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शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2015 02:26

मिना घटना के लिए सऊदी सरकार माफ़ी मांगें, वरिष्ठ नेता

गुरुवार 24 सितंबर 2014 की इस तस्वीर में, सऊदी अरब के मिना में मची भगदड़ में हताहत होने वाले हाजियों के शव. खाली बोतलों और सामान के आस-पास पड़ा है। इस तस्वीर को देख कर समझा जा सकता है कि सऊदी सरकार हाजियों के प्रति कितनी संवेदनशील है? गुरुवार 24 सितंबर 2014 की इस तस्वीर में, सऊदी अरब के मिना में मची भगदड़ में हताहत होने वाले हाजियों के शव. खाली बोतलों और सामान के आस-पास पड़ा है। इस तस्वीर को देख कर समझा जा सकता है कि सऊदी सरकार हाजियों के प्रति कितनी संवेदनशील है?

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि हज के दौरान मिना में ‘रमये जमरात’ संस्कार को अंजाम देते वक़्त घटी घातक घटना पर सऊदी सरकार को अपनी ज़िम्मेदारियों से दामन छुड़ाने के बजाए माफ़ी मांगनी चाहिए।

 

रविवार को धर्मगुरुओं के एक समूह ने वरिष्ठ नेता से तेहरान में मुलाक़ात की। इस अवसर पर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने कहा कि इस्लामी जगत के मन में इस संदर्भ में कई सवाल उठ रहे हैं और सऊदी सरकार, ज़िम्मेदारी क़ुबूल करने से भागने के बजाए दुखी परिवारों और इस्लामी जगत से इस घातक घटना पर माफ़ी मांगते हुए अपनी ज़िम्मेदारी क़ुबूल करे।

 

उन्होंने ईदुल अज़्हा के मौक़े पर मिना में घटी हृदय विदारक घटना की ओर इशारा करते हुए कि जो ईद के मौक़े पर शोक का जुलूस बन गयी, कहा कि कोई भी इंसान इस दुखद घटना से ख़ुद को अलग नहीं कर सकता और हमारे तथा मुसलमानों के मन पर पिछले कुछ दिन से इस दुख का बोझ है।

 

वरिष्ठ नेता ने सऊदी सरकार की मिना घटना पर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश को यह कहते हुए निष्प्रभावी क़दम बताया, “मुस्लिम जगत के मन में बहुत से सवाल उठ रहे हैं और 1000 से ज़्यादा लोगों की इस घटना में मौत, छोटी बात नहीं है। इसलिए इस्लामी जगत को इस समस्या का हल निकालना चाहिए।”

 

वरिष्ठ नेता ने बल दिया कि मिना की घटना मुसलमान राष्ट्र नहीं भुला सकता बल्कि इस पर ध्यान केन्द्रित करेगा। उन्होंने कहा, “एक दूसरे की गर्दन पर ज़िम्मेदारी डालने के बजाए सऊदी अधिकारियों को अवश्य अपनी ज़िम्मेदारी क़ुबूल करते हुए दखी इस्लामी जगत और परिवारों से माफ़ी मांगनी चाहिए।”

 

ज्ञात रहे 24 नवंबर को मिना में भगदड़ का कारण यह था कि सऊदी प्रशासन ने आले सऊद परिवार के कुछ अधिकारियों की मेना में उपस्थिति के कारण, बिना सोचे समझे और बिना समन्वय के उन मार्गों में से एक मार्ग को बंद कर दिया जो हज के संस्कार ‘रमये जमरात’ के अंजाम देने के स्थल की ओर जाता था। इसके नतीजे में कई ओर से हाजी एक दूसरे से टकरा गए। भीड़ बढ़ने के कारण मुसलमानों का यह महा पर्व शोक का जुलूस बन गया।

 

सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस घटना में मरने वालों की संख्या 770 बतायी है जबकि ईरान के हज व दर्शन विभाग के प्रमुख सईद ओहदी ने सऊदी सूत्रों के हवाले से कहा कि इस घटना में 2000 के क़रीब हाजी हताहत हुए हैं।

 

इस घटना में 140 ईरानी हाजी हताहत और 102 घायल हुए हैं जबकि सैकड़ों अभी भी लापता बताए जाते हैं। (MAQ/N) 

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