यह वेबसाइट बंद हो गई है। हमारी नई वेबसाइट हैः Parstoday Hindi
सोमवार, 11 अप्रैल 2016 19:25

बहरैनी शासन की व्यापक आलोचना

बहरैनी शासन की व्यापक आलोचना

बहरैन में मानवाधिकार के व्यापक उल्लंघन की मानवाधिकार संगठनों व संस्थाओं की ओर से आलोचना जारी है।

इसी संदर्भ में एम्नेस्टी इंटरनेश्नल ने बहरैन में राजनैतिक क़ैदियों की तुरंत रिहाई पर बल दिया। एम्नेस्टी इंटरनेश्नल के मध्यपूर्व व उत्तरी अफ़्रीक़ी मामलों के अधिकारी जेम्ज़ लिन्श ने कहा कि यह संस्था बहरैन में फ़ॉर्मूला वन कार रेस प्रतियोगिता के आयोजन के साथ साथ इस देश में सभी राजनैतिक बंदियों की तुरंत रिहाई की मांग करती है।

जेम्ज़ लिन्श ने इसी प्रकार आले ख़लीफ़ा शासन से मांग की कि वह बहरैनी नागरिकों की नागरिकता रद्द करने और इस देश में राजनैतिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार करने की नीति ख़त्म करे।

बहरैन में 2011 में जनक्रान्ति के दमन के समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का क्रम जारी है। इस देश की जनता राजनैतिक सुधार चाहती है किन्तु आले ख़लीफ़ा शासन इस देश के नागरिकों को गिरफ़्तार, उनका दमन और उनकी नागरिकता को ख़त्म करने की नीति अपनाए हुए है।

आले ख़लीफ़ा शासन की पुलिसिया नीति के परिप्रेक्ष्य में हालिया महीनों में इस देश में राजनैतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी, उन्हें यातना देने और उनकी नागरिकता समाप्त करने की घटनाएं चिंताजनक हद तक बढ़ गयी हैं।

आले ख़लीफ़ा शासन इस देश की जनता की बहरैन में प्रजातंत्र व न्याय की स्थापना की मांग को पूरा करने के बजाए उस पर दुगुना अत्याचार कर रहा है।

आले ख़लीफ़ा शासन के अत्याचार में सैकड़ों बहरैनी हताहत हुए हैं जबकि घायलों व जेल में बंद नागरिकों की संख्या तो हज़ारों में है।

इस वक़्त बहरैन की जेल में 10000 से ज़्यादा राजनैतिक क़ैदी हैं जिनमें 150 लोगों को आजीवन कारावास का दंड दिया गया है जबकि 200 बंदी आले ख़लीफ़ा शासन के सुरक्षा कर्मियों की बर्बरता के नतीजे में अपंग हो गए हैं।

बहरैन में नागरिक स्वतंत्रता का पहले से ज़्यादा उल्लंघन, राजनैतिक कार्यकर्ताओं की व्यापक स्तर पर गिरफ़्तारी और विपक्षी गुटों की गतिविधियों को ख़त्म करने की पृष्ठिभूमि तय्यार करने से, आले ख़लीफ़ा शासन की अत्याचारी प्रवृत्ति पहले से ज़्यादा स्पष्ट हो गयी है।(MAQ/T)

 

Media

Add comment


Security code
Refresh