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मंगलवार, 12 जनवरी 2016 17:25

तेहरान-2

तेहरान-2

तेहरान के बारे में अब तक अध्ययन के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे पता चलता है कि दमावंद के आस-पास कीलान इलाक़े में सबसे पहले जो इंसान आया था वह 14000 साल पहले आया था। अध्ययन के अनुसार, उस समय का इंसान गुफाओं में ज़िन्दगी गुज़ारता था और शिकार के ज़रिए अपनी रोज़ी हासिल करता था। 8000 साल पहले से लेकर माद जाति के काल तक धीरे-धीरे तेहरान प्रांत में इंसानों से जुड़े पुरातात्विक अवशेष व कम्पाउंड की संख्या बढ़ी।

 

 

तेहरान में इंसानों के बसने का इतिहास 5000 साल ईसापूर्व से मिलता है। 1393 हिजरी शम्सी के दसवें महीने में तेहरान के मोलवी इलाक़े में एक नरकंकाल बरामद हुआ जो 5000 साई ईसापूर्व पुराना है। इससे पहले तक यह अनुमान लगाया जाता था कि तेहरान में इंसानों के बसने का इतिहास क़ैतरिये में खुदाई में मिले अवशेष से जुड़ा है जो लगभग 3000 साल ईसापूर्व है। क़ैतरिये में की गयी खुदाई से पहले तक, यह विचार था कि तेहरान का इतिहास अश्कानी शासन काल जितना पुराना अर्थात 2000 साल ईसापूर्व का है। उस समय तेहरान एक गांव था जो रय के उत्तर में स्थित था जबकि उन दिनो रय एक महत्वपूर्ण शहर था। दारयूश ने बीसुतून के शिलालेख में रय शहर के नाम का ज़िक्र किया है। सासानी शासन काल में रय बहुत मशहूर हुआ और आज भी इस शासन काल के अनेक अवशेष रय के आस-पास मौजूद हैं। चौथी हिजरी क़मरी तक रय बड़े शहरों में गिना जाता था किन्तु 617 हिजरी क़मरी में मंगोलों के हमले में उजड़ गया। रय के बारे में आपको बाद के कार्यक्रम में बताएंगे।

यहां पर इस बिन्दु का उल्लेख ज़रूरी है कि उस समय तेहरान एक ऐसा बड़ा गांव था जो पेड़ों से भरा हुआ था। इसी प्रकार एक शहर के लोग गर्मी के मौसम में तेहरान आ जाते थे। उस समय के लोग अपने घर में तहख़ाने बनाते थे और दुश्मन के हमले के वक़्त उसमें पनाह लेते थे और खाद्य पदार्थ का इतना बड़ा भंडार करते थे कि महीनों दुश्मन के सामने प्रतिरोध करते थे। यही कारण है कि तेहरान, मंगोलों के हमलों से सुरक्षित रहा और रय शहर के उजड़ने के बाद, इसकी अहमियत बढ़ गयी।

 

 

सबसे पुराना लिखित दस्तावेज़ जिसमें तेहरान के नाम का ज़िक्र वह 340 हिजरी क़मरी में लिखा गया। यह दस्तावेज़ अबू इस्हाक़ इस्तख़री ने अलमसालिक वल मुमालिक शीर्षक के तहत लिखा है। इस्तख़री के बाद, याक़ूत हमवी और इब्ने हौक़ल बग़दादी ने भी तेहरान के बारे में कुछ लिखा है। जैसे याक़ूत हमवी ने मोजमुल बुलदान में लिखा है, “तेहरान एक बड़ा गांव है जहां ज़मीन के नीचे घर बने हुए हैं औ झोपड़ी जैसे दिखने वाले किसी भी घर में, घर के मालिक की इच्छा के बग़ैर दाख़िल नहीं हो सकते।”

आसारुल बलद नामक किताब में मोहम्मद क़ज़वीनी ने तेहरान के बारे में लिखा है, “तेहरान के निवासियों के घर भूमिगत बने होते हैं। जब भी कोई दुश्मन हमला करता है तो तेहरान के लोग फ़ौरन अपने भूमिगत घर से बाहर निकल कर उसका मुक़ाबला करते हैं।”        

भूशास्त्रियों और तेहरान के बारे में अध्ययन करने वालों के दस्तावेज़ों से इस बात की पुष्टि होती है कि प्राचीन समय में तेहरान, रय के गावों में से एक गांव था और रय चूंकि क़ुम, ख़ुरासान, माज़न्दरान, क़ज़्वीन, गीलान, सावे जाने वाले मार्ग के चौराहे पर स्थित था इसलिए प्राचीन समय से ही ध्यान का केन्द्र था। यही कारण था कि स्ट्रेटिजिक दृष्टि से इस महत्वपूर्ण शहर पर निरंतर हमला होता था। उन दिनों तेहरान गांव भूमिगत ठिकानों, प्राकृतिक रुकावटों, और घुसपैठ में कठिनाइयों के कारण सत्ताधारियों और फ़रार करने वालों के लिए एक सुरक्षित शरण स्थल था।

 

 

सफ़वी शासन काल, तेहरान के विस्तार और इसे अहमियत का काल था। सफ़वी शासक शाह तहमास्ब सफ़वी जिन्होंने अपने शासन काल में क़ज़्वीन को अपनी राजधानी बनाया था, कभी कभी सफ़वी शासन काल के प्रपितामह सय्यद हमज़ा के रौज़े के दर्शन के लिए शाह अब्दुल अज़ीम जाते थे। अच्छी जलवायु, बाग़ों, सोतों की भरमार के कारण शाह तहमास्ब को तेहरान पसंद आया और धीरे-धीरे वह तेहरान में लंबे समय तक ठहरने लगे। शाह तहमास्ब सफ़वी ने अपने शासन काल में तेहरान में मज़बूत इमारतें, मीनारें और प्राचीर बनवायीं। 1553 या 1554 में तेहरान के चारों ओर प्राचीर बनायी गयी और तेहरान में पवित्र क़ुरआन के सूरों की संख्या जितनी 114 मीनारें बनायी गयीं। उस समय तेहरान में 4 शहरी दरवाज़े थे, दरवाज़े शेमीरान, दरवाज़े क़ज़्वीन, दरवाज़े दूलाब और दरवाज़े हज़रत अब्दुल अज़ीम। बाद में 2 और शहरी दरवाज़े स्थापित किए गए जिनके नाम थे दरवाज़े दोलत और दरवाज़े मोहम्मदिये।  प्राचीर बनाने के लिए जिन जगहों से मिट्टी खोदी जाती थी वे स्थान चाले मैदान और चाले हेसार के नाम से मशहूर हुए। मशहूर इतालवी पर्यटक पेट्रो डेला वाले 1618 ईसवी में शाह अब्बास सफ़वी के शासन काल में तेहरान आया था और उसने तेहरान का भ्रमण किया था। वह तेहरान के बारे में लिखता है, तेहरान, काशान से बड़ा है लेकिन इसकी आबादी काशान से कम है। इस शहर की एक तिहाई ज़मीन पर इमारतें हैं और दो तिहाई ज़मीन पर बाग़ हैं। तेहरान की सड़क जैसी चौड़ी गलियों में चेनार के पेड़ लगे हैं और कुछ चेनार के पेड़ के तने इतने मोटे हैं कि चार आदमी अगर अपना हाथ एक दूसरे के हाथ में देकर चेनार के तने को उसके बीच में लाना चाहें तो बड़ी मुश्किल से ऐसा कर पाएंगे। सफ़वी शासन काल के पतन और अफ़शारी शासन काल के सत्ता में आने के बाद नादिरशाह ने 1739 में तेहरान का शासन अपने बड़े बेटे रज़ा क़ुली मीरज़ा को सौंपा। नादिर शाह की मौत के बाद ईरान में अराजकत फैल गयी। 1758 या 1759 में करीमख़ान ज़न्द के हाथ में ईरान की सत्ता पहुंची। उसने चार साल तक तेहरान को अपनी राजधानी क़रार दिया और क़िले के भीतर नई इमारतें बनवायीं।

 

 

करीम ख़ान ज़न्द ने मोहम्मद हसन ख़ान क़ाजार से लड़ाई के कारण, राजधानी तेहरान से शीराज़ स्थनांतरित कर दी। किन्तु तेहरान का राजधानी का दर्जा ख़त्म होने के बावजूद, तेहरान के वैभव में कोई कमी नहीं आयी बल्कि कुछ समय बाद तेहरान फिर से राजधानी बन गया।

जिस राजा ने तेहरान को अपनी राजधानी बनाया वह क़ाजारी शासन श्रंख्ला का शासक आग़ा मोहम्मद ख़ान क़ाजार था। आग़ा मोहम्मद ख़ान ने उन सब लोगों को हराया जो उनके मार्ग में रुकावट बन रहे थे। आग़ा मोहम्मद ख़ान ने 1795 ईसवी को तेहरान को राजधानी बनाया। उसके बाद उन्होंने अपने नाम से सिक्का जारी करने का आदेश दिया और तेहरान को दारुल ख़िलाफ़ा का नाम दिया जिसका अर्थ होता है राजधानी। आग़ा ख़ान द्वारा तेहरान को राजधानी बनाए जाने के कुछ

कारण बयान किए जाते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कारण, वरामीन की उपजाउ ज़मीन और उसके पास अफ़शारी क़बीले सावजब्लाग़ तथा पश्चिमी भाग के कबीलों का वरामीन में निवास स्थल था। ये क़बीले आग़ा मोहम्मद ख़ान के समर्थक थे।

 

 

एक और कारण माज़न्दरान और असतराबाद शहर से तेहरान की नज़दीक होने था। उन दिनों तेहरान एक छोटा क़स्बा था जिसकी आबादी 20000 थी। 1797 से 1834 के बीच क़ाजारी शासक फ़त्हअली शाह के दौर में जो आग़ा मोहम्मद ख़ान के बाद सत्ता में पहुंचा, तेहरान पहले से ज़्यादा विकसित हुआ। तेहरान में नई इमारतें बनायी गयीं और इस शहर के अपेक्षाकृत विकास के बाद तेहरान के दूर और नज़दीक स्थित क़स्बों के निवासी तेहरान आने लगे जिसके नतीजे में तेहरान की आबादी बढ़ती गयी। जाक मोरिये ने 1807 में तेहरान का भ्रमण किया था और उसने अपने यात्रा वृत्तांत में तेहरान का वर्णन किया है। इस यात्रा वृत्तांत में उन्होंने तेहरान में स्थित सार्वजनिक हम्माम, कारवां सराय और बड़े मैदानों का आंकड़ा पेश किया है।

   

 

नासिरुद्दीन शाह के दौर को ईरान में राजनैतिक व सांस्कृतिक बदलाव का दौर कहा जाता है। इस दौर में यूरोप की औद्योगिक क्रान्ति और साम्राज्यवादी नीतियों के प्रभाव में ईरान नए चरण में दाख़िल हुआ कि जिसका अंजाम नासिरुद्दीन शाह की मौत के तुरंत बाद संविधान क्रान्ति सहित दूसरे घटनाओं के रूप में सामने आया। इस दौर में तेहरान में विकास कार्यों में सुधार हुआ और तेहरान की आबादी बढ़ी। 

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