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शनिवार, 09 अप्रैल 2016 19:38

सऊदी नरेश ने क़ाहेरा में मिस्री राष्ट्रपति से भेंटवार्ता की

सऊदी नरेश ने क़ाहेरा में मिस्री राष्ट्रपति से भेंटवार्ता की

सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ एक शिष्टमंडल के साथ पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सात अप्रैल को क़ाहेरा पहुंचे हैं

जहां उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फत्ताह अस्सीसी से भेंटवार्ता की है। द्वपक्षीय और क्षेत्रीय परिवर्तनों के बारे में विचारों का आदान- प्रदान इस यात्रा का मूल लक्ष्य बताया गया है। सऊदी अरब वह पहला देश है जिसने वर्ष 2013 में मोहम्मद मुरसी की क़ानूनी सरकार के विरुद्ध अब्दुल फत्ताह अस्सीसी की सैनिक सरकार को मान्यता प्रदान की और उसने मिस्र में सत्ता परिवर्तन का समर्थन किया। सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और कुवैत ने वर्ष 2013 में अब्दुल फत्ताह अस्सीसी की सरकार का एक करोड़ बीस लाख डालर की सहायता की। साथ ही सऊदी अरब ने मिस्र के ब्रदरहुड का नाम आतंकवादी गुटों की सूचि में शामिल कर दिया। इन सबके बावजूद अब्दुल फत्ताह अस्सीसी के सत्ताकाल में मिस्र और सऊदी अरब के संबंधों में कठिनाइयों व मतभेदों का सामना है। जिन चीज़ों के बारे में मिस्र और सऊदी अरब के मध्य मतभेद हैं उनमें से एक सीरिया में सैनिक हस्पक्षेप है। मिस्र सीरिया में सैनिक हस्तक्षेप का विरोधी है जबकि सऊदी अरब सीरिया में सैनिक हस्क्षेप का प्रबल समर्थक है। यद्यपि सऊदी अरब ने यमन के विरुद्ध जो घटक बनाये हैं उनमें मिस्र शामिल है परंतु यह भागीदारी सीमित है। यमन विरोधी सऊदी अरब के घटक देशों में मिस्र के शामिल होने का लक्ष्य सऊदी अरब के वित्तीय समर्थन को प्राप्त करना है।

सऊदी नरेश की मिस्र यात्रा का एक लक्ष्य द्वपक्षीय संबंधों को मज़बूत बनाना है। इसी प्रकार सऊदी नरेश की मिस्र यात्रा के दौरान दोनों देशों के मध्य तेल के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर होने की आशा है। इस समझौते के अनुसार सऊदी अरब पांच वर्षों तक मिस्र की तेल आवश्कताओं की पूर्ति करेगा। इस तेल की क़ीमत 20 अरब डालर बतायी गयी है।

बहरहाल सऊदी नरेश की मिस्र यात्रा का लक्ष्य विभिन्न मामलों में मिस्र के दृष्टिकोणों को रियाज़ की नीतियों के अनुसार बनाना है। MM

 

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