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मंगलवार, 04 फ़रवरी 2014 11:44

२२ बहमन (ईरान विकास एवं प्रगति के मार्ग पर)

आर्थिक प्रतिबंध उन हथकंडों में से है कि जिसे इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था की स्थापना के आरम्भिक दिनों से ही ईरान पर दबाव डालने के लिए प्रयोग किया गया, अमरीका एवं उसके घटक यूरोपीय देशों द्वारा ईरान के विरुद्ध कठोर आर्थिक नीतियों के अंतर्गत यह क़दम उठाया गया। अब इस्लामी क्रांति की सफलता को 35 वर्ष बीत चुके हैं और इन समस्त वर्षों में हर प्रकार की रुकावटों एवं दबावों के बावजूद ईरानी राष्ट्र ने समस्त क्षेत्रों में प्रगति की है। ईरानी राष्ट्र ने आर्थिक कठिनाईयों को सहन किया, लेकिन कभी भी निराश नहीं हुआ बल्कि तेल उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रुकावटों के बावजूद उत्पादन का क्रम जारी रखा।

 

 

अमरीका ने तेल पर प्रतिबंध लगाकर और निवेश एवं विदेशी मुद्रा में अव्यवस्था पैदा करके ईरान की अर्थव्यवस्था के ढांचे को परिवर्तित करने एवं जनता में अप्रसन्न्ता उत्पन्न करने में अपनी पूरी शक्ति झोंक दी और आज भी व्वाईट हाउस के अधिकारी मेज़ पर सारे विकल्प मौजूद हैं कहकर प्रतिबंधों एवं युद्ध की धमकियां देते हैं।

ईरान को विकास एवं प्रगति से रोकने के लिए अमरीका और उसके घटक देशों ने काफ़ी पूंजी निवेश की है ताकि ईरान को प्रतिबंधों के मुक़ाबले में कमज़ोर दर्शा सकें।

गत वर्षों में पश्चिम ने दो सामरिक उद्देश्यों के तहत ईरान पर आर्थिक दबाव डाला। पहला उद्देश्य बुनियादी ज़रूरतों की आपूर्ति में उत्पादन के क्षेत्र में ईरान की अक्षमता को दर्शाना था, लेकिन यह शैली सफल नहीं हो सकी और ईरान ने दर्शा दिया कि आधारभूत क्षेत्रों में वह आर्थिक दबावों का मुक़ाबला करने की योग्यता रखता है। इस प्रकार, अभाव उत्पन्न करने का विचार असफ़ल हो गया और उसके स्थान पर उन्होंने ईरान की प्रगति के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने की नीति अपनायी। यह रणनीति पहले मार्ग की तुलना में बहुत अधिक ख़तरनाक है। इस रणनीति के तहत तकनीक के स्वदेशीकरण के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने और देश में उत्पादन के स्थर को नीचे लाने के लिए ईरान की अर्थव्यवस्था को मूल रूप से लक्ष्य बनाया गया और प्रतिबंधों को भी इसी लक्ष्य की ओर केन्द्रित कर दिया गया। इस परिप्रेक्ष्य में ईरान के तेल उद्योग को पश्चमी प्रतिबंधों में मुख्य रूप से निशाना बनाया गया कि जो आय का मूल स्रोत है और जिसकी ईरान के आर्थिक विकास में भूमिका है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में ईरानी आर्थिक प्रगति एवं उत्पादन की योग्यता को शून्य पर पहुंचाना है।

 

 

13 आबान, छात्र दिवस एवं विश्व साम्राज्यवाद से मुक़ाबले के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमरीका से ईरानी राष्ट्र के मुक़ाबले का एक महत्वपूर्ण पाठ प्रतिरोध एवं दूरदर्शिता की सुरक्षा, ईश्वर पर भरोसा और अधिकारियों के बीच एकता एवं उनके अथक प्रयास हैं। वरिष्ठ नेता ने अमरीका से ईरान के निरंतर मुक़ाबले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महान मुक़ाबले की एक महत्वपूर्ण ज़रूरत, निर्माण एवं ज्ञान के क्षेत्र में देश की व्यापक प्रगति के लिए प्रयास करना एवं डटे रहना है ताकि विकास एवं सफलता के लिए भूमि प्रशस्त की जा सके।

अब इस्लामी क्रांति की सफलता को 35 वर्ष बीत रहे हैं, ईरानी राष्ट्र ने यह वर्ष थोपे गए युद्ध, षडयंत्र, प्रतिबंध एवं विभिन्न प्रकार से दिए गए वचनों को तोड़ने जैसे दबावों से मुक़ाबले एवं स्थिरता में बितायें हैं। ईरानी जनता ने अर्थव्यवस्था सहित समस्त क्षेत्रों में स्थिरता एवं आत्मविश्वास के साथ सफ़लता प्राप्त की है। नैनो तकनीक, शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक, क्लोनिंग में स्टेम कोशिकाओं का प्रसार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास इस प्रगति के स्पष्ट चिन्ह हैं। विज्ञान के क्षेत्र में ईरान का विकास मध्यपूर्व में प्रथम एवं विश्व में दसवें नम्बर पर है। वर्तमान समय में कुछ ही देशों ने नैनो राष्ट्रीय योजना कार्यक्रम बनाया है या बना रहे हैं और ईरान भी उन देशों में से एक है। इस तकनीक में क्षेत्रीय देशों एवं इस्लामी देशों के बीच ईरान का पहला स्थान है और विश्व में 14वां।

ईरानी राष्ट्र ने विकास द्वारा सिद्ध कर दिया है कि प्रतिबंधों एवं दबावों के बावजूद, मज़बूत एवं विकासशील अर्थव्यवस्था खड़ी की जा सकती है। निःसंदेह अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में संघर्ष बहुत कठिन है और इसमें बहुत उतार चढ़ाव है, केवल वही देश इस लड़ाई में सफल हो पाते हैं कि जो रणनीतिक प्रौद्योगिकी में विकास को दृढ़ता से जोड़ देते हैं। पश्चिम ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में राजनीतिक उद्देश्य को सामने रखकर चिकित्सा मामलों से संबंधित तेहरान के अनुसंधान रिएक्टर को ईंधन बेचने से इनकार कर दिया, इसी हठधर्मी ने स्वदेशी प्रतिभा के आधार पर ईरान को चिकित्सा शोध एवं औद्योगिकी आवश्यकताओं के लिए परमाणु ईंधन के उत्पादन पर विवश किया। इस रिएक्टर में विभिन्न प्रकार की रेडियो दवाईयां बनाई जाती हैं। रोगियों की आवश्यकतों के दृष्टिगत रेडियो दवाईयां जैसे कि मोलिब्डेन-99 और टेक्नेशियम एम-99 इन वैज्ञानिक उपलब्धियों का एक भाग है।

 

 

पश्चिमी प्रतिबंधों के दौरान ईरान में परमाणु तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क़दम उठाए गए हैं जिनसे शोध, कृषि और चिकित्सा क्षेत्रों में लाभ उठाया जा रहा है।

परमाणु प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों पर आधारित है और वर्तमान समय में यह कुछ ही देशो के पास है। यह प्रौद्योगिकी समस्त वैज्ञानिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

परमाणु तकनीक में ईरान की सफ़लताएं सिद्ध करती हैं कि दृढ़ता एवं प्रतिरोध द्वारा कम से कम समय में परमाणु तकनीक की ऊंचाईयों पर पहुंचा जा सकता है। इन्हीं उपलब्धियों के कारण 24 नवम्बर 2013 को गुट पांच धन एक ने ईरान के परमाणु अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता प्रदान की। ईरान ने भी इस सफ़लता के परिप्रेक्ष्य में और परस्पर विश्वास बहाली की नीति के अंतर्गत स्वेच्छा से यूरेनियम संवर्धन के स्तर को 6 महीने तक के लिए 5 प्रतिशत तक घटाना स्वीकार किया, ताकि इस प्रकार परमाणु मामले में एक व्यापक समझौते तक पहुंचा जा सके।

ईरानी राष्ट्र की वर्तमान उपलब्धियां तीन दशकों तक विज्ञान के क्षेत्रों जैसे कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक के क्षेत्र में दृढ़तापूर्ण प्रगति का परिणाम है। यह उपलब्धियां, दबावों के मुक़ाबले में डट जाने एवं ईरानी राष्ट्र की प्रतिभाओं के फलने फूलने का परिणाम हैं, इससे सिद्ध होता है कि ईरान को विकास एवं ज्ञान की ऊंची चोटियों पर पहुंचने से कोई रुकावट नहीं रोक सकती।

ईरान पर प्रतिबंध और ईरानी अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव के बारे में कुछ समय पूर्व क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर समाचार पत्र ने लिखा कि रुकावटों ने ईरान को अधिक प्रगति की ओर क़दम उठाने के लिए प्रेरित किया है।

इस समाचार पत्र के अनुसार, प्रतिबंधों से इच्छानुसार परिणाम प्राप्त नहीं हो सके हैं, इसलिए कि कड़े प्रतिबंधों से समस्त क्षेत्रों में ईरान को प्रगति के लिए प्रेरणा मिली है।

एशिया प्रशांत वाणिज्य मंडल एवं उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष Benedicto Yujuico ने ईरान के वाणिज्य मंडल के प्रतिनिधिमंडल की तेहरान में आयोजित हालिया बैठक में कहा कि आर्थिक विकास के क्षेत्र में ईरान की अद्वितीय स्थिति है।

एशिया प्रशांत वाणिज्य मंडल एवं उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष ने उल्लेख किया कि ईरान को चाहिए कि तेल एवं गैस, ऑटोपार्टस एवं विमान के कलपुर्ज़ों की संयुक्त परियोजनाओं में इस परिसंघ के सदस्य देशों के साथ सहयोग करे।

प्राकृतिक गैस भंडारों के दृष्टिगत ईरान का विश्व में पहला स्थान है और तेल के भंडारों के दृष्टिगत ईरान का तीसरा स्थान है।

ईरान के खान और खनन उद्योग विकास एवं नवीकरण संगठन ने घोषणा की है कि वर्ष 2013 में ईरान ने 15.4 मिलियन टन इस्पात का उत्पादन किया और इस प्रकार वह मध्यपूर्व में पहले स्थान पर रहा।

 

 

विश्व इस्पात संगठन ने ईरान में इस्पात के उत्पादन की स्थिति की समीक्षा करते  हुए कहा है कि इस रणनीतिक उत्पादन में 2012 की तुलना में 2013 में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विश्व में इस्पात के महत्वपूर्ण उत्पादकों के बीच ईरान 15वें स्थान पर स्थित है।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने हाल ही में स्वीट्ज़रलैंड के नगर दावोस में विश्व के आर्थिक विशेषज्ञों के बीच, ऊर्जा एवं तेल उद्योग में 110 अरब डॉलर, पैट्रोकेमिकल क्षेत्र में 75 अरब डॉलर और रेलवे उद्योग में 33 अरब डॉलर के निवेश में ईरान के आर्थिक कार्यक्रमों की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरान परस्पर सम्मान एवं हितों के आधार पर विश्व भर के देशों के साथ आर्थिक सहयोग एवं सहकारिता के लिए तैयार है।                            

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