यह वेबसाइट बंद हो गई है। हमारी नई वेबसाइट हैः Parstoday Hindi
रविवार, 06 मार्च 2016 20:31

सऊदी अरब ने हिज़्बुल्लाह को क्यों आतंकवादी कहा?

सऊदी अरब ने हिज़्बुल्लाह को क्यों आतंकवादी कहा?

 

 

 

 

आज कल आतंकवाद और आतंकवादी शब्द इतना अधिक सुनायी देता है कि अगर किसी दिन खबरों में हम आतंकवाद का शब्द न सुनें तो लगता है कि जैसे कुछ कमी रह गयी हो।

 

आतंकवाद का अर्थ भी आतंकवादियों की तरह ही अलग- अलग होता है। यह सब कुछ लिखने से पहले मैंने सोचा कि शुरु में ज़रा आतंकवाद के अर्थ पर बात कर ली जाए मगर सच पूछें तो मुझे काफी परेशानी हुई क्योंकि , भाषा व ज्ञान कोषों को खंगालने के बाद इस के जो भी अर्थ निकले वह आतंकवादियों पर फिट नहीं बैठे।

 

अब आप ही सोचें, एक व्यक्ति अपने शरीर पर बम बांधता है और लोगों की भीड़ में या पुलिस वालों के बीच स्वंय को धमाके से उड़ा लेता है, कुछ लोग उसे आतंकवादी कहते हैं और कुछ जेहादी!

 

एक व्यक्ति पिस्तौल निकाल कर कुछ सरकारी अधिकारियों को मार देता है, सरकार उसे आतंकवादी घोषित करके फांसी देती है मगर कुछ लोग उसे शहीद कह कर श्रद्धाजंलि अर्पित करते हैं।

 

दर अस्ल यह नज़रिये का फर्क है, अगर कोई आप के फायदे के लिए अपनी जान देता है तो वह शहीद और जेहादी है और अगर कोई आप को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी जान देता है तो वह आतंकवादी है। मेरे ख्याल में इस आधार पर हम आतंकवाद का अर्थ खोजने में सफल हो गये हैं। आतंकवाद यानी आप के हितों के खिलाफ कार्यवाही!

 

विश्वास न हो तो देख लें! सब से पहले महाशक्ति से आरंभ करते हैं, जी हां वही अमरीका। अगर किसी देश की सरकार, अमरीका की घटक है तो उस सरकार के विरुद्ध काम करने वाले आतंकवादी हैं और अगर किसी देश की सरकार अमरीका की विरोधी है तो फिर उस सरकार के विरुद्ध काम करने वाले स्वतंत्रता प्रेमी या आजकल के फैशन के हिसाब से जेहादी हैं।

 

दुनिया के हर देश के अपने राष्ट्रीय नायक हैं जिन्हें अपने देश से विदेशियों को भगाने के लिए अपनी जान दी और क़ब्ज़ा करने वालों की जान ली है, वह सब नायक हैं, लेकिन फिलिस्तीनी यदि अपने देश की आज़ाद कराने के लिए लड़ें तो उन्हें यह सारे देश आतंकवादी कहते हैं।

 

बहरैन में कुछ लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं, उनका दायरा बढ़ता जाता है, ब्रिटिश सरकार, बहरैन की सरकार को हथियार और उपकरण देती है ताकि वह प्रदर्शनकारियों से निपटे और सऊदी अरब सरकार की मदद के लिए अपने सैनिक भेजता है लेकिन जब सीरिया में कुछ लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं तो अमरीका उन्हें स्वतंत्रता प्रेमी कहता है, सऊदी अरब उन्हें प्रजातंत्र चाहने वाला कह कर उन्हें हथियार व आर्थिक सहायता देता है। सीरिया में अगर लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करें तो स्वतंत्रता प्रेमी, बहरैन में यही काम करें तो विद्रोही व आतंकवादी! दोनों में क्या फर्क है? यही, बहरैन की सरकार, अमरीका की घटक है, सऊदी अरब की दोस्त है और सीरिया की सरकार अमरीका की विरोधी!

 

अगर यह फर्क आप समझ गये तो जान लें कि आतंकवाद की जटिल गुत्थी आप ने हल कर ली।

 

आतंकवाद के अर्थ में अपनी मर्ज़ी से सुधार करने का एक हालिया उदाहरण लेबनान का हिज़्बुल्लाह आंदोलन है।

 

सऊदी अरब के दबाव में 6 अरब देशों के संगठन फार्स की खाड़ी सहयोग परिषद ने लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह का नाम आतंकवादियों की लिस्ट में डाल दिया है।

 

सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात ए कुवैत, बहरैन, ओमान, और क़तर परशियन गल्फ कोआपरेशन कौन्सिल के सदस्य देश हैं।

 

हिज़्बुल्लाह क्या है?

 

लेबनान का इतिहास युद्धों और आतंरिक कलह से भरा है किंतु वर्ष 1982 में इस्राईल ने लेबनान पर हमला करके उसे बड़े क्षेत्र पर क़ब्ज़ा कर लिया और फिर दक्षिणी लेबनान पर पूरी तरह से इस्राईल का क़ब्ज़ा हो गया।

 

दक्षिणी लेबनान के कुछ छात्रों और युवाओं ने इस्राईल के खिलाफ संघर्ष आरंभ किया जो बाद में चल कर हिज़्बुल्लाह कहलाए, देखते ही देखते हिज़्बुल्लाह इतना ताक़तवर हो गया कि उसने सन 2000 में इस्राईली सैनिकों को दक्षिणी लेबनान से भगाने में सफलता प्राप्त कर ली। यह लेबनानियों के लिए बहुत बड़ा दिन था।

 

इस्राईली सैनिक अपनी छावनियां छोड़ कर भाग खड़े हुए, हिज़्बुल्लाह को लेबनान की जनता में अत्याधिक लोकप्रियता प्राप्त हो गयी, हिज़्बुल्लाह ने राजनीतिक दल बनाया और लेबनान के चुनाव में उसे भारी सफलता मिली। आज उसके कई सांसद हैं और उसके कई सदस्य, लेबनान के मंत्री हैं।

 

 

इस दौरान हिज़्बुल्लाह इस्राईल के कई बार भिड़ चुका, हर बार इस्राईल को नाकामी मिली और हिज़्बुल्लाह लेबनान में लोकप्रिय होता चला गया, लेबनान में ही नहीं पूरे इस्लामी और अरब जगत में लोकप्रियता से सारे रिकार्ड उसने तोड़ दिये।

 

हिज़्बुल्लाह से सब से ज़्यादा दुश्मनी इस्राईल को है और  ज़ाहिर सी बात है जब इस्राईल को दुश्मनी है तो अमरीका और उसके युरोपीय मित्रों को हिज़्बुल्लाह कैसे अच्छा लग सकता है?

 

लेकिन सऊदी अरब और अरब देशों का हिज़्बुल्लाह ने क्या बिगाड़ा है?

 

सच पूछें तो इसका जवाब मेरे दिमाग में भी नहीं आ रहा , अलबत्ता इस पर बहुत सोचा मगर कोई सही जवाब सुझाई नहीं दिया, हां यह ख्याल ज़रूर आया कि शायद सीरिया से इसका कोई संबंध हो? वर्ना आप खुद सोचें इस्राईल को मुसलमानों और अरबों  का सब से बड़ा दुश्मन कहा जाता है और उसी इस्राईल से एक बार नहीं कई बार हिज़्बुल्लाह लोहा ले चुका है और लेता रहता है तो इन अरब और इस्लामी देशों को तो हिज़्बुल्लाह का साथ देना चाहिए लेकिन वह तो इस्राईल की तरह हिज़्बुल्लाह को आतंकवादी कह रहे हैं? है ना ताअज्जुब की बात ? मुझे भी हैरत हुई थी लेकिन फिर सीरिया, इराक और यमन के हालात पर गौर किया तो किसी हद तक यह हैरत दूर हो गयी।

 

आज कल वैसे भी सऊदी अरब और इस्राईल के नेता एक दूसरे की खूब तारीफें कर रहे हैं और फिर सीरिया में अमरीका और इस्राईल जो कुछ चाह रहे थे और जिसके लिए सऊदी अरब ने बहुत मेहनत की थी वह सब कुछ हिज़्बुल्लाह के वहां पहुंचने से खत्म हो गया। मूड तो खराब होगा ही न। तो भाईयो!  बड़ी पुरानी कहावत है, दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, मैं,  चोर- चोर मौसेरी भाई की कहावत जान बूझ कर नहीं इस्तेमाल करना चाहता। जी हां दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है।  हिज़्बुल्लाह ने  सीरिया में  जाकर सऊदी अरब की दुश्मनी मोल ली है और इस्राईल का दुश्मन तो वह है ही तो क्या हुआ, सऊदी अरब की नज़र से हिज़्बुल्लाह सऊदी अरब का दुश्मन, और उसका दुश्मन इस्राईल तो फिर इस्राईल सऊदी अरब का दोस्त ही तो हुआ न! फिर दोस्त के लिए कुछ तो करना ही होता है, सो सऊदी अरब ने कर दिया, सीरिया में अगर इस्राईल और अमरीका की सेवा में नाकाम रहा तो चलें साहब , हिज़्बुल्लाह को आतंकवादी घोषित करके सऊदी अरब और उसके घटक देशों ने यकीनी तौर पर इस्राईल की बहुत मदद की है, उसे तो फायदा पहुंचेगा लेकिन जितना हिज़्बुल्लाह अरबों और मुसलमानों में लोकप्रिय है उसके मद्देनज़र तेरा क्या होगा सऊदी अरब!

क़मर शहज़ाद

(लेखक के निजी विचार हैं )

Add comment


Security code
Refresh