यह वेबसाइट बंद हो गई है। हमारी नई वेबसाइट हैः Parstoday Hindi
बुधवार, 20 जनवरी 2016 15:41

आइए फ़ार्सी सीखें-44

आइए फ़ार्सी सीखें-44

अत्याचारी शासक शाह के भ्रष्टाचारों का रहस्योद्घाटन करने के कारण इमाम ख़ुमैनी को जूलाई १९६३ को गिरफ़्तार करके तेहरान में जेल भेज दिया गया था।  कुछ समय तक जेल में रहने के पश्चात इमाम खुमैनी को स्वतंत्र कर दिया गया किंतु शाह के तत्व उनपर पूरी तरह से नज़र रखे हुए थे।  अपनी स्वतंत्रता के पश्चात इमाम ख़ुमैनी क़ुम नगर गए और उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा।  इसी बीच कैपिच्यूलेशन क़ानून पारित किये जाने से लोगों की भावनाएं आहत हुईं।  यह क़ानून ईरान में रहने वाले अमरीकी सैनिकों को न्यायिक सुरक्षा प्रदान करता था।  स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने इस क़ानून के प्रति अपना विरोध जताते हुए भाषण दिया जिसके पश्चात उन्हें पुनः गिरफ़्तार कर लिया गया।  गिरफ़्तार करके इमाम ख़ुमैनी को पहले तुर्की और बाद में इराक़ निष्कासित कर दिया गया।  शाह यह सोच रहा था कि इमाम ख़ुमैनी को ईरान से निष्कासित करके इस्लामी आन्दोलन का प्रभाव समाप्त हो जाएगा, बल्कि हुआ इसके विपरीत।  इमाम ख़ुमैनी के विरुद्ध अत्याचारी शाह का इस प्रकार का व्यवहार, जनता के प्रतिरोध एवं इमाम ख़ुमैनी की लोकप्रियता में वृद्धि का कारण बना।  इमाम ख़ुमैनी के जीवन के संबन्ध में मुहम्मद और रामीन की वार्ता में प्रयोग होने वाले मुख्य शब्द और उनके अर्थ इस प्रकार हैं।

 

 

सरकार

رژیم

 

राजा

شاه

 

इमाम

امام

 

एक ईरानी महीने का नाम

خرداد

 

वर्ष

سال

 

उनको गिरफ़तार किया

او دستگیر کرد

 

कुछ समय के पश्चात

پس از مدتی

 

वे स्वतंत्र हो गए

او آزاد شد

 

जेल

زندان

 

पश्चात

بعد از

 

स्वतंत्र होना

آزاد شدن

 

उसने क्या किया?

او چه کرد ؟

 

फिर भी

باز هم

 

राजनीति, नीति

سیاست

 

इस्लामी

اسلامی

 

इस्लाम विरोधी

ضد اسلامی

 

उसने विरोध किया

او مخالفت کرد

 

विरोध

مخالف

 

वर्चस्व

تسلط

 

विदेशी

بیگانه

 

देश

کشور

 

अब भी

همچنان

 

संघर्ष

مبارزه

 

वह जारी है

او ادامه داد

 

इसी प्रकार

به همین خاطر

 

एक ईरानी महीने का नाम

آبان

 

निष्कासन

تبعید

 

उन्हें निष्कासित किया गया

او تبعید کرد

 

उनको निष्कासित किया

او تبعید شد

 

वे

ایشان

 

कितने समय

چه مدت

 

लगभग

حدود

 

एक वर्ष

یک سال

 

इराक़

عراق

 

किस प्रकार

چگونه

 

जनता या लोग

مردم

 

वे संपर्क रखते थे

او ارتباط داشت

 

पत्र

نامه

 

घोषणापत्र

اعلامیه

 

टेक्सट

متن

 

भाषण

سخنرانی

 

वह प्रसारित होता था

آن پخش می شد

 

कुछ वर्ष

چند سال

 

वे बाक़ी रहे-वे रहे

او ماند

 

वहां

آنجا

 

कौन सा काम

چه کاری

 

वे किया करते थे

او انجام می داد

 

१३ वर्ष

13 سال

 

धार्मिक शिक्षा केन्द्र

حوزه علمیه

 

नजफ़। इराक़ का एक नगर

نجف

 

वे पढ़ाया करते थे

او تدریس می کرد

 

इस्लामशास्त्र

فقه

 

ज्ञान

علم

 

इस्लामी ज्ञान

علوم اسلامی

 

अंत

پایان

 

वह आया

او آمد

 

जारी

ادامه

 

संघर्ष

مبارزه

 

वह विवश हो गया

او مجبور شد

 

वह छोड़ने के लिए विवश हो गया

او مجبور شد ترک کند

 

फ़्रांस

فرانسه

 

वे जाएं

او برود

 

 रामीनः शाह की सरकार ने इमाम ख़ुमैनी को ख़ुरदाद के महीने में १३४२ हिजरी शमसी में गिरफ़्तार कर लिया।  कुछ समय के पश्चात इमाम जेल से स्वतंत्र हो गए।

 

رامین - رژیم شاه امام را در خرداد سال 42 ه . ش . دستگیر کرد . امام پس از مدتی از زندان آزاد شد .

मुहम्मदः इमाम ने स्वतंत्र होकर क्या किया?

 

محمد - امام بعد از آزاد شدن چه کرد ؟

रामीनः इमाम ने शाह की इस्लाम विरोधी नीतियों का विरोध जारी रखा।  वे देश पर विदेशियों के वर्चस्व के विरोधी थे।

 

رامین - امام باز هم با سیاستهای ضد اسلامی رژیم شاه ، مخالفت کرد . او مخالف تسلط بیگانگان بر کشور ایران بود .

मुहम्मदः इमाम ख़ुमैनी ने अपने संघर्ष को जारी रखा

 

محمد - پس امام خمینی ، همچنان به مبارزات خود ادامه داد .

रामीनः हां।  इसीलिए शाह की सरकार ने आबान १३४३ में इमाम को तुर्की निष्कासित कर दिया।

 

رامین - بله . به همین خاطر ، رژیم شاه امام را در آبان سال 43 به ترکیه تبعید کرد .

मुहम्मदः वे तुर्की में कितने समय तक रहे?

 

محمد - ایشان چه مدت در ترکیه بود ؟

रामीनः इमाम ख़ुमैनी लगभग एक वर्ष तक तुर्की में रहे फिर उन्हें इराक़ निष्कासित कर दिया गया।

 

رامین - امام خمینی حدود یک سال در ترکیه بود و سپس به عراق تبعید شد .

मुहम्मदः अपने निर्वासन काल में इमाम ख़ुमैनी किस प्रकार से ईरानी जनता से संपर्क रखते थे।

 

محمد - امام در زمان تبعید ، چگونه با مردم ایران ارتباط داشت ؟

रामीनः इमाम ख़ुमैनी के निर्वासन काल में ईरान में उनके बयान, भाषण और संदेश जनता में बांटे जाते थे।

 

رامین - در زمان تبعید امام خمینی ، نامه ها ، اعلامیه ها و متن سخنرانی های ایشان ، در ایران پخش می شد .

मुहम्मदः वे इराक़ में कितने वर्षों तक रहे और वहां पर वे क्या करते थे?

 

محمد - ایشان چند سال در عراق ماند و در آنجا چه کاری انجام می داد ؟

रामीनः इमाम ख़ुमैनी १३ साल तक इराक में रहे और नजफ़ के धार्मिक शिक्षा केन्द्र में इस्लामी विषय पढ़ाते थे।

 

رامین - امام 13 سال در عراق بود و در حوزه علمیه نجف ، فقه و علوم اسلامی را تدریس می کرد .

मुहम्मदः क्या इराक़ से निष्कासन समाप्त करने के पश्चात वे ईरान वापस आए?

 

محمد - پس از پایان تبعید در عراق ، امام به ایران آمد ؟

रामीनः नहीं।  अपने संघर्ष को जारी रखने के लिए उन्हें इराक छोड़ने पर विवश होना पड़ा और वे इराक़ से फ़्रांस चले गए।

 

رامین - نه . ایشان برای ادامه مبارزه خود ، مجبور شد عراق را ترک کند و به فرانسه برود .

 

मुहम्मद और रामीन की वार्ता से यह बात समझ में आती है कि स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी, वास्तविकता के खोजी और अथक प्रयास करने वाले थे।  यही कारण था कि अत्याचारी शाह ने उन्हें ईरान से निष्कासित कर दिया था।  शाह यह सोच रहा था कि ईरान से दूरी के कारण जनता उनको भूल जाएगी और इमाम ख़ुमैनी भी अपना आन्दोलन समाप्त कर देंगे किंतु इमाम ख़ुमैनी अपने निष्कासन काल के दौरान भी ईरानी जनता को जागरूक बनाते रहे।  वे पत्रों, बयानों तथा संपर्क के अन्य माध्यमों से ईरानी जनता से संपर्क में रहते थे।  इमाम ख़ुमैनी ने इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ के धार्मिक शिक्षा केन्द्र में पढ़ाने के दौरान वहां पर अपनी विशेष छाप छोड़ी।  उन्होंने इस्लाम को सम्मान वाला तथा स्वतंत्रता का धर्म बताया जो किसी भी स्थिति में वर्चस्व स्वीकार नहीं करता।  अंततः इराक़ की सरकार ने इमाम ख़ुमैनी को इराक़ छोड़ने के लिए विवश किया।  इमाम ख़ुमैनी ने फ़्रांस जाने का निर्णय किया ताकि वहां से अपने संघर्ष को आगे बढ़ाएं।

Add comment


Security code
Refresh