सोमवार, 23 जुलाई 2012 13:10

हिलना नहीं तुम ख़ज़ाना हो

हिलना नहीं तुम ख़ज़ाना हो

मशहूर ईरानी कहावत है, नजुन्ब के गन्जी अर्थात हिलना नहीं तुम ख़ज़ाना हो।

पुराने समय की बात है एक मूर्ख राजा शासन करता था और हर दिन किसी न किसी प्रकार का मूर्खतापूर्ण व निरर्थक आदेश देता जिससे उसकी प्रजा को कठिनाइयां होती थीं। हर दिन प्रजा से ना ना प्रकार के कर वसूलता ताकि राजकोष भर जाए।

एक दिन राजा अपने भवन में टहल कर यह सोच रहा था कि अब किस प्रकार नए कर के रूप में बेचारी प्रजा की जेल ख़ाली कराए। जितना सोचता किसी परिणाम तक नहीं पहुंचता था। उसने घर, नदियां, गाय, भेड़-बकरियों, यहां तक कि प्रजा की हर प्रकार की छोटी बड़ी संपत्ति पर कर लगा रखा था। अब कोई ऐसी चीज़ नहीं बची थी कि जो संपत्ति की श्रेणी में आए और उस पर प्रजा से कर ले सके।

बहुत लंबी अवधि तक सोच विचार के पश्चात उसके मन में एक ऐसी नई बात आयी कि मुस्कुराते हुए स्वयं से कहाः अब लोगों से उनकी अपंगता का कर लूंगा।

इसके बाद उसने अधिकारियों को जमा किया और उनसे कहाः हर व्यक्ति को ध्यान से देखो। जिस व्यक्ति में शारीरिक त्रुटि हो उसे गिरफ़्तार कर उससे कहो कि राजा ने शरीर में हर त्रुटि के बदले में एक सिक्का कर देने का आदेश जारी किया है।

राजा के अधिकारियों ने जो स्वयं को मजबूर पा रहे थे, लोगों के बीच चल पड़े। जिस व्यक्ति को देखते कि वह लंगड़ा या लूला है या गूंगा है उसे रोक लेते और उससे कहते थेः तुम विकलांग हो राजा के आदेश पर तुम्हें एक सिक्ता कर देना होगा।

प्रजा को इस कर पर बहुत आश्चर्य हुआ और धीरे धीरे उनका आश्चर्य क्रोध व अप्रसन्ता का रूप धारण करता गया।

राजा का एक अधिकारी जो विकलांग व्यक्तियों की तलाश में निकला था कि अचानक उसकी दृष्टि एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जिसका हाथ गर्दन पर लटका हुआ था। वह तुरंत उसकी ओर गया और कहाः तुम्हें अपने एक अंग की विकलांगता के कारण एक सिक्का कर देना होगा।

लूला व्यक्ति जिसे नए क़ानून के बारे में कुछ पता नहीं था, अप्रसन्न होकर कहने लगाः यह क् क् क्या बकवास है मैं कि कि किस बात पर एक सिक्का कर दूं?

अधिकारी ने कहाः तुम्हें दो सिक्के देने होंगे। एक लूलेपन के लिए और दूसरा तुतलाने के लिए।

यह सुनते ही लूला व्यक्ति क्रोधित होकर राजा के अधिकारी की ओर लपका। राजा के अधिकारी ने स्वयं की रक्षा के लिए अपना हाथ बढ़ाया। हाथ का बढ़ाना था कि उसका हाथ लूले व्यक्ति की टोपी से टकरा गया और लूले व्यक्ति की टोपी गिर गयी। टोपी का गिरना था कि सबने लूले व्यक्ति के गंजेपन को भी देख लिया। अधिकारी ने अवसर का लाभ उठाया और हंसते हुए कहाः अब तीन सिक्के हो गए एक तुम्हारे गंजेपन के कारण।

लूले व्यक्ति ने जब स्वयं को एक के बाद एक कठिनाइयों में फंसते देखा मौजूद अवसर से लाभ उठाया और घटनास्थल से लंगड़ाते हुए भाग गया। लोगों ने जो राजा के नए आदेश से अप्रसन्न थे, उस लूले व्यक्ति को भागने के लिए मार्ग छोड़ दिया। जब राजा के अधिकारी ने देखा कि लूला व्यक्ति लंगड़ा भी है तो तेज़ी से उठा ताकि उस तक पहुंच जाए।

लूला व्यक्ति जो तेज़ी से नहीं दौड़ सकता था, विवशतः एक कोने में बैठ गया। राजा का अधिकारी उसके निकट पहुंचा और कहाः नजुंब के गन्जी अर्थात हिलना नहीं तुम ख़ज़ाना हो। एक सिक्का लूलेपन, एक सिक्का तुत्लाने, एक सिक्का गंजेपन  और एक सिक्का लंगड़ेपन के लिए कर। मेरे विचार में तुम्हें राजा के पास ले जाना ठीक रहेगा। क्योंकि संभव है तुम्हारे शरीर का कोई और अंग विकलांग हो। चार सिक्का तो कुछ नहीं है। राजा के इस आदेश के दृष्टिगत तो तुम उसके लिए एक ख़ज़ाने की भांति हो।

इस घटना के बाद से यदि किसी व्यक्ति से यह कहना हो कि अपने स्थान पर बैठे रहो, हिलो मत, क्योंकि तुम्हारा हिलना तुम्हारे लिए हानिकारक होगा, तो उससे कहते हैः नजुंब के गन्जी अर्थात हिलना नहीं तुम ख़ज़ाना हो।{jcomments on}

                    

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