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मंगलवार, 05 जनवरी 2016 12:36

डाॅ हेमन्त कुमार

डाॅ हेमन्त कुमार

बेटी बचायें अपने माता-पिता का स्वाभिमानएक बार दो Lovers गार्डन में बैठे थे,लड़का बोला – “हमारा भविष्य क्या है ?”लड़की – “शादी…”लड़का – “पर तुम्हारें माँ-बाप नहीं मानेगे…, इसलिए चलो भाग कर शादी कर लेते है !!!”लड़की (गुस्से में) – आज बोल दिया तो बोल दिया,अब कभी बोलना मत,शादी ना हो सके तो ना सही,पर “भ्रूण हत्या” की भागीदार मैं नहीं बनना चाहती….लड़का – “इस में “भ्रूण हत्या” कैसे हुई ?”.लड़की – “एक पिता अपनी बेटी को बेटे से ज्यादा प्यार करता है,लेकिन कोई लड़की घर से भाग करसमाज के खिलाफ,अपने माता-पिता के खिलाफशादी कर लेती है तो, उसके कारण कितनी ही लड़कियों की हत्या उनके जन्म होने से पहले ही कर दी जाती है,माँ-बाप को बेटी नहीं चुभती है,बड़ी होकर कही कलंक का कारण न बान जायेवह बात चुभती है ”

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