शुक्रवार, 03 अगस्त 2012 14:19

आंदोलन समाप्त!!!

आंदोलन समाप्त!!!

अनशन तोड़ने से पहले टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की रूपरेखा का विवरण दिया। उन्होंने कहा उपवास के इन दिनों में उन्हें यह एहसास करने का अलसर प्राप्त हुआ कि इस देश में ग़रीब किसान कैसे भूखे सोते होंगे। उन्होने कहा कि हमारी पार्टी लोगों के बीच जाकर घोषणा पत्र बनाएगी। उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से कृषिमंत्री शरद पवार पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अब व्यवस्था बदलने के लिए आंदोलन होगा।  

टीम अन्ना की निगाहें अब 2014 के लोकसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं। टीम अन्ना ने राजनीति को एक विकल्प के तौर पर चुना है। परन्तु शुक्रवार को टीम अन्ना के सदस्यों ने जिस तरह से विभिन्न प्रकार के बयान दिए हैं राजनीतिक पार्टी के गठन को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं। कुमार विश्वास ने फेसबुक पर जो अपडेट किया है उससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि वह टीम अन्ना छोड़ देंगे। टीम अन्ना के एक और महत्वपूर्ण सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा है कि राजनीतिक विकल्प ज़रूरी है, जबकि मनीष सिसोदिया ने कहा है कि राजनीतिक के दंगल में कूदने की बात जल्दबाज़ी है।

हालांकि टीम अन्ना के इस फैसले पर राजनीतिक पार्टियां जमकर चुटकियां ले रही हैं। समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने यहां तक कह दिया है कि अगर टीम अन्ना चुनाव में उतरी तो ज़मानत ज़ब्त हो जाएगी।

कांग्रेस ने टीम अन्ना की इस घोषणा का मजाक उड़ाया। सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, इस आंदोलन से वे किस लक्ष्य को साधना चाहते थे? उद्देश्य स्पष्ट करें. ऐसा प्रतीत होता है कि वे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते थे कि जिससे उन्हें राजनीतिक लाभ मिल सके। राजनीतिक में आने दीजिए उसके बाद वास्तविकता समझ में आयेगी।

सवाल उठता है कि क्या सोलह महीने में ही अन्ना के आंदोलन ने दम तोड़ दिया। चुनावी राजनीति में प्रवेश के अन्ना की घोषणा के साथ ही जनलोकपाल आंदोलन का अंत तय हो गया है। स्पष्ट है इसके बाद सवा साल से चली आ रही लोकपाल की मांग दम तोड़ देगी। दूसरे 14 भ्रष्ट मंत्रियों के विरुद्ध जांच की मांग समाप्त हो जाएगी और टीम अन्ना 2014 के आम चुनाव की तैयारियों में जुट जाएगी। भ्रष्टाचार से मुक्ति और राजनीतिक सुधारों के लिए देश की जनता को फिर किसी क्रांतिकारी मसीहा की प्रतीक्षा करना होगी।

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