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सोमवार, 11 अप्रैल 2016 23:30

आतंकवाद से संघर्ष का दावा करने वाली शक्तियां सच्ची नहीं हैं

आतंकवाद से संघर्ष का दावा करने वाली शक्तियां सच्ची नहीं हैं
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने क़ज़ाक़िस्तान के राष्ट्रपति से मुलाक़ात में कहा है कि अमरीका और आतंकवाद से संघर्ष का दावा करने वाली शक्तियां अपने दावे में सच्ची नहीं हैं।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने नूर सुल्तान नज़र बायेफ़ से मुलाक़ात में राजनैतिक, आर्थिक व अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रों और इसी प्रकार आतंकवाद से संघर्ष के मैदान में दोनों देशों के सहयोग में विस्तार की ज़रूरत की ओर संकेत किया और कहा कि कुछ बड़े देश विशेष कर अमरीका, आतंकवाद से संघर्ष करने के अपने दावे में सच्चे नहीं हैं लेकिन इस्लामी देश, सच्चे ढंग से सहयोग करके इस्लामी जगत से इस ख़तरे को दूर कर सकते हैं। उन्होंने अमरीका की ओर से इराक़ में दाइश की सहायता को, आतंकवाद से संघर्ष के लिए बनने वाले विभिन्न गठजोड़ों के झूठ का एक उदाहरण बताया और कहा कि वे अपने दोहरे रवैये का औचित्य दर्शाने के लिए आतंकवाद को, अच्छे और बुरे जैसे दो प्रकारों में बांटते हैं। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने यूरोप में आतंकी कार्यवाहियां करने वालों की यूरोपीय नागरिकता और इराक़ व सीरिया में उनकी बड़ी संख्या में उपस्थिति की ओर संकेत करते हुए कहा कि इन बातों से पता चलता है कि पश्चिम विशेष कर अमरीका, आतंकवाद से संघर्ष में गंभीर नहीं है।

इस मुलाक़ात में क़ज़ाक़िस्तान के राष्ट्रपति नूर सुल्तान नज़र बायेफ़ ने ईरान को अपने देश का एक बड़ा और भरोसे योग्य पड़ोसी बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को विस्तृत करने की अपार संभावनाएं हैं और उनकी इस यात्रा मेंं अनेक महत्वपूर्ण बातों पर सहमति हुई है। उन्होंने आतंकवाद को क्षेत्र और संसार के लिए गंभीर ख़तरा बताया और पश्चिमी में घटने वाली हालिया आतंकी घटनाओं तथा इन घटनाओं के बहाने इस्लाम को आतंकवाद का समर्थक बताने के पश्चिम वालों के प्रयास की ओर संकेत करते हुए कहा कि यह क्षेत्र की क़ानूनी सरकारों के विरुद्ध पश्चिमी शक्तियों की कार्यवाही का परिणाम है क्योंकि जब किसी देश में स्थिर केंद्रीय सरकार को समाप्त कर दिया जाता है तो आतंकवाद उसका स्थान ले लेता है। (HN)

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