चिन्तन के क्षण
सोमवार, 20 जून 2011 09:22

मैं और पिता

जब मैं 4 वर्ष का तो अपने पिता को संसार का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति मानता था।जब मैं 5 वर्ष का तो यह समझता था कि पिता को हर चीज़ का …
शनिवार, 21 मई 2011 13:33

कैसे प्रेरित करें

कुछ लोग लापरवाही, घमंड और ईर्ष्या या किसी और कारण से दूसरों की अच्छाइयों की सराहना और उन्हें प्रेरित नहीं करते। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बड़ी …
मंगलवार, 10 मई 2011 11:06

संक्रामक सोच और क़लम

ईशवर ने मनुष्य की प्रकृति में बहुत सी ऐसी विशेषतायें और गुण रखे हैं जिनहें उभार कर सामने लाना परिवार और समाज का दायित्व होता है । और यह गुण …
बुधवार, 04 मई 2011 12:51

रोक टोक

याद नहीं पड़ता कि कब से इस प्रथा का खुल कर चलन हुआ शायद बीस पच्चीस साल से !! यही प्रया कि बस अपने काम से काम रखो, रिश्तेदार हों …
इस्लाम ने विशेषकर ग़रीबों व दरिद्रों को खाना खिलाने पर बहुत ध्यान व बल दिया है। इस आधार पर इस्लामी समाजों में एक अच्छी परम्परा ग़रीबों व दरिद्रों को खाना …