उरोमिया, पश्चिमी आज़रबाइजान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो अपने इतिहासिक और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण सदा ही पर्यटकों को लुभाता है। उरोमिया झील नेशनल पार्क, क्षेत्र के विभिन्न औपचारिक गुणों वाले सोते, सरंक्षित क्षेत्र, गगनचुंबी पर्वत, हरे भरे मैदान और सब से महत्वपूर्ण सुन्दर व अनेक द्वीपों के साथ उरोमिया झील इस क्षेत्र के प्राकृतिक आकर्षणों में गिनी जाती है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र का समृद्ध और उतार चढ़ाव भरा इतिहास भी इस क्षेत्र में विभिन्न एतिहासिक इमारतों और स्थलों के अस्तित्व का एक कारण है। उरोमिया के आस पास के क्षेत्रों में २२ प्राचीन एतिहासिक अवशेषों और टीलों का अस्तित्व इस नगर के प्राचीन होने की पुष्टि करता है। पुरात्व विदों को गूग तप्पे से एक शिलालेख मिला है जिसका संबंध, दो हज़ार वर्ष ईसापूर्व से है। इसे न्यूयार्क के मेट्रोपोलेटियन म्यूज़ियम में रखा गया है। इस क्षेत्र में बहुत सी मस्जिदें भी हैं जो क्षेत्र में पर्यटन की दृष्टि से आकर्षण का केन्द्र हैं जबकि उरोमिया में विभिन्न क्षेत्रों में गिरिजाघरों की उपस्थिति भी इस क्षेत्र के इतिहासिक आकर्षणों में शामिल है। मारक़ूमा नामक एक अत्याधिक प्राचीन धार्मिक स्थल है जो हज़रत ईसा मसीह के बारह निकटवर्ती साथियों में से एक क़ूमा से संबंधित बताया जाता है। इसी प्रकार प्राचीन गिरिजाघर मायूख़न्ना जिसका निर्माण पांचवी शताब्दी की शैली से हुआ है, अत्याधिक महत्वपूर्ण समझा जाता है। इसी तरह दसियों, दुर्ग, पुल, पाठशाला, स्नानगृह, मक़बरे, भवन, शिलालेख तथा उरोमिया के बाज़ार ने इस क्षेत्र को अत्याधिक दर्शनीय व आकर्षक बना दिया है। तीन गुंबदीय बुर्ज तथा जामे मस्जिद, उरोमिया में इस्लामी सभ्यता की महानता का प्रतीक समझी जाती है। उरोमिया की जामे मस्जिद सातवीं हिजरी क़मरी के अंतिम वर्षों में बनायी गयी थी । यह मस्जिद नगर के बाज़ार के मध्य में स्थित है तथा इसमें एक बड़ा सा प्रांगड़ और ईंटों से बनी एक बड़ी दालान है जिसके मध्य भाग पर ऊंचा सा गुंबद बनाया गया है। मस्जिद का मेहराब चूने के काम और डिज़ाइन की दृष्टि से, मंगोल काल की कला का उत्कृष्ट नमूना है। तीन गुंबदीय भवन भी, टावर की भांति एक इमारत है जो उरोमिया के दक्षिणपूर्वी क्षेत्र में स्थित है। यह छठीं हिजरी शताब्दी के अवशेषों में से है। इस इमारत के नीचे एक छोटा सा तहखाना है जिसके द्वार को अत्याधिक सुन्दर डिज़ाइनों से सजाया गया है। कुछ पुरातत्व विदों का मानना है कि इस इमारत के आस पास दो अन्य गुंबदीय इमारतें भी थीं इसी लिए उन्हें त्रिगुंबदीय इमारत कहा जाता था।
उरोमिया सहित पश्चिमी आज़रबाइजान में बहुत सी प्राचीन इमारतें मौजूद हैं। जो इतिहासिक व सांस्कृति दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ ही निर्माण व डिज़ाइन की सुन्दरता की दृष्टि से भी असाधारण हैं और शीशे और चूने के कामों तथा प्लास्टर आफ पेरिस से बनी डिज़ाइनों और प्रतिमाओं तथा लकड़ी की सीढ़ियों ने उसकी सुन्दरता को चार चांद लगा दिया है। उरोमिया में इत्तिहादिया भवन, अन्सारी भवन तथा प्राचीन स्कूल हिदायत एसी ही इमारतों में है। इत्तिहादिया भवन उरोमिया के प्राचीन घरों में सब से अधिक सुन्दरता का स्वामी है। यह घर वर्ष १९०२ ईसवी में बनाया गया था और उरोमिया के प्रसद्धि व्यापारी मीरज़ा आक़ा इत्तिहादिया इसके स्वामी थे। यह भवन, एक आधुनिक इमारत के मध्य में स्थित है। अन्सारी भवन भी लगभग सौ वर्ष पूर्व बनाया गया था और उसका संबंध, काजारी शासन काल के अंतिम चरण से है। हिदायत पाठशाला भी इसी काल से संबंध रखता है और प्रथम विश्व युद्ध के समय कुछ दिनों तक फ्रांसिसियों ने इस भवन को प्रयोग किया था।
उरोमिया का संग्रहालय कलाकृतियों और अवशेषों की विविधता व संख्या की दृष्टि से ईरान का दूसरा सब से बड़ा संग्रहालय है। उरोमिया संग्रहालय वर्ष १९६७ में बनाया गया । इस संग्रहालय में एक बड़ा सा हाल है जिसमें विभिन्न युगों और एतिहासिक कालखंडों से संबंधित वस्तुएं रखी गयी हैं। इसी प्रकार इस संग्रहालय में एक छोटा हाल भी है जो मानव शास्त्र या नृविज्ञान से संबंधित है। उरोमिया संग्रहालय में हस्तलिखित बहुमूल्य पुस्तकें भी मौजूद हैं जिसमें क़ुरआने मजीद और इस्लामी धार्मिक पुस्तकों का विशेष रूप से उल्लेख किया जा सकता है। इसी प्रकार इतिहास पूर्व, इतिहास काल तथा इस्लामी काल से संबंध रखने वाली बहुत सी चीज़ों को भी इस संग्रहालय में देखा जा सकता है जबकि राष्ट्रीय कला, मानवविज्ञान तथा हस्तकला से संबंधित बहुत से उत्कृष्ट नमूने भी इस संग्रहालय की शोभा बढ़ाते हैं। उरोमिया संग्रहालय ईरान का एक अत्यन्त समृद्ध संग्रहालय समझा जाता है और इसमें मौजूद सब से पुरानी वस्तु का संबंध, सातवीं सहस्त्राब्दी ईसापूर्व से है। इस संग्रहालय में ईसापूर्व प्रथम सहस्त्राब्दी से संबंधित तीन अभिलेख भी हैं जिनके नाम स्तिल कल्लेशीन, स्तिल मुवाना तथर महमूदाबाद शिलालेख हैं। इन अभिलेखों को कीलाक्षर या अंकन लिपि में लिखा गया है। इस संग्रहालय की सब से आधुनिक वस्तुएं काजारी शासन काल से संबंधित हैं।
उरोमिया संग्रहालय के इतिहास पूर्व भाग में इतिहास पूर्व से संबंधित वस्तुएं मौजूद हैं जो इस्माईलाबाद, गीलान के अमलश क्षेत्र, नक़दा के हसनलू क्षेत्र, काशान के सियल्क तथा दीनोख़ा व अम्मारलू जैसे क्षेत्रों में उत्खनन के बाद मिली हैं और इन वस्तुओं में मिट्टी के कच्चे व पक्के बर्तन, कांसे की ढलाई के बर्तन मौजूद हैं। उरोमिया संग्रहालय में लुरिस्तान के इतिहास से संबंधित भाग में वह एतिहासिक वस्तुएं देखने को मिलती हैं जो लुरिस्तान प्रान्त से संबंध रखती हैं जो अधिकांश कांसे और तांबे से बने अस्त्र शस्त्र हैं किंतु मिट्टी के बर्तन भी उनमें नज़र आते हैं और इन सब का संबंध ईसापूर्व प्रथम सहस्त्राब्दी से है।
संग्रहालय के इतिहासिक अवशेषों के भाग में मौजूद अधिकांश वस्तुएं इस्लाम से पूर्व के काल से संबंधित हैं जो अधिकांश मिट्टी और धातु के बने बर्तनों पर आधारित हैं तथा इन का संबंध शूश, दैलमान, रैय, रूदबाद, सियाहकल, नहावन्द जैसे क्षेत्रों से है। सिक्के के भाग में भी इस्लाम से पूर्व के कालखंड और तत्कालीन साम्राज्यों से संबंधित सिक्के देखे जा सकते हैं किंतु विभिन्न इस्लामी काल से संबंधित सिक्के भी इस संग्रहालय में रखे हैं जिन्हें देखा सकता है। यहां पर यह भी बताना उचित होगा कि उरोमिया संग्रहालय में मौजूद अधिकांश अवशेष ईरान में इस्लामी काल से संबंधित और इस क्षेत्र में इस्लामी सभ्यता तथा इस क्षेत्र के एतिहासिक परिवर्तनों , घटनाओं , स्थलों व वस्तुओं तथा कला पर उसके प्रभावों से संबंधित हैं। इस काल से संबंध रखनी वाली वस्तुएं अत्यन्त सूक्ष्मता से बनायी गयी हैं तथा अधिकांश वस्तुओं को क़ुरआने मजीद की आयतों को सुन्दर लिपि में लिखकर सजाया गया है इसी प्रकार अरबी लिपि में लिखी विभिन्न प्रकार के सुन्दर अभिलेख भी हैं जिन्हें ईरान के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित किया गया है। इस संग्रहालय में विभिन्न कालों में इमाम हुसैन के शोक में प्रयोग होने वाले ध्वजों को भी देखा जा सकता है। इस प्रकार की सभी वस्तुओं का संबंध, इस्लाम के उदय से लेकर १४वीं हिजरी शताब्बदी से है। इस्लामी काल से संबंधित संग्रहालय के भाग में मिट्टी के बर्तन तथा धातु की बनी वह चीज़ें हैं जो ईरान के विभिन्न नगरों में मिली हैं।
संग्रहालय के मानव शास्त्र संबंधी भाग में बीती शताब्दियों से संबंधित पोशाक, पीतल, जस्ता तथा शीशे व कपड़े व मिट्टी से बनी चीज़ें रखी गयी हैं जो ईरान के विभिन्न कब़ीलों और जातियों से संबंध रखती हैं।संग्रहालय के सजावट कला से संबंधित भाग में भी हस्तलिखित क़ुरआने मजीन की प्रतियां, आयतें, पेंटिंग्स तथा मिनियेचेर के उत्कृष्ट नमूने और प्राचीन क़लमदान देखे जा सकते हैं जिनका संबंध तेरहवीं से चौदहवीं शताब्दी से है।



