित दवाईयों द्वारा उपचार किया जा रहा है। ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था ने इन दवाईयों का बड़ी मात्रा में उत्पादन करने में सफ़लता प्राप्त की है।

 

 

भू विज्ञान के क्षेत्र में भी ईरानी वैज्ञानिकों ने देश के एक तिहाई क्षेत्र में रेडियो ऐक्टिव किरणों द्वारा यूरेनियम की खानों की खोज की है।

ईरान में पिछले तीन दशकों के दौरान विज्ञान एवं टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं, वह शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक जैसे क्षेत्रों में प्रतिरोध और डट जाने का परिणाम है। इससे यह साबित हो गया कि कोई भी शक्ति ईरान को विकास एवं प्रगति के शिखर पर पहुंचने से नहीं रोक सकती।

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