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शनिवार, 31 जनवरी 2015 14:59

ईरान की इस्लामी क्रांति की सफ़लता की वर्षगांठ-2

ईरान की इस्लामी क्रांति की सफ़लता की वर्षगांठ-2

 

इस्लामी क्रांति की सफ़लता के बाद ईरान एक स्वाधीन एवं सक्रिय शक्ति के रूप में क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभरा। ईरान की विदेश नीति में इस्लामी शिक्षाओं की भूमिका के कारण ईरान ने अहिंसा एवं चरमपंथ का विरोध करते हुए विश्व में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।

 

मध्यपूर्व और इस्लामी जगत में ईरान की भौगोलिक एवं राजनीतिक स्थिति के कारण क्षेत्र एवं विश्व में शांति स्थापना में ईरान की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान ने अपने रणनीतिक सिद्धांतों के आधार पर हमेशा शांति व स्थिरता को महत्व दिया है। हिंसा और युद्ध का ईरान की नीति में कोई स्थान नहीं है। परस्पर सम्मान के आधार पर ईरान दुनिया के साथ सहयोग करना चाहता है। इस्लामी क्रांति के बाद यह नीति कोई अचानक ही नहीं बनी है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र संघ, गुट निरपेक्ष आंदोलन और इस्लामी सहयोग संगठन जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ईरान, गुट निरपेक्ष आंदोलन और इस्लामी सहयोग संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और उसने नैम का नेतृत्व किया है। उदाहरण स्वरूप, फ़िलिस्तीनी मुद्दे के संबंध में ईरान के विशेष दृष्टिकोण ने मध्यपूर्व में उन तंत्रों से पर्दा उठाया है कि जो इलाक़े में अशांति का कारण हैं। फ़िलिस्तीनी इलाक़ों पर क़ब्ज़ा और इलाक़े में हमेशा अशांति उत्पन्न करना इस्राईल की मूल नीतियों में से है। ईरान ने इस वास्तविकता को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश किया है।

 

 

फ़िलिस्तीन के अलावा अफ़ग़ानिस्तान के विषय में ईरान की नीति से शांति स्थापना के लिए ईरान के प्रयासों की पुष्टि हो जाती है। जब अफ़ग़ानिस्तान संकट अपने चरम पर था ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से सहयोग करके इस देश में शांति स्थापना का प्रयास किया।

ईरान को आशा है कि अफ़ग़ानिस्तान की नई सरकार, देश में शांति की स्थापना के साथ क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगी देशों से संबंधों का नया अध्याय खोलेगी। ईरान का मानना है कि आतंकवाद, चरमपंथ, मादक पदार्थों का उत्पादन, आधारभूत ढांचे का अभाव, शिक्षा की कमी, निवेश का न होना, अफ़ग़ानियों का पड़ोसी देशों में शरण लेना ऐसी समस्याएं हैं जिन पर केवल अफ़ग़ानिस्तान और उसके पड़ोसी देश कंट्रोल नहीं कर सकते बल्कि इसका मुक़ाबला गंभीर उपायों एवं परस्पर सहोयक के आधार पर किया जा सकता है।

ईरान में राष्ट्रपति हसन रूहानी की सरकार के गठन के बाद से विश्व के साथ ईरान के सहयोग में वृद्धि हुई है और लगभग पिछले दो वर्षों से ईरान ने क्षेत्र एवं विश्व में शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हसन रूहानी की सरकार ने शुरू से ही आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरानी अधिकारियों ने हिंसा को जड़ से उखाड़ फेंकने की मांग की है। इस विषय पर ईरानी समाज में पूर्ण रूप से सहमति पायी जाती है।

 

 

सीरिया और इराक़ संकट के बारे में ईरान की संतुलित नीति इन देशों में हिंसा की समाप्ति पर केन्द्रित रही है। क्षेत्र एवं विश्व में हिंसा की समाप्ति के संबंध में 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सम्मेलन में ईरानी राष्ट्रपति ने प्रस्ताव पेश किया था।

विश्व भर में ईरानी राष्ट्रपति के इस प्रस्ताव का व्यापक स्वागत हुआ और महासभा ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया। इसी परिप्रेक्ष्य में दिसम्बर 2014 में तेहरान में हिंसा एवं चरमपंथ के ख़िलाफ़ एक अंतरराष्ट्रीय कांफ़्रेंस आयोजित हुई जिसमें लगभग 50 देशों के उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने इस सम्मेलन में उल्लेख किया कि हिंसा और चरमपंथ से मुक़ाबले के लिए नीति बनाने में सरकारों के बीच समन्वय ज़रूरी है। हसन रूहानी ने विश्व में हिंसा और चरमपंथ की समाप्ति तथा शांति की बहाली के लिए 10 प्रस्ताव पेश किए।

इन प्रस्तावों में संयुक्त राष्ट्र विशेषकर सुरक्षा परिषद और वीटो अधिकार में सुधार, शामिल था जिसने व्यवहारिक रूप से विश्व में शांति की स्थापना में राष्ट्र संघ की भूमिका को निम्न स्तर पर पहुंचा दिया है।

 

 

गंभीर मुद्दों पर सुरक्षा परिषद की असफ़लता से विश्व शांति को गंभीर ख़तरा उत्पन्न हो गया है, जिससे अतिक्रमणकारी सरकारों को प्रोत्साहन मिला है और दूसरी ओर पीड़ितों को निराशा हाथ लगी है। उदाहरण स्वरूप अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ की उपेक्षा करके और सामूहिक विनाश के हथियारों का बहाना बनाकर 2003 में इराक़ पर चढ़ाई से क्षेत्र में अशांति के लिए भूमि प्रशस्त हुई।

इसी प्रकार, अमरीका और उसके घटक देशों ने 2001 में आतंकवाद औऱ अलक़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई का बहाना बनाकर अफ़ग़ानिस्तान पर हमला कर दिया जिससे क्षेत्र और विश्व में शांति व्यवस्था स्थापित करने में न केवल कोई सहायता नहीं मिली बल्कि विश्व भर में आतंकवाद का विस्तार हुआ। अफ़ग़ानिस्तान पर 13 वर्षों से अधिक क़ब्ज़े के दौरान, अशांति, हिंसा और मादक पदार्थों के उत्पादन में वृद्धि हुई।

आतंकवाद और हिंसा का समाधान विश्व स्तर पर आपसी सहयोग से ही निकाला जा सकता है। इसी के साथ जब तक आतंकवाद के स्रोतों को नष्ट नहीं किया जाएगा विश्व में शांति की स्थापना संभव नहीं है।

ईरान का मानना है कि चरमपंथ एवं तकफ़ीरी आतंकवाद से निपटने के लिए विश्व एवं क्षेत्रीय स्तर पर स्कूलों और मदरसों में शिक्षा के पाठ्यक्रमों में सुधार और वास्तविक इस्लाम को विश्व वासियों तक पहुंचाया जाना ज़रूरी है।

 

 

ईरान ने विभिन्न क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में इस बात का प्रयास किया है कि जो देश आतंकवाद को संगठित कर रहे हैं और आतंकवादी गुटों को वित्तीय सहायता पहुंचा रहे हैं उनका आर्थिक एवं राजनीतिक बहिष्कार होना चाहिए।

ईरान के राष्ट्रपति डा हसन रूहानी ने तेहरान में हिंसा और चरमपंथ के ख़िलाफ़ आयोजित होने वाले पहले अतंरराष्ट्रीय सम्मेलन में जो प्रस्ताव रखे थे उनसे पता चलता है कि ईरान की कूटनीति क्षेत्रीय घटनाक्रमों के संबंध में एकदम सटीक है।

 

 

इस स्थिति में विश्व समुदाय की ज़िम्मेदारी है कि वह विश्व एवं क्षेत्रीय शांति के लिए ख़तरा बनने वाले कारकों की पहचान करके उनका मुक़ाबला करे। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ के अनुसार, तेहरान सम्मेलन इसमें भाग लेने वालों की ओर से आतंकवाद एवं चरमपंथ के ख़िलाफ़ एकजुटता का प्रतीक है। तेहरान सम्मेलन के परिणामों के मद्देनज़र यह आशा की जा सकती है कि इसे विश्व में शांति की स्थापना की महत्वपूर्ण शुरूआत माना जा सकता है।

चरमपंथ एवं हिंसा वैश्विक चुनौती है और इसका किसी विशेष इलाक़े, देश, धर्म, संस्कृति और जाति से संबंध नहीं है। इसीलिए इससे मुक़ाबले के लिए भी हर प्रकार के जातिवाद, धर्म और संस्कृति से ऊपर उठकर एकमत होने की ज़रूरत है।

 

क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरानी अधिकारियों ने बार बार विश्व शांति एवं सुरक्षा पर बल दिया है और कहा है कि हिंसा एवं चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में  सफ़लता के लिए बुनियादी क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है। विश्व में शांति की स्थापना के लिए ज़रूरी है कि राष्टों के बीच वार्ता की प्रक्रिया जारी रहे और आपसी ग़लतफ़हमियों को कम करने के लिए सीधा संपर्क साधा जाए।      

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