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रविवार, 10 अप्रैल 2016 20:15

सऊदी अरब यमन में अंसारुल्लाह की भूमिका समाप्त कर देना चाहता है

सऊदी अरब यमन में अंसारुल्लाह की भूमिका समाप्त कर देना चाहता है

10 अप्रैल से यमन के अंसारुल्लाह संगठन और सऊदी अरब के मध्य संघर्ष विराम पर सहमति होने के बावजूद इस देश के विभिन्न क्षेत्रों पर सऊदी घटकों के पाश्विक हमले जारी हैं।

इससे पहले घोषणा की गयी थी कि रविवार की आधी रात से यमन में युद्धविराम लागू हो जायेगा परंतु बाद में घोषणा की गयी कि सोमवार की आधी रात से संघर्ष विराम लागू होगा। यमन के अंसारुल्लाह संगठन और सऊदी अरब के मध्य होने वाली सहमति के आधार पर यमन के मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत इस्माईल वलद शेख अहमद की निगरानी में कुवैत में 18 अप्रैल से वार्ता आरंभ होगी। सऊदी अरब के युद्धक विमानों ने यमन के तईज़, मारिब और अलजौफ़ प्रांतों पर हमला किया जिसमें कुछ लोग हताहत व घायल हो गये। यमन के संबंध में सऊदी अरब की नीतियों ने दर्शा दिया है कि संघर्ष विराम उन लक्ष्यों को आगे ले जाने का बहाना है जिसे सऊदी अरब सैनिक मार्गों से आगे ले जाने में विफल रहा है। इससे पहले भी यमन में युद्ध विराम के लिए समझौते हो चुके हैं परंतु सऊदी अरब की विस्तारवाद की नीतियों के कारण विफल रहे हैं। सऊदी अरब की सैन्य नीति का एक लक्ष्य यमन से अंसारुल्लाह संगठन की भूमिका को समाप्त कर देना था पर इसमें वह सफल नहीं हो सका। सऊदी अरब सैनिक मार्गों पर जो आग्रह कर रहा है उसका एक कारण यह है कि वह इस मार्ग से अपने लक्ष्यों को साधना चाहता है परंतु इस मार्ग से भी वह अपने लक्ष्यों को साध न सका तो विवश होकर वह अंसारुल्लाह से वार्ता करने के पर तैय्यार हो गया है। साथ ही सऊदी अरब और उसके समर्थक यमन में सत्ता के मंच से अंसारुल्लाह की भूमिका को समाप्त कर दिये जाने के इच्छुक हैं। यह ऐसी स्थिति में है जब यमन के अंसारुल्लाह संगठन सऊदी अरब और उसके घटकों के पाश्विक हमलों के मुक़ाबले में अदम्य साहस के साथ डटा हुआ है और वह यमन की राष्ट्रीय सरकार को जनता की सरकार मानता है। MM

 

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