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श्रोताओ का पत्र
श्रोताओं की आवाज़ (राज कुमार वानकेड़े)
नबी-नबी-नबी-नबीचमन-चमन की दिलकशी गुलों की है वो ताज़गीहै चाँद जिससे शबनमी, वो कहकशां की रोशनीफ़ज़ाओं की वह रागिनी हवाओं की वह नग़मगीहै कितना प्यारा नाम भी नबी-नबी-नबी-नबी। ये किसके रोने …
मंगलवार, 04 अक्तूबर 2011 17:16

सुप्रिया राज का पत्र

शर्मिन्दा क्यों?क्यों शर्मिंदा होता है,किसका सोचा होता है।आगे-पीछे देख के चल,रस्ता अन्धा होता है।उससे कितना लड़ते थे,अब पछतावा होता है।दुनिया कितनी पापी है,अब अन्दाज़ा होता है।सुप्रिया राज,सिद्धार्थ रेडियो श्रोता संघ, …
मंगलवार, 04 अक्तूबर 2011 17:15

शंकरलाल जयस्वाल का पत्र

रेडियो तेहरान से प्यारज़िंदगी जब तक रहेगी,फ़ुरसत न मिलेगी काम से,कुछ समय ऐसा भी निकालो,प्यार कर लो रेडियो तेहरान सेशंकरलाल जयस्वाल,ग्राम व पोस्ट येताला, तहसील धर्माबाद,ज़िला नान्देड़, महाराष्ट्र-431809
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