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रविवार, 12 जुलाई 2015 15:54

Media Team Of IKYB India

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अमरोहा, 10 जुलाई 2015: आज कुद्स डे के मौके पर शहज़ाद आब्दी ने मुस्लिम देशों के शासकों जो अधिकतम पश्चिम पर निर्भर हैं, के मौन की ओर इशारा ककरते हुऐ कहाः इस साल कुद्स दिवस पर हिंदुस्तान में हम सह्यूनी शासन से अपनी नफ़रत का इज़हार करते है और शिया व सुन्नी एक राष्ट्रव्यापी आवाज के साथ अपने गुस्से को ग़ाज़ा अपराधों के खिलाफ व्यक्त करते हैं।   शहज़ाद आब्दी उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी युथ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हैं और एक सामाजिक संगठन इमाम खुमैनी युथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।  इन्होंने ग़ाज़ा में नरसंहार की निंदा करते हुऐ कहाः ग़ाज़ा में फ़िलिस्तीनियों की हत्या पर विश्व समाज द्वारा कोई गंभीर प्रतिक्रिया न व्यक्त करना अमेरिकी सरकार और कुछ पश्चिमी देशों का इसराइल के नकली शासन को समर्थन देने का परिणाम है।   उन्होंने गाजा में मौजूदा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका के बारे में कहाः विश्व समूदाय विशेष रूप से विश्व राष्ट्र संघ और यूरोपी संघ गाजा के रक्षाहीन लोगों की हत्या पर चुप रह कर उन्हें धोखा दे रहे हैं। दुर्भाग्य से,यह  सरकारें केवल उस समय तत्काल हस्तक्षेप करती हैं जब कि अपने हितों को ख़तरे में देखती हैं वे लोग सीरिया में हस्तक्षेप करते हैं ता कि अपनी विरोधी सरकार गिरादें वे बहरीन और मिस्र में हस्तक्षेप करती हैं ता कि अपने स्वयं के लक्ष्य का पीछा कर सकें, वे अफगानिस्तान में दाख़िल हो जाते हैं ता कि अपने हितों की रक्षा करें, लेकिन गाजा के खिलाफ अपराधों पर हड़पनेवाले यहूदी शासन का स्पष्ट रूप से समर्थन करते हैं। आब्दी ने कहाः यहूदी शासन ने पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित,फिलिस्तीन में नरसंहार को अपना लिया है लेकिन दुर्भाग्य से इस्लामी और अरबी देशों के अधिकारियों ने केवल बयान के अलावा किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया।   शहज़ाद आब्दी ने गाजा में इजरायली आक्रामकता के प्रति इतने सारे इस्लामी देशों के मौन की निंदा करते हुऐ कहा: ईरान को छोड़कर अधिकतर इस्लामी देशों के शासक पश्चिम से संबद्धित हैं और कोई प्रभावी कार्रवाई की ताक़त नहीं रखते; केवल सह्यूनी शासन की निंदा में जारी बयान पर्याप्त नहीं है बल्कि साहस और सह्यूनी शासन के अत्याचारों को रोकने के लिए कार्रवाई करने की क्षमता की आवश्यकता है।   उन्होंने कहा कि इसराइल ने सीरिया, हिजबुल्लाह, हमास की ताकत को कमजोर करने के लिए गाजा के लोगों को लक्षित किया है और मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड की सरकार को गिराया जाना तथा इस्लामी देशों में आपस में युद्ध कराना इसी संदर्भ में है। उन्हों ने इस्लामी राष्ट्र में एकता की कमी बताया और कहाः मुस्लिम देशों को एकजुट होना चाहिए और जब तक यह एकता नहीं होगी मुस्लिम उम्मा की समस्या जारी रहेंगी।    उन्होंने कहा कुद्स डे  के पहचनवाने में इमाम खुमैनी (र।)की दृष्टि कारण बनी कि आज दुनिया भर के लोग फिलीस्तीन और ग़ाज़ा के मुद्दे से अधिकतम ज्ञान रखते हैं।शहज़ाद आब्दी ने मीडिया और सामाजिक नेटवर्क की भूमिका को कुद्स दिन के परिचय में महत्वपूर्ण बताया।     अपने भाषण के अंत में, उन्होंने आशा व्यक्त की कि हमास आंदोलन अपने प्रतिरोध के साथ यहूदी शासन को अपनी हार को दोहराने पर बाध्य करेगा।

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