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शनिवार, 31 जनवरी 2015 15:11

ईरान की इस्लामी शासन व्यवस्था में चुनाव के महत्व और इसमें जनता की भागीदारी

ईरान की इस्लामी शासन व्यवस्था में चुनाव के महत्व और इसमें जनता की भागीदारी

 

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफतला के साथ इस देश की शासन व्यवस्था का आधार जनता की भागीदारी पर बनाया गया।   दूसरे शब्दों में इस्लामी क्रांति की सफलता से ईरान में लोकतांत्रिक परिवर्तन का आरंभ हुआ जिसका प्रतिबिंबन, बाद में सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में दिखाई दिया।

 

जनता की भागीदारी वाली व्यवस्था का आरंभ ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के लगभग दो महीनों के बाद आरंभ हो गया।  क्रांति के बाद देश में एक जनमत संग्रह कराया गया।  इस जनमत संग्रह के बाद चुनावों की प्रक्रिया आरंभ हुई।  ईरान की इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के मत को विशेष महत्व प्राप्त है।

 

चुनाव लोकतंत्र की एक अति महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें जनता अपने प्रतिनिधि का चयन स्वयं करती है।  चुनाव लोकतंत्र का आधार है।  इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि ईरान की इस्लामी क्रांति की महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि, एक इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था का गठन है।  ईरान में सत्ता का हस्तांतरण जनता की इच्छा और जनादेश के सम्मान के साथ बड़े शांतपूर्ण ढंग से होता आया है।

ईरान के संविधान में राष्ट्रपति के समानांतर संसद को भी अधिक अधिकार प्राप्त हैं।

 

राजनैतिक व्यवस्था में जनता के मतों का प्रभाव, इस अर्थ में है कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सम्मान करना।  लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को मताधिकार प्राप्त होता है।  यह मताधिकार उस व्यक्ति के सम्मान के अर्थ में है।  धार्मिक लोकतंत्र के अर्थ के बारे में संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि धार्मिक लोकतंत्र सरकार का एक एसा नमूना है जो ईश्वरीय अनुमोदन और जनसमर्थन पर निर्भर होता है। यह शासन धार्मिक नियमों के दायरे में रहते हुए सत्य और न्याय को प्राथमिकता देता है।  जनता का निर्वाचन अधिकार धार्मिक लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है।

 

उन समाजों में जहां पर चुनावी प्रक्रिया या मतदान का प्रावधान होता है वहां पर मतदाता स्वयं अपने भाग्य का निर्धारण करता है।  वह अपनी पसंद के प्रत्याशी को चुनता है।

 

इस्लामी गणतंत्र ईरान के संविधान में भी, लोकतंत्र पर विशेष बल दिया गया है।  इसके अनुसार इस्लामी क्रांति की सफलता  के बाद ईरान में धार्मिक मूल्यों के आधार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था का गठन हुआ।  इसकी विशेषता इस्लाम और लोकतंत्र का मिश्रण है।  इस व्यवस्था में जनता की भागीदारी पर विशेष बल दिया गया है।  लोकतंत्र का अर्थ राजनैतिक व्यवस्था और इस व्यवस्था के संचालनकर्ताओं का जनता की ओर से चुनकर आना है।

 

संविधान के अनुसार ईरान में गठिन होने वाली सरकार इस्लामी लोकतांत्रिक सरकार होगी।  इसका अर्थ यह है कि उसका स्वरूप लोकतांत्रिक है जो इस्लामी नियमों पर आधारित है।  इस्लामी लोकतंत्र में ईश्वरीय धर्म की प्रभुसत्ता, जनता की इच्छा, जनता के ईमान और मांगों तथा भावनाओं से जुड़ी होती है।

 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव को विशेष स्थान प्राप्त है।  इसका महत्व इसलिए है कि देश की जनता स्वतंत्र रूप में पूरी जानकारी के साथ अपना और देश का भविष्य निर्धारण करती है।  यह प्रक्रिया दर्शाती है कि इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव इसका प्रतीक होते हैं।

 

जिस बात का महत्व है वह यह है कि ईरान में इस्लामी लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहुत मज़बूत हो चुकी है।  इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ईरान में औसतन प्रतिवर्ष एक चुनाव हुआ है।

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि ईरान की जनता ने इस बारे में अपनी जागरूकता का परिचय दिया और अपने दृढ़ सकल्प से पश्चिम की चुनौतियों को चैलेंज किया।  परिपक्वता की ओर बढ़ने वाले इस अनुभव से पता चलता है कि इस्लामी क्रांति की सफलता के आरंभ से यह प्रक्रिया नाना प्रकार के दुषप्रचारों के बावजूद आगे की ओर बढ़ रही है।  हालांकि जनता को चुनावों में भाग लेने से रोकने के लिए विभिन्न षडयंत्रों का प्रयोग किया गया किंतु यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया एक क्षण के लिए भी नहीं रूकी है।

 

ईरान में तीन दशकों से अधिक समय में चुनावों का आयोजन और इनमें जनता की व्यापक स्तर पर भागीदारी ने ईरानी राष्ट्र को अपना भाग्य अपने हाथों निर्धारित करने का अवसर दिया है।  इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था अपनी अल्पआयु में वास्तविक लोकतांत्रिक शासन पेश करने की दिशा में बड़े क़दम उठाने में सफल रही है।

 

यह बात निश्चित रूप से कही जा सकती है कि चुनावों का आयोजन, लोकतंत्र के आधार को सुदृढ़ करता है।  यह विशेषता, ईरान के चुनावों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।  ईरान में आयोजित होने वाले चुनाव में अन्य देशों की तुलना में मतदाताओं की संख्या अधिक देखी गई है।

 

ईरान में जून 2013 को होने वाले ग्यारहवें राष्ट्रपति चुनाव में जनता ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।  ईरानी जनता की इस भागीदारी ने विश्ववासियों को दिखा दिया कि ईरान की इस्लामी शासन व्यवस्था, में जनता की भागीदारी को विशेष महत्व प्राप्त है और ईरानी जनता भी इसे अधिक महत्व देती है।

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