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सोमवार, 29 सितम्बर 2014 23:23

अर्जेन्टाइना की महिला राष्ट्रपति ने अमेरिकी नीतियों की पोल खोल दी

अर्जेन्टाइना की महिला राष्ट्रपति ने अमेरिकी नीतियों की पोल खोल दी

मेरी यह तमन्ना थी और आज भी है कि सुश्री क्रिस्टीना फ़र्नान्डिज़ डी क्रिश्नर पूरे अरब जगत की प्रमुख होतीं क्योंकि जब अरब सरकारों के नेता और विदेश मंत्री दूसरे और तीसरे गज़्ज़ा युद्ध की युद्ध अपराधी इस्राईली क़ानून मंत्री ज़िपी लिवनी के हाथ चूम रहे थे, स्वयं को मध्यमार्गी, शांति का पुजारी तथा इस्राईल से अच्छे संबंध का इच्छुक ज़ाहिर करने के लिए उनकी होड़ लगी हुई थी, बल्कि शायद ग़ज़्ज़ा में होने वाले जनसंहारों पर लिवनी और उनकी सेना को बधाइयां भी दे रहे थे यह साहसी महिला संयुक्त राष्ट्र संघ के प्लेटफ़ार्म से अमरीकी नीतियों के विरोधाभास का पर्दाफ़ाश और अमरीकी झूठ की हक़ीक़त बयान कर रही थीं तथा अमरीका के घृणित चेहरे और ख़ून के प्यासे उसके दातों पर पड़ा पर्दा उठा रही थीं।

 

 

सुश्री क्रिस्टीना ने अमरीका की शत्रुतापूर्ण नीतियों का पर्दाफ़ाश किया जो आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध के पर्दे के पीछे जारी हैं। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि तुम लोग सीरियाई विद्रोहियों की मदद कर रहे थे और हमसे कहा था कि यह सब क्रान्तिकारी हैं और आज हम इस सदन में इन्हीं क्रान्तिकारियों से युद्ध के लिए एकत्रित हुए हैं जिनके बारे में अब पता चला है कि यह सब आतंकवादी हैं। तुम ने ग्यारह सितम्बर की घटना के बाद अलक़ायदा से युद्ध के लिए प्रस्ताव पास किया, देशों पर हमले किए, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में लाखों नागरिकों को मौत की नींद सुला दिया और आज भी यह दोनों देश आतंकवाद की मार झेल रहे हैं।

 

सुश्री क्रिस्टीना इससे भी आगे गईं और उन्होंने ग़ज़्ज़ा पट्टी में इस्राईली आतंकवाद का निशाना बनने वालों के समर्थन में आवाज़ उठाई जो काम किसी भी अरब नेता ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि तुमने इस भयानक त्रासदी पर आंख मूंद ली जो इस्राईल ने अंजाम दी और बड़ी संख्या में फ़िलिस्तीनी जिसकी भेंट चढ़े, तुमने सारा ध्यान उन राकेटों पर केन्द्रित किया जो इस्राईल पर गिरे जिनसे इस्राईल को कोई  नुक़सान भी नहीं हुआ। आज हम आईएसआईएल को अपराधी घोषित करने और उसके विरुद्ध युद्ध के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय प्रस्ताव पारित करने का प्रयास कर रहे है जबकि इस संगठन को उन सरकारों से सहायता मिल रही है जिनसे तुम दूसरों की तुलना में अधिक परिचित हो, यह वही अरब सरकारें हैं जो सुरक्षा परिषद के बड़े देशों की घटक हैं।

इस भाषण का अनुवाद रोक दिया गया ताकि उनकी सारी बात पूरी दुनिया तक न पहुंच जाए। जो टीवी चैनल बैठक की कार्यवाही का प्रसारण कर रहे थे उन्होंने टेलीकास्ट यह कहकर रोक दिया कि कोई तकनीकी ख़राबी हो गई है जबकि सुरक्षा परिषद के इतिहास में एसा कभी नहीं हुआ। अरब नेता जो संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के वार्षिक अधिवेशन में भाषण देने के लिए गये उन्होंने न केवल अमेरिका के हित में मिथ्याचारी बातें कहीं बल्कि उनमें से कुछ ही लोगों ने बहुत ही नर्म और क्षमा याचना करने के अंदाज़ में इस्राईली आतंकवाद की ओर संकेत किया। अमेरिका अर्जेन्टाइना की राष्ट्रपति की निंदा नहीं कर सकता कि उन्होंने गज्जा पट्टी के शहीदों, घायलों और अनाथों का समर्थन क्यों किया क्योंकि वह निर्वाचित राष्ट्रपति हैं और एसे देश की राष्ट्रपति हैं जो अपने देश की शक्ति की सुरक्षा पर ध्यान देती हैं और सबसे बढ़कर यह कि उन्हें मानवीय अधिकार, न्याय की मांग और मानवीय प्रतिष्ठा की चिंता है और वहां की संस्कृति में अमेरिका के भय का कोई स्थान नहीं है।

 

हम सुश्री क्रिसटीना का आभार करेंगे, उनकी बहादुरी पर, उनके उस महिलापन पर जो उन लोगों की मर्दानगी पर भारी पड़ी जो मर्द होने के बड़े बड़े दावे करते हैं। हम उनका आभार करते हैं कि उन्होंने हक बात कही और न अमेरिका से डरीं और न उसके युद्धक विमानों, मिसाइलों और समुद्री बेडों से। मुबारक को अरब नेताओं को मैडम लिवनी के हाथों को चूमना। अगर राष्ट्रों ने उनका हिसाब किताब न किया तो इतिहास कदापि उन दया नहीं करेगा।

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