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मंगलवार, 28 जनवरी 2014 16:21

इस्लामी क्रान्ति-1

पश्चिम वर्षों से इस्लामी गणतंत्र ईरान की व्यवस्था को सुनियोजित ढंग से निशाना बना रहा है और एक-एक क़दम बढ़ाते हुए इस्लामी गणतंत्र ईरान को हानि पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। इस प्रक्रिया में पश्चिम ने नर्म युद्ध के क्षेत्र में सभी संभावनाओं का प्रयोग किया ताकि ईरान के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गहरी से गहरी नकारात्मक छवि पेश कर सकें।

नर्म युद्ध वास्तव में व्यवस्था को गिराने की एक शैली है जो पिछले कुछ वर्षों में ईरान के ख़िलाफ़ अपनायी गयी है। ईरान में प्रजातंत्र व आज़ादी का न होना और मानवाधिकार के उल्लंघन के दावे उन शैलियों में शामिल है जो इस्लामी क्रान्ति की सफलता के आरंभिक दिनों में अपनायी गयी और गत तीन दशकों के दौरान ईरान के ख़िलाफ़ विभिन्न चरणों में पश्चिम ने मानवाधिकार के हथकंडे को प्रयोग किया यहां तक कि ईरान के ख़िलाफ़ वास्तविकता से दूर अन्यायपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।  इसी संदर्भ में अमरीका में गैलप और पियो संगठनों ने सर्वे किए कि जिसके परिणाम ईरानोफ़ोबिया, ईरान की नकारात्मक छवि और ईरान को अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए ख़तरा दर्शाने के सूचक रहे।

पिछले 35 वर्षों में यह गतिविधियां संयुक्त राष्ट्र संघ और मानवाधिकार संगठन जैसे जनमत को प्रभावित करने वाले संगठनों के माध्यम से जारी रहीं।

पश्चिमी मीडिया ने बड़े व्यवस्थित ढंग से जितना उनसे संभव हो सका, ईरान पर आतंकवाद के समर्थन के निराधार आरोप द्वारा, ईरान के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार किया।

ईरान के ख़िलाफ़ नर्म युद्ध के सांचे में मीडिया के माध्यम जो हथकंडे अपनाए गए हैं उनमें बड़ी न्यूज़ एजेंसिया भी शामिल हैं कि इन न्यूज़ एजेन्सियों पर पश्चिम का वर्चस्व है। ये बड़ी न्यूज़ एजेन्सियां पत्रिकाओं, सेटेलाइट चैनलों, रेडियों और वेबसाइटों को ख़ूराक मुहैया कराती हैं। इस श्रेणी की न्यूज़ एजेन्सियां मीडिया युद्ध की मुख्य हथकंडा समझी जाती हैं। ये न्यूज़ एजेन्सियां हर दिन दसियों लाख ख़बरें बनाकर उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से पहुंचाती हैं और इस प्रकार सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में रखती हैं। ईरानी श्रोता विश्व की घटनाओं से संबंधित ख़बरों की प्राप्ति के संबंध में अन्य देशों के श्रोताओं से अलग नहीं हैं। उदाहरण स्वरूप असोशिएटेड प्रेस न्यूज़ एजेंसी हर दिन अवसतन एक करोड़  ग्यारह लाख ख़बरे विश्व भर में पहुंचाती है और विश्व के 109 देशों में दस हज़ार से ज़्यादा समाचार पत्रों को अपनी ख़बरों से ख़ुराब पहुंचाती है। वॉइस ऑफ़ अमरीका और बी बी सी भी इस सूचि में शामिल है। आंकड़ों के अनुसार ईरानियों और विश्व में फ़ारसी जानने वालों के लिए फ़ारसी भाषा में 32 से ज़्यादा रेडियो कार्यक्रम प्रसारित करते हैं और इन कार्यक्रमों को सुनने वालों की संख्या लगभग पंद्रह करोड़  है।

अमरीकी प्रशासन ने वर्तमान स्थिति में नर्म युद्ध को युद्ध पर प्राथमिकता दी है और नर्म युद्ध को वह मनोवैज्ञानिक व मीडिया वार के द्वारा चलाता है और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इसे अधिक प्रभावी मानता है।

पश्चिम इस शैली से ईरान की ग़लत छवि पेश करता है और विश्व शांति व सुरक्षा के लिए ईरान को ख़तरा दर्शाने का प्रयास करता है जबकि स्वयं अपने राष्ट्र की हितों की ओर ध्यान नहीं देता।

अमरीकी प्रशासन ने कभी भी इस बात से इंकार नहीं किया कि उन्होंने ईरान में इस्लामी गणतंत्र की स्थापना के आरंभिक दिनों से ही इसे गिराने का लक्ष्य बना रखा है किन्तु वर्तमान स्थिति में युद्ध को दूसरे स्थान पर रखा है और नर्म युद्ध छेड़ रखा है।

अमरीका के प्रसिद्ध स्ट्रेटिजिस्ट मार्क पॉमर ने कि जिन्हें अमरीकी विदेश नीति में नए विचार पेश करने वाले के रूप में जाना जाता है, ईरान-अमरीका नई शैली शीर्षक के अंतर्गत एक रिपोर्ट में इस विषय की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस्लामी गणतंत्र ईरान पर हमले के विचार का खुल कर विरोध किया और माना कि ईरान अपनी भौगोलिक विशालता, आबादी, उच्च स्तरीय मानव संसाधन, सैन्य संभावनाओं व सुविधाओं, प्राकृतिक स्रोतों से समृद्धता, तथा मध्यपूर्व व अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बड़ी शक्ति बन चुका है जिसे अब युद्ध द्वारा नहीं झुकाया जा सकता बल्कि इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था को गिराने की एकमात्र शैली नर्म युद्ध है कि जिसके अंतर्गत मीडिया और नागरिक अवज्ञा  जैसी शैली से मनोवैज्ञानिक अभियान चलाया जाए।

अमरीका और अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनीवाद नर्म युद्ध चलाने के लिए विभिन्न प्रकार की नीति व शैली अपना रखी है कि इसमें ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार भी शामिल है कि जिसके तहत अमरीका और ज़ायोनी शासन यह प्रचार कर रहा है मानो ईरान परमाणु हथियार बनाने के प्रयास कर रहा है।

इस संदर्भ में सिनेमा भी नर्म युद्ध में एक हथकंडे के तौर पर प्रयोग होता है। सिनेमा द्वारा तीसरी दुनिया के देशों की घटनाओं और प्रक्रियाओं पर प्रभाव डाला जाता है। फ़िल्मों और सीरियलों में प्राचारिक हथकंडों के तौर पर सकारात्मक व्यक्तित्व को पेश किया जाता है। विदित रूप से फ़िल्मों में जिन हस्तियों को उच्च मानवीय गुणों से सुशोभित दिखाया जाता है वे पश्चिमी जगत की हस्तियां होती हैं। इसके मुक़ाबले में फ़िल्म के नकारात्मक पात्र ऐसे देशों के होते हैं जो उनके दावों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था से समन्वित नहीं होते। इस प्रकार की फ़िल्मों में इस्लामी गणतंत्र ईरान को भी इन्हीं देशों की श्रेणी में दिखाया जाता है। इस प्रकार पश्चिमी सिनेमा जगत ईरान की इस्लामी क्रान्ति के संबंध में ग़लत बातें दिखाकर इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था को रूढ़ीवादी, हिंसक, आतंकवाद की समर्थक, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हननकर्ता दर्शाता है।

फ़्लाइट नंबर 93, बाबुल, किंग्डम, फ़ित्ना डॉक्यूमेंट्री, 300, एलेक्ज़ेन्डर, लॉर्ड ऑफ़ द ड्रीम्ज़, द स्टोनिंग आफ़ सुरय्या, नॉट विदाउट माई डॉटर, और डेल्टा फ़ोर्स, हॉलीवुड की वे फ़िल्में हैं जिन्हें ईरान के ख़िलाफ़ बनाया गया है। कंप्यूटर गेमों में भी जैसे द टेम्पेस्ट, अमरीकन फ़ोर्सेज़, अटैक ऑन ईरान्ज़ न्यूक्लियर इन्सटैलेशन्ज़ और इस जैसे कंप्यूटर गेम के डिज़ाइनरों ने इन्हें इस प्रकार बनाया है कि आई खेलने वाला और ख़ास तौर पर ईरानी खेलने वाला मोर्चे पर स्वयं अमरीकी सैनिक की भूमिका निभाता है। इस प्रकार वे दृष्टिगत समाज को अमरीकी हितों के संदर्भ में रक्षात्मक मुद्रा में ढकेल देते हैं और दुश्मन के संबंध में एक ख़ास छवि पेश करते हैं।

इंटरनेट जैसे वर्चुअल चैनल और सैटलाइट चैनल भी नर्मयुद्ध के हथकंडे में परिवर्तित हो गए हैं औ इसी के अनुरूप वे अपना संदेश तय्यार करते हैं।

सैटलाइट चैनल वास्तव में संपर्क व सूचना की संरचना का महत्वपूर्ण अंग बन चुके हैं और यह बात बड़े विश्वास से कही जा सकती है कि तीसरी सहस्त्राब्दी सैटलाइट युग है।

इस समय फ़ारसी भाषा के चैनल, ईरानी समाज के सबंधं में किए जा रहे प्रोपैगंडों के अनुरूप अपना कार्यक्रम बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ईरान के आयु पिरामिड में चूंकि युवाओं की संख्या अधिक है इसलिए यह गुट न्रम युद्ध के संचालकों के निशाने पर है।

आज सूचना एवं मास कम्यूनिकेशन तकनीक के अस्तित्व और इन तक्नीक के प्रयोग पर आने वाले कर्म ख़र्च के कारण इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ नर्म युद्ध ने गुप्त रूप से लड़ाई का रूप अख़्तियार कर लिया है। इसलिए ईरान के ख़िलाफ़ नर्म युद्ध के अर्थ को व्यापक परिदृष्य में देखा जाना चाहिए।

युद्ध के विपरीत नर्मयुद्ध में वस्तुतः हर प्रकार के मनोवैज्ञानिक अभियान और मीडिया प्रचार शामिल होता है जिसमें दृष्टिगत समाज को निशाना बनाया जाता है और बिना सैन्य लड़ाई और बंदूक़ चलाए ही प्रतिद्वंद्वि या तो पीछे हट जाता है या हार जाता है।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने नर्मयुद्ध की व्याख्या में कहते हैं,“नर्म युद्ध यानी सांस्कृतिक हथकंडों द्वारा युद्ध कि जिसमें पैठ, झूठ, अफ़वाह, संपर्क के आधुनिक उपकरण शामिल हैं कि जो आज से दस पंद्रह या तीस वर्ष पहले नहीं थे, लोगों के मन में संदेह व शंका पैदा करना नर्म युद्ध कहलाता है।”

इस लिए नर्मयुद्ध के संबंध में यह कहना सही है कि यह दृष्टिगत समाज की विचारधारा को धाराशाही करना चाहता है ताकि उसकी वैचारिक व सांस्कृतिक क्षमता क्षीण हो जाए और उस समाज की राजनैतिक व सामाजिक व्यवस्था को सामाचारिक व प्राचारिक बमों से अस्थिर कर दे।

ब्रूकिन्गज़ संस्था की ओर से आयोजित होने वाली गोलमेज़ कांफ़्रेंस और रैंड संस्था की ओर से मीडिया द्वारा जनमत को उकसाने और व्यवस्था की मज़बूती को आंकने के लिए कराए जाने वाले सर्वेक्षण, इसी संदर्भ में समीक्षा योग्य हैं जो इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ नर्म युद्ध की व्यापकता को दर्शाते हैं। 

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