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बुधवार, 04 नवम्बर 2015 15:03

मस्जिद सुलैमान

मस्जिद सुलैमान

मस्जिद सुलैमान ज़िला ख़ूज़िस्तान प्रांत के उत्तर में ज़ाग्रुस पर्वत श्रंख्ला के दक्षिणी छोर पर स्थित है। ख़ूज़िस्तान प्रांत में सबसे ऊंची चोटी मस्जिद सुलैमान ज़िले में स्थित है। यह चोटी मस्जिद सुलैमान के उत्तर और पूर्वोत्तरी इलाक़े में स्थित है। मस्जिद सुलैमान ज़िले में सबसे ऊंची चोटी ताराज़ है। इसकी ऊंचाई 3300 मीटर है। मस्जिद सुलैमान में सबसे अहम नदी कारून है जो ज़ाग्रुस पर्वत श्रंख्ला से निकलती है और शहीद अब्बासपूर्ण और मस्जिद सुलैमान बांधों से होते हुए मस्जिद सुलैमान शहर के बग़ल से गुज़रती है। मस्जिद सुलैमान में एक और नदी है जिसका नाम तिम्बी है। यह नदी मस्जिद सुलैमान के दक्षिण में बहती है। इस नदी के किनारों पर पार्क बनाए गए हैं जो बहुत ही आकर्षक पर्यटन स्थल समझे जाते हैं।

मस्जिद सुलैमान शहर इस जिले के बीच में स्थित है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 362 मीटर और यह अहवाज़ के 145 मीटर पूर्वोत्तर में स्थित है। मस्जिद सुलैमान शहर 1906 में बसा है। इसी साल तेल की कंपनी ने वहां अपना कार्यालय बनाया और फिर पहला कुआं खोदने के साथ ही अपना काम शुरु किया। तेल की खोज होने तथा अनेक तेल के कुएं खुदने के बाद मस्जिद सुलैमान धीरे-धीरे शहर के रूप में पहचाना जाने लगा। मस्जिद सुलैमान कच्चे तेल के उत्पादन के इलावा इसलिए भी अहम है क्योंकि मस्जिद सुलैमान में इमाम ख़ुमैनी बंदरगाह पर स्थित रासायनिक प्रतिष्ठान के लिए ज़रूरी गैस का भी उत्पादन होता है। तेल की खोज होने के बाद से अब तक मस्जिद सुलैमान में 316 तेल के कुएं खोदे जा चुके हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि मस्जिद सुलैमान ईरान का पहला औद्योगिक शहर है। इसकी दलील यह दी जाती है कि मध्यपूर्व में तेल का पहला कुआं यहीं खोदा गया। मध्यपूर्व की पहली रिफ़ाइनरी और गंधक बनाने और बिजली बनाने का पहला कारख़ाना भी यहीं स्थापित हुआ है। इस वक़्त मस्जिद सुलैमान ईरान के औद्योगिक ध्रुवों में गिना जाता है। मस्जिद सुलैमान में अनेक बड़े औद्योगिक कारख़ाने हैं। जैसे कारून सिमेंट कारख़ाना, ईरान का पहले नंबर पर बिजली का उत्पादन करने वाला बिजलीघर, गैस रिफ़ाइनरी, राज़ी पेट्रोकेमिकल कारख़ाना, अलमूनियम का कारख़ाना और मस्जिद सुलैमान तेल गैस कंपनी। इसके इलावा मस्जिद सुलैमान में आटे, सॉसेज, मैकरोनी, प्लास्टिक, बोरियां बनाने के भी कारख़ाने हैं।

इसके इलावा आपको यह भी बताते चलें कि मस्जिदे सुलैमान का हफ़्तकल इलाक़ा तेल के सोतों से संपन्न होने के कारण बहुत अहम है। हफ़्तकल दक्षिणी ईरान में तेल का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। यह मस्जिद सुलैमान से 80 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। इस इलाक़े में 1306 हिजरी शम्सी में तेल की खोज हुयी और तेल निकलने का काम शुरु हुआ।

ख़ूज़िस्तान प्रांत में तेल से समृद्ध एक और इलाक़ा है जिसका नाम नफ़्त सफ़ीद है। यह इलाक़ा मस्जिद सुलैमान से 72 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। चूंकि इस इलाक़े में एक सोते से बिना रंग का तेल निकलता है इसलिए इसे नफ़्त सफ़ीद कहते हैं। इस इलाक़े के कुओं से निकलने वाली प्राकृतिक गैस मस्जिद सुलैमान में निकलने वाली गैस से ज़्यादा अच्छी मानी जाती है।

मस्जिद सुलैमान ज़िला ज़ाग्रुस पर्वत श्रंख्ला के पड़ोस में स्थित है इसलिए इसके उत्तरी इलाक़े पानी और उचित जलवायु से समृद्ध हैं। जिन दिनों बख़्तियारी बंजारा क़बीले, मस्जिद सुलैमान के पहाड़ों की ओर ठंडक के ज़माने में पलायन करते हैं तो वह दृष्य देखने योग्य होता है। इसके इलावा मस्जिद सुलैमान में टीले, क़िले और इमामज़ादों के मक़बरे जैसे बहुत से ऐतिहासिक अवशेष हैं कि जिनमें से कुछ अहम अवशेषों से आपको परिचित कराएंगे।           

मस्जिद सुलैमान ज़िले का एक ऐतिहासिक स्थल एक उपासना स्थल है जिसे सर मस्जिद कहते हैं। यह उपासना स्थल मस्जिद सुलैमान के पूर्वोत्तर में स्थित है। बहुत पहले इस उपासना स्थल में आग जलती थी। यह इमारत 7 शताब्दी ईसापूर्व पुरानी है। इस वक़्त इस इमारत के टूटे हुए खंबे, पत्थर से बनी दीवार के कुछ हिस्से और ताक़ बाक़ी बचे हैं।

बर्द निशान्देह प्राचीन टीला भी विशेष अहमियत रखता है। यह टीला मस्जिद सुलैमान बांध के मार्ग पर शहर से दस किलोमीटर की दूरी पर है। इस टीले पर मौजूद अवशेष हख़ामनेशी काल की हैं। विदित रूप से इस टीले पर प्राचीन अग्निकुन्ड था। इस टीले से सिक्के और मिट्टी के बर्तन बरामद हुए हैं।

कल्गे ज़र्रीन नामक एक और प्राचीन टीला है जो मस्जिद सुलैमान शहर के दक्षिण में सबसे पुराने मुहल्ले में स्थित है। इस टीले से प्रतिमाएं और शिलालेख और दूसरे अवशेष बहुत बड़ी तादाद में बरामद हुए हैं।

मस्जिद सुलैमान के ऐतिहासिक अवशेषों के इलावा, इस ज़िले में उस तेल की कंपनी के प्रतिष्ठान देखने योग्य है जिसने सबसे पहला तेल का कुआं इस इलाक़े में खोदा था। ईरान में तेल के पहुले कुएं के पास तेल की कंपनी द्वारा रिफ़ाइनरी, मार्ग और पुलों के निर्माण, ईरान में तेल की पैदावार और उसके इस्तेमाल की कहानी सुनाते हैं। ये स्थल आम लोगों के देखने के लिए खुले रहते हैं।

मस्जिद सुलैमान में 2 म्यूज़ियम भी हैं। पहला म्यूज़ियम मूज़े नफ़्त अर्थात तेल का म्यूज़ियम कहलाता है। इस म्यूज़ियम में इस शहर में तेल की खोज के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण और विभिन्न प्रकार के तेल के नमूने संपूर्ण जानकारी के साथ रखे हुए हैं। दूसरा म्यूज़ियम मानव शास्त्र का है। यह म्यूज़ियम मस्जिद सुलैमान शहर के कल्गे इलाक़े में कल्गे ज़र्रीन नामक प्राचीन टीले के पास स्थित है। इस म्यूज़ियम में ईरान की विभिन्न जातियों के कपड़े, संस्कृति और हस्तकला उद्योग के नमूने रखे हुए हैं।        

कार्यक्रम के इस भाग में आपको ईरान में पर्यटन के सबसे आकर्षक इलाक़ों में से एक इलाक़े कर्ख़े के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। कर्ख़े नेश्नल पार्क अन्दीमश्क ज़िले के दक्षिण और ख़ूज़िस्तान प्रांत के उत्तर में स्थित है। कर्ख़े नेश्नल पार्क पर्यावरण की नज़र से बहुत अहमियत रखता है। इसी प्रकार यह ईरान के महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों में है।

कर्ख़े नेश्नल पार्क 130 वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा क्षेत्रफल पर फैला है। इसके दो भाग हैं एक संरक्षित और दूसरा जंगली जानवरों का शरण स्थल। कर्ख़े नेश्नल पार्क में कर्ख़े नाम की एक नदी बहती है जिसके दोनों ओर जंगल हैं। कर्ख़े नेश्नल पार्क, पानी की बहुतायत, उपजाऊ ज़मीन, गर्म क्षेत्रों की विशेषताओं एवं अन्य प्राकृतिक क्षमताओं के मद्देनज़र हमेशा हुकूमतों के ध्यान का केन्द्र रहा है और पूरे इतिहास में यह विभिन्न सभ्यताओं का स्थल रहा है। कर्ख़े नेश्नल पार्क में गर्म और अर्ध गर्म इलाक़ों जैसी वनस्पतियां पायी जाती हैं।

कर्ख़े नेश्नल पार्क पानी और खाद्य पदार्थ की बहुतायत, घने पेड़ों और सुरक्षित स्थल होने के मद्देनज़र विभिन्न प्रकार के प्राणियों के रहने का स्थल है। कर्ख़े नेश्नल पार्क में विभिन्न प्रकार के जानवर और वनस्पतियां पायी जाती हैं। दुनिया में दुर्लभ फ़ालो-डियर सिर्फ़ कर्ख़े नेश्नल पार्क में पाया जाता है। जंगली बिल्ली, सेबल, लोमड़ी, भेड़िया, सियार, लकड़बग्घा, साही, जंगली सूअर, और ख़रगोश भी इस नेश्नल पार्क में मौजूद हैं। ईरान में मौजूद परिन्दों की आधी प्रजातियां कर्ख़े नेश्नल पार्क में दिखाई देती हैं। कुछ ठंडी के तो कुछ गर्मी के मौसम में कर्ख़े नेश्नल पार्क की ओर पलायन करती हैं। इराक़ी बैब्लर उन दुर्लभ परिन्दों में है जो कर्ख़े नेश्नल पार्क में पाए जाते हैं। इस नेश्नल पार्क में फ़्रैन्कोलिन और पेन्डुक बहुत ज़्यादा पायी जाती है।

मुर्ग़ाबी, कलहंस, सारस, शिकारी परिन्दे, पेलिकन, जंगल में झाड़ियों और पेड़ों पर रहते हैं और ठंडक का मौसम गुज़ारते हैं।

कर्ख़े नदी में विभिन्न प्रकार की मछलियां भी पायी जाती हैं जो स्थानीय लोगों के खाने के काम आती है। 

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