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शनिवार, 08 फ़रवरी 2014 16:37

इस्लामी क्रान्ति़-4

इस्लामी क्रान्ति़-4

किसी देश के विकसित होने के मानदंडों में से एक विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति भी है। ईरान में इस्लामी क्रान्ति के बाद विज्ञान, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, समाज सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ी से विकास के साक्षी है। इस्लामी क्रान्ति की बहुत सी उपलब्धियों में से एक इन क्षेत्रों में महिलाओं की प्रगति भी है। ईरानी महिलाओं ने फ़न्डामेन्टल साइंस, नैनो टेक्नालॉजी, स्टेम सेल, बायोटेक्नालॉजी, उड्डयन व परमाणु उद्योग, चिकित्सा विज्ञान की विभिन्न शाखाओं, दवा निर्माण, आविष्कार, और ओलंपियाड में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर विश्व स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है।

देशों की वैज्ञानिक प्रगति की दर्जाबंदी करने वाली संस्था साइमगो के अनुसार  ईरान विज्ञान के क्षेत्र में जिस तेज़ी से प्रगति कर रहा है, उसे देखते हुए वर्ष 2018 तक वह विश्व में चौथे स्थान तक पहुंच जाएगा।       

इस समय ईरान में महिलाओं द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रगति की बात को विश्व की बड़ी वैज्ञानिक संस्थाओं ने भी माना है।

अल्जज़ाएर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अब्दुलक़ादिर तूमी ईरानी महिलाओं के विरुद्ध पश्चिम के दुष्प्रचार की ओर इशारा करते हुए कहते है,“ ईरान की प्रतिभाशाली महिलाओं की उपमंत्री, मंत्रालय की प्रवक्ता, विश्वविद्यालय में शिक्षक, चिकित्सक और पायलेट के रूप में उपस्थिति यह दर्शाती है कि वे प्रगति की सीढ़ियां चढ़ने में पश्चिमी देशों से पीछे नहीं हैं।”

इस्लामी क्रान्ति को 35 वर्ष हो रहे हैं। इस दौरान ज्ञान-विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बहुत से क़ानून पारित किए गए हैं।

वर्ष 2010 में ईरानी संसद ने देश की पांचवी विकास योजना का क़ानून पारित किया कि जिसके आधार पर महिलाओं और लड़कियों की सामाजिक गतिविधियों के लिए उचित अवसर मुहैया हुए हैं। इस क़ानून में ज्ञान-विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने पर बल दिया गया है। मौजूदा आंकड़े यह दर्शाते हैं कि इस्लामी क्रान्ति के बाद के तीन दशकों के दौरान महिलाओं की शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। वर्ष 2011-2012 के शिक्षा सत्र में छात्रों की तुलना में छात्राओं का प्रतिशत 44 रहा जिससे लड़कियों में शिक्षा के प्रति बढ़ते रुझान का पता चलता है। इसी प्रकार ईरान के सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 में ईरान की 93 दश्मलव 2 प्रतिशत आबादी शिक्षित थी कि इसमें महिलाओं की भागीदारी बराबर है।

इस्लामी क्रान्ति के इस विचार ने कि ज्ञान की प्राप्ति और मानवीय आयाम से महिला और पुरुष में कोई अंतर नहीं है ईरानी समाज में और मज़बूत जड़ पकड़ी और महिलाओं के संबंध में विचार व दृष्टिकोण बदल गए।  आज विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं ने बड़ी उपलब्धियां अर्जित की हैं। इस समय उच्च शिक्षा की 65 प्रतिशत सीटों पर लड़कियां हैं। यह अपने आप में महिलाओं की वैज्ञानिक व सामाजिक प्रगति को समझने का बहुत बड़ा मानदंड है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि इस्लामी क्रान्ति के बाद ईरानी महिलाओं ने अपने कंधे पर अधिक ज़िम्मेदारियां ली हैं।

विश्वविद्यालयों में लड़कियों की बढ़ती दर से उपस्थिति महिलाओं को अधिक रोज़गार देने के लिए समाज में आए सकारात्मक परिवर्तन का चिन्ह है। ईरान में सरकारी व निजी विभागों में महिला कर्मचारियों की संख्या बढ़ती जा रही है।

इस्लामी क्रान्ति के बाद शिक्षा का एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र जिसमें महिलाओं ने बहुत प्रगति की है वह मेडिकल साइंस है। चिकित्सा विज्ञान की कुछ विशेष शाखाओं में ईरानी महिलाओं की भागीदारी पश्चिमी महिलाओं की तुलना में बेहतर है। शीराज़ की मेडिकल यूनिवर्सिटी के दो शिक्षकों द्वारा कराए गए शोध के अनुसार इस विश्वविद्यालय की महिला शिक्षकों ने अमरीका के चिकित्सा विद्यालयों की महिला शिक्षकों की तुलना में शैक्षिक प्रगति अधिक की। इस शोध में पता चला कि शीराज़ के चिकित्सा विश्वविद्यालय के अकैडमिक बोर्ड में महिलाओं सदस्यों की संख्या अमरीका के 106 चिकित्सा कालेजों के अवसत से ज़्यादा है। इस शोध के अनुसार शीराज़ के चिकित्सा विश्वविद्यालय में 35 प्रतिशत से ज़्यादा महिला शिक्षक  हैं जबकि वर्ष 2008 में अमरीका के 106 मेडिकल कालेजों में यह प्रतिशत 33 था। शीराज़ के मेडिकल विश्वविद्यालय में 14 प्रतिशत प्रोफ़ेसर महिलाएं हैं जबकि अमरीका के चिकित्सा कालेजों में यह प्रतिशत ग्यारह है। इस शोध का परिणाम यह दर्शाता है कि पश्चिमी मीडिया के इस दुष्प्रचार के बावजूद कि ईरान में महिलाओं को पाबंदियों का सामना है, ईरानी महिलाओं ने इस्लामी गणतंत्र की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

उपचार व स्वास्थय रक्षा के क्षेत्र में ईरानी महिलाओं की सक्रियता ध्यानयोग्य है। ईरान में 49 प्रतिशत जनरन फ़िज़िशियन, 40 प्रतिशत विशेषज्ञ चिकित्सक और 30 अल्ट्रा विशेषज्ञ चिकित्सक महिलाए हैं।        

डाक्टर फ़ातेमा फ़ीरूज़ी ईरान में स्पाइनल कॉर्ड में लगने वाली चोट का एलाज करने वाली टीम की सदस्य हैं। उन्होंने आरंभ में ईरान के ख़िलाफ़ सद्दाम द्वारा थोपे गए युद्ध के दौरान उन ज़ख़्मियों का उपचार किया जिनके स्पाइनाल कॉर्ड में ज़ख़्म था। डाक्टर फ़ीरूज़ी इस संदर्भ में बताती है, जब मैं घायलों को व्हील चेयर पर देखती थी तो मेरे और मेरी टीम के साथियों में यह भावना जागृत हुयी कि हम इन घायलों के उपचार के लिए शोध कार्य करें। पहला आप्रेशन एक ऐसे रोगी का किया जो 18 वर्ष से व्हील चेयर पर था। इस क्षेत्र में कामयाबी के बाद हमारी टीम इस क्षेत्र में और प्रयास के लिए गंभीर हो गयी। सुश्री फ़ीरूज़ी अपनी सफलता को ईरान में चिकित्सा विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में ईरानी महिलाओं की सफलता का एक छोटा सा नमूना बताती हैं।

ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के क्षेत्र में भी विशेषज्ञ महिलाएं काम कर रही हैं। सुश्री फ़रिश्ते इस्माईल बेगी भी परमाणु वैज्ञानिक हैं और ईरान की राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था के अकैडमिक बोर्ड की सदस्य हैं। फ़रिश्ते इस्माईल बेगी को वर्ष 2001 में तीसरे शहीद रजाई फ़ेस्टिवल में पुरस्कार दिया गया। इसी प्रकार ईरान की राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था ने वर्ष 2003 में उन्हें आदर्श अध्ययनकर्ता का पुरस्कार दिया। डाक्टर इस्माईल बेगी ने परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में अनेक शोधकार्य किए हैं। इसी प्रकार उन्होंने अपने साथियों के साथ जापान की नागवाय विश्वविद्यालय के रासायन संकाय सहित विभिन्न देशों के साथ नैनो स्ट्रक्चर के क्षेत्र में शोध किए हैं।

भौतिकशास्त्र और रसायनशास्त्र में भी ईरानी महिलाओं ने उल्लेखनीय प्रगति की है। अफ़साना सफ़वी ईरान में रसायनशास्त्र के क्षेत्र में प्रसिद्ध नाम है। उन्हें इटली में प्रोफ़ेसर अब्दुस्सलाम अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अब तक अफ़साना सफ़वी के 155 लेख प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में छप चुके हैं और देश व विदेश में काफ़्रेंसों में 130 लेख पेश कर चुकी हैं। उन्हें तीसरी दुनिया के देशों की अकैडमी में सबसे ज़्यादा लेख लिखने वाली वैज्ञानिक के रूप में चुना गया है।

इस प्रकार ईरानी महिलाएं इस्लामी संस्कृति व क्रान्ति से प्रेरणा लेकर स्पष्ट रूप से यह दर्शा दिया कि वे सभी वैज्ञानिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं और धार्मिक आस्थाएं व इस्लामी मूल्य उनकी व्यक्तिगत व सामाजिक गतिविधियों में न केवल यह कि बाधा नहीं हैं बल्कि इन गतिविधियों को सही दिशा में निर्देशित करते हैं। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई महिलाओं को वैज्ञानिक व सामाजिक क्षेत्रों में उपस्थिति के लिए सबसे ज़्यादा प्रेरित करने वालों में हैं। वे इस संदर्भ में कहते है, “महिला का सम्मान करने का अर्थ यह है कि उन्हें यह अवसर दिया जाए कि वे स्वयं से विशेष सहित अपनी महाप्रतिभा को जो ईश्वर ने हर मनुष्य को प्रदान की है परिवार, समाज, अंतर्राष्ट्रीय मंच, विज्ञान, शोध, निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में पेश करे और महिला के सम्मान का यही अर्थ है।”

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