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रविवार, 27 सितम्बर 2015 14:55

ख़ुर्रमशहर

ख़ुर्रमशहर

ख़ुर्रमशहर आज़ादी के मतवालों, प्रतिरोध का प्रतीक और खजूर के ऊंचे ऊंचे बाग़ों का शहर है। ऐसा शहर कि यदि इसकी गलियों और सड़कों के ज़बान होती तो इराक़ के बासी शासन के अतिक्रमणकारी सैनिकों से ख़ुर्रमशहर के वीर सपूतों की गलियों में आमने सामने लड़ाई की गाथा सुनातीं। ऐसा शहर कि जिसे ईरान के ख़िलाफ़ विश्व साम्राज्य और सद्दाम द्वारा थोपी गयी जंग में बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुंचा। यह वह शहर है जो 19 महीने तक इराक़ी सेना के अतिग्रहण में रहने के बाद ईरान के वीर सपूतों के ऐसे बलिदान से आज़ाद हुआ जिसकी मिसाल नहीं मिलती।

 

 

ख़ुर्रमशहर ज़िला राजधानी तेहरान से 994 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह ख़ूज़िस्तान प्रांत के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर चौरस भूमि का इलाक़ा है। यह अर्वन्द रूद और कारून नदी के संगम के पास इक्वेटर लाइन के क़रीब स्थित है। ख़ुर्रमशहर ज़िले के उत्तर में अहवाज़ ज़िला, पूरब में शादगान ज़िला, दक्षिण में आबादान ज़िला और फ़ार्स की खाड़ी तथा पश्चिम में इराक़ स्थित है। ख़ुर्रमशहर समुद्र की सतह से 3 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इराक़ और सऊदी अरब के ख़ुर्रमशहर से क़रीब होने के कारण यहां की जलवायु, इन देशों से बहने वाली गर्म और शुष्क हवाओं से प्रभावित रहती है। ख़ुर्रमशहर में आर्द्रता साल के सभी मौसम में ज़्यादा रहती है और इसका कारण अर्वन्द रूद और फ़ार्स की खाड़ी से ख़ुर्रमशहर की निकटता है। ख़ुर्रमशहर ज़िले में खजूर और सिस्ट्रस फल कृषि उत्पाद हैं।

 

 

इस इलाक़े में पशुपालन का भी रिवाज है। दुग्ध उत्पाद, खाल और ऊन पशु से मिलने वाले उत्पाद हैं। इस ज़िले के कुछ गावों में अबा, अर्थात धर्मगुरुओं द्वारा पहने जाने वाला लबादा, जाजीम और चटाई की बुनाई होती है। आपको यह भी बताते चलें कि ख़ुर्रमशहर के ज़्यादातर गांवों में अरबी बोली जाती है। किन्तु इस इलाक़े में रहने वाले ईरानी, फ़ारसी और अरबी दोनों ज़बान में बात करते हैं। सुर्क़ बंदरगाह ख़ुर्रमशहर का ऐतिहासिक स्थल है जहां से शीशे और मिट्टी तथा हाथ की बनी चीज़ें निर्यात की जाती हैं। नया और पुराना पुल, नौका विहार की जेटी, मछुवारों का बज़ार, रेड क्रेसेंट की इमारत, फ़ीलिया महल, प्रतिरोध की प्रतीक जामा मस्जिद ख़ुर्रमशहर के दर्शनीय स्थल हैं।  

 

 

 

बंदरगाही शहर ख़ुर्रमशहर, ख़ूज़िस्तान प्रांत के केन्द्र अहवाज़ शहर से 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कारून नदी ख़ुर्रमशहर से गुज़रती है और इस शहर को पूर्वी और पश्चिमी भाग में बांटते हुए अर्वन्द नदी से मिल जाती है। लगभग 400 मीटर चौड़ाई में फैले खजूर के पेड़ों की बेल्ट शहर को अन्य क्षेत्रों से अलग करती है।

 

ख़ुर्रमशहर 12वीं हिजरी क़मरी में एक छोटा सा गांव था जो 13वीं शताब्दी के शुरु में एक अहम बंदरगाह बन गया। ख़ुर्रमशहर अपनी स्ट्रेटिजिक स्थिति के मद्देनज़र ध्यान का केन्द्र रहा और कई बार विदेशी सेना के अतिग्रहण में आया और फिर आज़ाद हुआ। ब्रिटेन ने 1875 में, उस्मानी शासन ने 1883 और इराक़ की बासी सेना ने 1980 में ख़ुर्रमशहर का अतिग्रहण किया था। ख़ुर्रमशहर का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा पड़ा है जिससे इस इलाक़े की भौगोलिक एवं स्ट्रेटिजिक अहमियत का अंदाज़ा होता है।

 

 

उन्नीसवीं सदी में तेल की खोज और आबादान रिफ़ाइनरी के पड़ोस में इसकी स्थिति से ख़ुर्रमशहर की अहमियत बढ़ गयी जिससे इस शहर के विकास में मदद मिली।

 

ख़ुर्रमशहर की पहली विशाल जेटी का उद्घाटन 1308 हिजरी शम्सी में पानी के पहले एक अंतरमहाद्विपीय जहाज़ के लंगरअंदाज़ होने के साथ हुआ। अर्वन्द नदी के तट पर 6 और बड़ी जेटियों के निर्माण से इस बंदरहगाह ने दूसरे विश्व युद्ध में घटक सेना की जीत में बहुत बड़ा योगदान दिया।

 

ईरान के ख़िलाफ़ सद्दाम द्वारा थोपी गयी जंग से पहले आज़ाद जलमार्ग से संपर्क तथा भौगोलिक एवं वाणिज्यिक स्थिति के मद्देनज़र ख़ुर्रमशहर में कंपनियों ने बहुत ज़्यादा पूंजिनिवेश किया था। देशी-विदेशी कंपनियों के ऑफ़िस और जहाज़रानी की कंपनियों की उपस्थिति से ख़ुर्रमशहर अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह बन गया था। लेकिन 1980 में सद्दाम द्वारा थोपी गयी जंग के कारण इस ज़िले को बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुंचा। किसी ज़माने में ख़ुर्रमशहर को ख़ूज़िस्तान प्रांत के शहरों की दुल्हन कहा जाता था। अलबत्ता ईरानी सैनिकों और आम जवानों ने कम से कम संभावनाओं के साथ दुश्मन से आख़िरी लम्हे तक लड़ायी की और अपने अमर बलिदान से इस शहर की आज़ादी की अमर गाथा लिखी।

 

 

इराक़ के बास शासन को साम्राज्यवादी ताक़ों का बड़ा समर्थन हासिल था। इन ताक़तों ने सद्दाम शासन को सिर से पैर तक हथियार से लैस किया और आधुनिकतम प्रौद्योगिकी की भी मदद दी। इसी प्रकार साम्राज्यवादी ताक़तें ईरानी सैनिकों की हर प्रकार की गतिविधियों के बारे में सैटलाइट से जासूसी करतीं और उनकी जानकारी इराक़ को देती थीं। इस आधार पर साम्राज्यवादी ताक़तों को उनके सैन्य समीकरण के मद्देनज़र ख़ुर्रमशहर की आज़ादी नामुमकिन लग रही थी। यहां तक कि सद्दाम ने दावा किया था कि अगर ईरानी सैनिक ख़ुर्रमशहर को आज़ाद करा लें तो बसरे की चाभी उनके हवाले कर दी जाएगी। लेकिन ईरान की वीर सेना ने बलिदानी जनता के सहयोग से जटिल सैन्य रणनीति अपनाकर इराक़ के अतिक्रमणकारी बासी शासन को हार का मज़ा चखाया और एक तेज़ एवं ऐतिहासिक कार्यवाही के ज़रिए 24 जून 1982 को ख़ुर्रमशहर की नाकाबंदी तोड़ कर दुनिया वालों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

 

ख़ुर्रमशहर की आज़ादी की ख़बर जैसे ही ईरान रेडियों से प्रसारित हुयी, ईरानी जनता ख़ुशी से झूम गयी। आज ख़ुर्रमशहर का पूरी तरह पुनर्निर्माण हो चुका है और इस शहर में जंग का म्यूज़ियम भी बनाया गया है।   

       

वैज्ञानिकों की नज़र में तालाब ज़मीन के हवाई थैलों की तरह हैं जिन पर बहुत से प्राणियों की ज़िन्दगी निर्भर होती है। जिस तरह इन्सान को अपनी ज़िन्दगी के लिए ख़ून की नसों और फेफड़ों की ज़रुरत होती है, नदियां और तालाब भी ज़मीन की नसें और फेफ़ड़ों की तरह हैं और इनका वजूद ज़िन्दगी के लिए ज़रूरी है। शादगान अंतर्राष्ट्रीय तालाब इसी प्रकार के तालाब का एक नमूना है जो 296 हज़ार हेक्टर के क्षेत्रफल पर फैला हुआ है। इस तालाब में पतझड़प के मौसम में उत्तरी यूरोप, कैनडा और साइबेरिया से पलायन करने वाले परिन्दों का तांता बंधा रहता है। इस तालाब में मीठे और खारे पानी में पायी जाने वाली और इक्वेरिम में सजाने वाली मछलियां रहती हैं। इसी प्रकार फ़लैमिन्गो, सारस, जंगली सहित विभिन्न प्रकार की मुर्ग़ाबियां, बत्तख़ और सफ़ेद पेलिकन, सारस जैसे परिन्दे, स्तनधारी जीव में जंगली बिल्ली, सूअर, सियार और लोमड़ी पाई जाती हैं। शादगान अंतर्राष्ट्रीय तालाब अकेला ऐसा तालाब है जहां मार्बल्ड डक अर्थात मरमरी बत्तख़ अंडे देती और सेती है। इसी प्रकार अफ़्रीकी सारस की प्रजाति एक दुर्लभ परिन्दा आइबिस भी इस तालाब में रहता है। इसी प्रकार एक और दुर्लभ परिन्दा कर्लू भी इसी तालाब में रहता है। सबसे अहम बिन्दु आपको बताते चलें कि वे प्राणी या वनस्पतियां जो लुप्त होने की कगार पर हैं, उनका एक तिहाई हिस्सा शादगान अंतर्राष्ट्रीय तालाब में पाया जाता है। इस तालाब के आस-पास के सौ से ज़्यादा गावं के लोग खेती के लिए पानी और चारे भी इसी तालाब से हासिल करते हैं। इस तलाब की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत अहमियत है। 

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