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सोमवार, 30 मार्च 2015 16:46

अंधेरे में देखना अब असंभव नहीं!

अंधेरे में देखना अब असंभव नहीं!

हम सभी को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ जाता है, जब बिजली गई हुई हो, और आप अंधेरे कमरे में टटोलते हुए किसी सोफे से जा टकराएँ, ऐसे में पैरों में बहुत दर्द होता है। लेकिन अब यह अंधेरा समाप्त होने वाला है और आप अब अंधेरे में किसी भी चीज़ से नहीं टकराएंगे।

अमेरिका के एक जैव हैकर समूह ने ऐसा रास्ता खोज निकाला है जिसके माध्यम से इंसान की आंखों को रात के घुप्प अंधेरे में 50 मीटर तक देखने में सक्षम बनाया जा सकता है।

अमेरिका के राज्य कैलिफोर्निया से संबंधित समूह साइंस फॉर दी मासज़ (विज्ञान जनता के लिए) इस काम के लिए क्लोरीन e6 नामक रसायन का इस्तेमाल किया, जो समुद्र की अत्यधिक गहराई में रहने वाली मछलियों के अंदर पाया जाता है, और कभी कभी इसका इस्तेमाल रात में कम दिखाई देने वालों के उपचार के लिए किया जाता है।

 

टीम ने अपने साथी शोधकर्ता गेबरेयल लीसीना की आंखों को पहले पूरी तरह से धोकर साफ किया और उसके बाद उनकी आँखों में ट्यूब के माध्यम से क्लोरीन e6, सलाईन (चिकित्सा नमक), इंसुलिन, और डाई मीथाइल सल्फ़ाकसाईड की बेहद थोड़ी मात्रा डाली।

 

गेबरेयल का कहना था कि रासायनिक चीज़ों के आंखों में पड़ते ही उसकी दृष्टि हरे और काले रंग से भर गई, लेकिन फिर यह सामान्य हो गई।

 

रसायन का गेबरेयल की आंखों के पर्दे (रेटीना) तक पहुंच जाने के बाद टीम ने गेबरेयल को एक अंधेरे क्षेत्र में ले गई और वहां जो हुआ उसने टीम को आश्चर्यचकित और खुशी से भर दिया।

आरंभ में लीसीना 10 मीटर की दूरी वाली चीज़ें पहचानने में सफल रहे, लेकिन थोड़ी देर बाद उन्हें दूर मौजूद नंबर और अक्षर भी दिखने लगे, जबकि वह चलती फिरती चीज़ों को भी आसानी से देख पा रहे थे।

 

एक और टेस्ट में 50 मीटर दूर पेड़ों के बीच खड़े हुए लोगों को भी आसानी से पहचानने में सफल रहे, अगली सुबह तक उनकी दृष्टि सामान्य हो चुकी थी, जबकि कोई साइड इफ़ेक्ट का अब तक सामने नहीं आया है।

 

लेकिन शोध करने वाली टीम ने उसे अंतिम परीक्षण क़रार नहीं दिया है  और उनके अनुसार अभी और कई परीक्षण बाकी हैं, क्योंकि कृत्रिम आंख की देखने की क्षमता बढ़ाना हानिकारक हो सकता है।

 

अगर यह प्रयोग बड़े पैमाने पर सफल रहता है, तो यह एक क्रांतिकारी अनुसंधान होगा, इस समय रात में देखने के उपकरण (नाइट विजन सिस्टम) बहुत महंगे हैं और हर किसी की पहुंच में नहीं हैं, लेकिन हो सकता है कि अगले कुछ वर्षों में रात में देखना दिन में देखने की तरह आम बात हो? (RZ)

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