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मंगलवार, 22 दिसम्बर 2015 16:00

ईलाम-1

ईलाम-1

ईलाम प्रांत का क्षेत्रफल लगभग 19086 वर्ग किलो मीटर है। यह एक पहाड़ी और ऊंचा इलाक़ा है। यह प्रांत ईरान के पश्चिम और दक्षिण पश्चिम में कबीर-कोह और जेबाले ज़ागरस पर्वतीय श्रंखलाओं के बीच स्थित है। इस प्रांत के उत्तर में किरमानशाह प्रांत, दक्षिण में ख़ुज़िस्तान और इराक़ का एक भाग, पूरब में लोरिस्तान, और पश्चिम में इराक़ स्थित है।

ईलाम प्रांत में जेबाले ज़ागरस पर्वतीय श्रंखला के पहाड़ स्थित हैं, जो इस पर्वतीय श्रंखला के पश्चिमी किनारे पर समानांतर रूप में स्थित हैं और उत्तर पश्चिम एवं दक्षिण पूर्व तक समानांतर रूप में फैले हुए हैं। ईलाम प्रांत के उत्तरी वं उत्तर पूर्वी इलाक़े पहाड़ी हैं जो काफ़ी ऊंचे हैं। इस प्रांत के पश्चिमी एवं दक्षिण पश्चिमी इलाक़े नीचे और कम ऊंचाई वाले हैं।

 

 

ईलाम प्रांत जलवायु की दृष्टि से ईरान के गर्म इलाक़ों में गिना जाता है। हालांकि पहाड़ों के कारण, तापमान और बारिश के अनुपात में विभिन्न इलाक़ों में काफ़ी अंतर है। इस प्रकार से कि इस प्रांत के इलाक़ों को सर्द, गर्म और संतुलित जलवायु वाले भागों में बांटा जा सकता है। प्रांत में प्रतिवर्ष काफ़ी वर्षा होने और ज़ागरोस पर्वतीय श्रंखला से निकलने वाले सोतों के कारण कई नदियां अस्तित्व में आ गई हैं। यही कारण है कि इस प्रांत में कई बांधों और नहरों का निर्माण किया गया है। इस प्रांत का केन्द्र ईलाम शहर है, जो प्राकृतिक रूप से काफ़ी सुन्दर है और ज़ागरोस की दुल्हन के नाम से प्रसिद्ध है।

ईलाम प्रांत में पर्वतीय श्रंखलाओ और बड़े बड़े जंगलों के कारण विभिन्न प्रकार के जानवर और वनस्पतियां पायी जाती हैं, जिसकी वजह से इस इलाक़े के प्राकृतिक सौंदर्य में वृद्धि हो गई है। इस इलाक़े के पहाड़ों के आंचल में हरे भरे दृश्य, बलूत के जंगल, नदियां और बड़ी संख्या में सुन्दर झरने हैं। ईलाम, ईरान के सबसे सुन्दर इलाक़ों में से एक है और यहां प्राकृतिक पर्यटन की काफ़ी संभावनाएं मौजूद हैं।

 

 

ईरान के इस इलाक़े का इतिहास काफ़ी पुराना है, जिसके कारण यहां महत्वपूर्ण एवं आकर्षक चीज़ें हैं, जो प्राचीन ईरान की पौराणिक कहानियों की याद दिलाती हैं। इस प्रांत की एक अन्य सुन्दरता, यहां के सामाजिक एवं सांस्कृतिक आकर्षण हैं। इस इलाक़े की सैर के लिए सबसे उचित समय वसंत ऋतु है। वसंत में यहां सुन्दर फूल खिलते हैं और गर्मियों में नदियां बहती हैं और सुन्दर झरने गिरते हैं।

 

 

ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार, यह इलाक़ा प्राचीन ईलाम देश का एक भाग था कि जो 3000 वर्ष ईसा पूर्व आशूर बानी पाल राजा के हाथों नष्ट कर दिया गया था। बाबुली शिला लेखों में ईलाम को आलातू या आलाम कहा गया है। जिसका अर्थ पहाड़ी इलाक़ा या सूर्य का उदय होने वाला देश है। ईलाम के पतन के कुछ समय बाद, यह पार्सियों और माद के बीच दो भागों में बंट गया।

हख़ामनियों के दौर में यह इलाक़ा हख़ामनी साम्राज्य का भाग था। अरब मुसलमानों की ईरान पर विजय के बाद, संभव है यह इलाक़ा कूफ़ा राज्य का एक भाग बना दिया गया हो। चौथी शताब्दी के आरम्भ से छठी शताब्दी के आरम्भ तक कुर्द परिवार हुस्नूविए ने लोरिस्तान और ईलाम पर शासन किया और 570 से 1006 हिजरी तक अताबकान लोर ने लोरिस्तान और पुश्तकोह पर शासन किया। यहां तक कि शाह अब्बास प्रथम के हाथों अताबकान लोर के अंतिम शासक शाहवरदी ख़ान की हत्या के बाद, इस इलाक़े का शासन शाह अब्बास ने पुश्तकोह के वालियों के प्रथम शासक हुसैन ख़ान को सौंप दिया। ईलाम और पुश्तकोह में वालियों ने लगभग तीन शताब्दी तक शासन किया। हालांकि इलाक़े के सामाजिक जीवन के कारण, वालियों के शासन का कोई स्थायी केन्द्र नहीं था। इस प्रकार से कि शीत ऋतु के तीन महीनों में इराक़ के बाग़शाही और मेसोपोटामिया के हुसैनिया में स्थित था और गर्मी में हीलान और हुसैनाबाद में, जो वर्तमान में ईलाम कहलाता है। इस शासन श्रंखला के अंतिम शासक को 1307 में सत्ता छोड़नी पड़ी, जिसके बाद 1308 हिजरी शम्सी में हुसैनाबाद के नाम से इस इलाक़े की स्थापना की गई। शहरीवर 1314 हिजरी शम्सी में प्राचीन ईलाम की भव्य संस्कृति की याद में हुसैनाबाद गांव का नाम बदलकर ईलाम हो गया और इस गांव को शहर एवं ईलाम प्रांत के केन्द्र में परिवर्तित कर दिया गया।

 

 

ईलाम प्रांत का केन्द्रीय शहर ईलाम पहाड़ों से घिरा हुआ है और इसकी जलवायु संतुलित है। प्राचीन काल में ईलाम अरयूजान के नाम से मशहूर था। वर्तमान समय में ईलाम शहर पश्चिमी ईरान के विकसित शहरों में से एक है और प्राचीन धरोहरों एवं प्राकृतिक सुन्दर दृश्यों के कारण प्रांत का सबसे सुन्दर शहर है। ईलाम के महत्वपूर्ण आकर्षकों में अनेक क़िले, पुरानी चक्कियां, पुल, शिला लेख और मक़बरे हैं। इसके अलावा, अद्वितीय प्राकृतिक दृश्यों जैसे कि अनेक झरनो, गुफ़ाओं, तालाबों, नहरों और घने जंगलों ने इस प्रांत की सुन्दरता में चार चाँद लगा दिए हैं।

ईलाम की अर्थव्यवस्था भी अक्सर पहाड़ी इलाक़ों की भांति कृषि और पशुपालन पर आधारित है।

प्रांत के अधिकांश इलाक़ों में पारम्परिक रूप से कृषि होती है। प्रांत का सबसे महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद गेंहू है। इस प्रांत में भविष्य में कृषि और पशु पालन की काफ़ी संभावनाएं पायी जाती हैं। वर्तमान समय में भी प्रांत के लोगों की आय का मुख्य स्रोत पशुपालन और कृषि है। विविध जलवायु, पहाड़ों, जंगलों, चरागाहों और वसंत एवं गर्मियों में विभिन्न प्रकार के फूल खिलने के कारण इस प्रांत में मधु मक्खी पालन के लिए अच्छी संभावनाएं हैं।

 

 

ईलाम प्रांत में कृषि और पशु पालन की तुलना में औद्योगिक रोज़गार के अवसर बहुत कम हैं। ईलाम प्रांत में उद्योग का बड़ा भाग घरेलू उद्योग और छोटे कारख़ानों से विशेष है। इस इलाक़े में तेल और गैस के भी भंडार हैं।

ईलाम प्रांत क़बायलों का इलाक़ा है, यही कारण है कि यहां हस्तकला का प्रचलन ज़्यादा है। क़ालीन, चटाई, दरी और लकड़ी से बनने वाली चीज़ें ईलाम की महत्वपूर्ण हस्तकलाएं हैं।

 

 

ईलाम प्रांत में कुर्द, फ़ार्स, अरब और लक समुदाय मिलजुलकर रहते हैं। ईलाम प्रांत में 70 प्रतिशत कुर्द भाषा बोली जाती है। प्रांत के अधिकांश भाग में थोड़े बहुत लहजे के अंतर के साथ यह भाषा बोली जाती है। ईलाम का कुर्द लहजा कुर्दी भाषा के लहजों में से एक है जो दक्षिणी कुर्दी, कोलहरी, संजाबी और लकी लहजों की तरह है। इस लहजे को फ़ीली भी कहते हैं। इस लहजे में बात करने वाले अधिकांश लोग ईलाम प्रांत और इराक़ के दक्षिण पूर्वी कुर्द इलाक़ों में रहते हैं।

ईलाम में दूसरे नम्बर पर सबसे अधिक बोला जाने वाला लहजा लक है। लक कुर्द समुदाय का ही एक क़बीला है। यह लोग पूर्वी और दक्षिणी भाग में रहते हैं। प्रांत के दक्षिणी और पूर्वी इलाक़ों में लोरी भाषा बोलने वाले भी रहते हैं। ख़ुज़िस्तान प्रांत से लगने वाले प्रांत के दक्षिणी भाग में अरब बोलने वाले भी काफ़ी कम संख्या में रहते हैं।

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