सोमवार, 13 अगस्त 2012 12:10

बिल्ली बन गई सन्यासी!

बिल्ली बन गई सन्यासी!

एक ईरानी कहावत हैः मुज़्दगानी के गुर्बे आबिद शुद।

शुभसूचना! बिल्ली बन गई सन्यासी।

पुराने समय की बात है एक तीतर का एक पेड़ के नीचे घोसला था। एक दिन वह अपना घोसला ईश्वर के भरोसे छोड़ कर अपने मित्र से मिलने निकल गया। तीतर अपने मित्र के पास बहुत लंबे समय तक ठहर गया। इस बीच तीतर का घोसला ख़ाली था और उसके पड़ोसी उसकी प्रतीक्षा करते करते थक गए मगर उसे न लौटना था न लौटा। स्वयं से कहने लगे कि बेचारा तीतर किसी जाल में फंस गया है या शिकारी के हाथों मारा गया। तीतर का ख़ाली घोसला उसके मित्रों को उसकी याद दिलाता था। एक दिन एक ख़रगोश का आवारा बच्चा तीतर के घोसले के पास से गुज़र रहा था। जब उसकी दृष्टि तीतर के ख़ाली घोसले पर पड़ी तो उसने स्वयं को इधर उधर मारे फिरने से बचने के लिए उस घोसले में रहने की सोची। तीतर के पड़ोसियों ने जो उसकी वापसी की ओर से निराश हो चुके थे, कोई आपत्ति नहीं जतायी और इस प्रकार ख़रगोश, तीतर के घोसले में रहने लगा और निश्चिंत होकर पड़ोसियों के साथ जीवन बिताने लगा कि एक दिन एक घटना घटी। वह घटना यह थी कि तीतर अपने मित्र से भेंट कर सुरक्षित अपने घोसले की ओर लौट पड़ा। तीतर ने जब ख़रगोश को अपने घोसले में देखा तो चिल्लाते हुए पूछाः तुम कौन हो कहां से आए? बिना मेरी अनुमति के क्यों मेरे घर में घुस आए? ख़रगोश ने शांति के साथ उत्तर दियाः तुम देख रहे हो कि इस घोसले में मैं हूं और यह मेरा घोसला है। यदि तुम्हारे पास कोई तर्क है जिससे सिद्ध हो सके यह तुम्हारा घोसला है तो पेश करो। तीतर ने कहाः सभी पड़ोसी इस बात के गवाह हैं कि यहां पर मेरा घोसला था। ख़रगोश ने कहाः पड़ोसियों की गवाही से तुम्हारा हला भला नहीं होने वाला। तीतर को समझ में नहीं आ रहा था कि किस प्रकार इस नए आने वाले के सामने सिद्ध करे कि यह मेरा घोसला है। तीतर के पड़ोसियों में एक कव्वा भी था जिसका पेड़ पर घोसला था। कव्वा इस विचार के साथ कि कहीं दोनों के बीच झगड़ा न हो जाए बीच में आ गया और उसने कहाः यहां पड़ोस में एक बिल्ली रहती है जो पहले बहुत दुष्ट थी किन्तु अब सुधर गयी है। उसने सबको यह संदेश भेजा है कि पिछले कृत्य छोड़ दिए हैं और अब किसी पशु-पक्षी का शिकार नहीं करती और अपना समय उपासना में बिताती है। बेहतर होगा उसके पास जाओ और अपनी बात उससे कहो ताकि तुम्हारे बीच फ़ैसला कर दे कि इस घोसले पर किसका अधिकार है। ख़रगोश और तीतर दोनों ने कव्वे के परामर्श को पसंद किया और दोनों बिल्ली के पास गए। बिल्ली ने जब दोनों को दूर से आते देखा तो उपासना में व्यस्त हो गयी। वे दोनों बिल्ली के पास पहुंचे। कुछ देर प्रतीक्षा की ताकि बिल्ली की उपासना समाप्त हो जाए। उसके बाद उसे सलाम करके अपने मामले से उसे अवगत कराया और कहा कि अब तुम फ़ैसला सुनाओ कि यह घोसला किसका है। बिल्ली ने दोनों की बात सुनने के बावजूद यह कहा कि मैं बूढ़ी हो गयी हूं, ठीक से नहीं सुन पाती हूं थोड़ा और निकट आओ और फिर से अपनी बात कहो ताकि समझ सकूं कि मेरी दृष्टि में उसका समाधान क्या है। ख़रगोश और बिल्ली बिना डरे बिल्ली के निकट हो गए और अपना मामला उसे बताने लगे। बिल्ली ने इस अवसर से लाभ उठाया और एक ही हमले में तीतर और ख़रगोश को झपट लिया और जब तक दोनों अपने आप को संभाल पाते कि बिल्ली का निवाला बन गए।

इसके बाद से जब कोई दुष्ट व्यक्ति अच्छे व्यक्ति बनने का दिखावा करता है तो उसके बारे में यह कहावत कही जाती हैः  मुज्दगानी के गुर्दे आबिद शुद। 

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