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बृहस्पतिवार, 31 जुलाई 2014 18:25

दो निर्णायक संदेश जिनसे बदल सकते हैं ग़ज़्ज़ा युद्ध के समीकरण

दो निर्णायक संदेश जिनसे बदल सकते हैं ग़ज़्ज़ा युद्ध के समीकरण

दो स्पष्ट संदेश जो संभावित रूप से बर्बर इस्राईल के ग़ज़्ज़ा पट्टी पर हमलों की रोकथाम का प्रारूप ही स्पष्ट नहीं करते बल्कि इस से मध्य पूर्व में शक्ति व कमजोरी के नये अर्थ और इस क्षेत्र में राजनैतिक, भौगोलिक और सैनिक परिस्थितियों का नया रूप नज़रों के सामने उभर सकता है।

 

पहला संदेशः यह संदेश हमास की सैन्य शाखा क़स्साम ब्रिगेड के प्रमुख मुहम्मद ज़ैफ़ ने मंगलवार की शाम को दिया जो  अपने प्रकार में बिल्कुल नया है और अत्यधिक संक्षिप्त होने के बावजूद अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस संदेश में इस बात का ठोस संकल्प प्रकट किया गया है कि ग़ज़्ज़ा की घेराबंदी जब तक जारी रहेगी तब तक इस्राईल के विरुद्ध संघर्ष भी जारी रहेगा।

 

दूसरा संदेशः ईरान की अत्यधिक ताकतवर हस्ती और कुद्स ब्रिगेड के कमांडर, जनरल क़ासिम सुलैमानी ने फिलिस्तीनी प्रतिरोध मोर्चे को पत्र लिखकर यह संदेश दिया है जिसमें उन्होंने फिलिस्तीन के संघर्षकर्ता गुटों को निशस्त्र करने की सोच को एक कोरी कल्पना बताया है और कहा है कि यह सपना कभी साकार नहीं होगा।

      ईरान के इस अत्यधिक ताकतवर जनरल ने अपने पत्र में फिलिस्तीनी जनता के हत्यारों और उनके एजेन्टों को चेतावनी देते हुए कहा है कि हम किसी भी दशा में प्रतिरोध और फिलिस्तीन का समथर्न एक सेकेंड के लिए भी नहीं छोड़ेंगे।

      इसके साथ ही उन्होंने इस्राईल को धमकी दी है कि हमारे आक्रोश का तूफ़ान बाढ़, उचित अवसर पर, ज़ायोनी( इस्राईली) अपराधियों को बहा ले जाएगा।

 

जब क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर मुहम्मद ज़ैफ़ कहते हैं कि ग़ज़्ज़ा की घेराबंदी ख़त्म होने से पहले संघर्षविराम की कोई बात ही नहीं तो इसका मतलब यह होता है कि फैसला करने वाले वही हैं और उनके अलावा यह जो विभिन्न टीमें इधर उधर वार्ताएं कर रही हैं वह केवल दिखावा और टीवी चैनलों पर प्रसारित करने के लिए हैं और उनका व्यवहारिक रूप से कोई महत्व नहीं है क्योंकि फिलिस्तीन में अब फैसला वह लोग कर रहे हैं जिन्होंने धरती के ऊपर एक नगर बसाया और उस के नीचे एक दूसरी दुनिया, सुरंगों के रूप में बसायी और अत्यधिक बहादुरी से इस्राईलियों का मुकाबला कर रहे हैं। यह वह लोग हैं जिनकी कार्यवाहियों से इस्राईल के सधे हुए और प्रशिक्षित तथा सिर से पैर तक आधुनिक हथियारों से लैस सैनिक बौखलाहट और भय व आतंक का शिकार हो गये हैं। फिलिस्तीन के यह जियाले उन सैनिकों से बहुत भिन्न हैं जो अपने कमांडरों और जनरलों के इशारों पर चलते हैं।

 

नाहल औज़ आप्रेशन

क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर का बयान और इस्राईल की छावनी नाहल औज़ पर फिलिस्तीनी जियालों के आक्रमण के वीडियो का प्रसारण संयोगवश नहीं है।

यह वीडियो देखकर एसा नहीं लगता कि वीडियो बनाने वाला किसी घबराहट का शिकार है और सैनिक आप्रेशन के दौरान भाग रहा है बल्कि वीडियो में हम फिलिस्तीनी जियालों की अभूतपूर्व साहसिक कार्यवाही देखते हैं जिसके दौरान उन्होंने दस इस्राईली सैनिकों को मार दिया और उनकी चीखों की आवाज़ें साफ़ सुनी जा सकती हैं और चूहों की तरह इन सैनिकों को भागते हुए देखा जा सकता है। यह उस इस्राईली सेना के सैनिक हैं जिनके सेनाध्यक्ष का कहना है कि उसकी सेना को कभी पराजित नहीं किया जा सकता है।

 

जनरल सुलैमानी का खतः

ईरान के जनरल सुलैमानी ने भी इसी समय एक पत्र लिखा जिसमें फिलिस्तीनियों के साथ ईरान के पूरी तरह से खड़े होने पर बल दिया, फिलिस्तीनी जियालों से हथियार वापस लेने के सभी प्रयासों का विरोध किया और इसके साथ ही एक ऐसी बात कह दी जिससे इस्राईली अधिकारी सिहर उठे और सभी अरब शासक जो किसी न किसी तरह इस्राईल की सहायता और उसके साथ सहयोग करने में व्यस्त हैं परेशान हो गये।।

 

ईरान ने फिलिस्तीनियों के लिए क्या किया?

ईरान ने ही फिलिस्तीनियों को मिसाइल बनाने की तकनीक दी है जिन्हें कस्साम ब्रिगेड ने तिलअबीब, हैफा, नतानिया, ईलात और डिमोना पर फायर किया और जिनके भय से चालीस लाख इस्राईली, तहखानों में छुपने पर विवश हुए। इसी प्रकार वह एन्टी टैंक मिसाइल भी फिलिस्तीनियों को ईरान ने ही दिये हैं जिनके भय से अभी तक इस्राईली टैंक, गज़्ज़ा के नगरों में घुसने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।

हम जानते हैं कि मुसलमानों में से कुछ लोग सामने आएंगे और इस काम पर ईरान की आलोचना करेंगे और कहेंगे कि ईरान, फिलिस्तीनी मुद्दे से फायदा उठा रहा है और फिलिस्तीनी शहीदों के खून से अपने हित साध रहा है तो हम उनसे कहेंगे कि तो तुम लोग क्यों फिलिस्तीनी मुद्दे का लाभ नहीं उठाते? जब कि हथियार खरदीने पर अरबों डालर खर्च करते हो। वैसे हमें इस प्रकार की बातों से कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि यही उनका धर्म है। जो लोग, ग़ज़्ज़ा में भूख से मरने वालों बच्चों तक इस्राईल और अमरीका के डर से  खाना पानी तक नहीं पहुंचा सके उन्हें आज एक कोने में दुबके ही रहना चाहिए।

 

ईरानी अपने मित्रों के साथ क्या करते हैं?

हम बड़े दुख के साथ यह बात स्वीकार कर रहे हैं कि ईरानी जैसा कि अतीत के अनुभवों से भी सिद्ध हो चुका है हम अरबों की तरह बिल्कुल नहीं हैं। वह जब कुछ कहते हैं तो उस पर डट जाते हैं, जब किसी को घटक बनाते हैं तो मौक़ा पड़ने पर अपने दोस्तों का साथ देते हैं और उनके कंधे से कंधा मिला कर खड़े रहते हैं और उन्हें किसी भी दशा में अकेला नहीं छोड़ते और इसका सब से अच्छा उदाहरण सीरिया है। निश्चित रूप से ईरान की बहुत सी नीतियों को हम स्वीकार नहीं करते और उसकी बहुत सी कार्यवाहियों से हम सहमत नहीं हैं किंतु सच को स्वीकार करना चाहिए। हमें आशा है कि ईरानी, ग़ज़्ज़ा के बारे में भी वैसे ही होंगे और हमें "उचित अवसर"  का अधिक इन्तेज़ार नहीं करना पड़ेगा।

 

ईरानी जनरल के पत्र से इस्राईलियों की नींद उड़ी

जनरल क़ासिम सुलैमानी का पत्र विशेषकर उसके इस वाक्य पर कि " हमारे आक्रोश का तूफ़ान, उचित अवसर पर, ज़ायोनी( इस्राईली) अपराधियों को बहा ले जाएगा।" अरबों और इस्राईल दोनों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। निश्चित रूप से आगामी किसी भी युद्ध की बलि पूरे अरब क्षेत्रों को चढ़ना होगा और इस प्रकार के किसी भी युद्ध से सब से अधिक नुकसान इस्राईल और उसके घटकों को पहुंचने वाला है। हमें यह याद रखना चाहिए कि ईरान की सैन्य शाखा कहा जाने वाला  हिज़्बुल्लाह संगठन कार्यवाही के लिए तैयार है जैसाकि उसने सीरिया में, सरकारी सेना की निश्चित हार के कगार पर पहुंचने के बाद, सीरियाई सरकार के हित में लड़ने का निर्णय लिया और बाज़ी पलट दी थी। यदि ईरान का सहयोग न होता तो आज सीरिया की सरकार इस प्रकार से खड़ी न होती।

 

निष्कर्ष

इन दो संदेशों के बाद जो ठोस संकल्प के सूचक हैं, मेरे विचार में इस्राईल की हार निकट भविष्य में निश्चित है और मुझे लगता है कि फिलिस्तीनियों की सभी मांगें स्वीकार कर ली जाएंगी ताकि संघर्षविराम हो सके अन्यथा, संकट के काले बादल और खून का चक्रवात इस्राईल की घात में है कभी भी, अगले कुछ सप्ताहों में, अगले कुछ महीनों में या फिर आगामी वर्षों में।

फिलिस्तीनी जियाले, जिन्होंने अरबों को खूब बेइज्ज़त किया आज विजय के द्वार पर खड़े हैं और जिसे इस में तनिक भी संदेह हो उसे हमने जिन दो पत्रों का उल्लेख किया है उन्हें और इस्राईली मीडिया में प्रकाशित होने वाले आलेखों और विश्लेषणों को ध्यान से पढ़ना चाहिए ताकि यह समझ सके कि हम क्या कह रहे हैं।

विजय पलक झपकते भी मिल जाती है क्योंकि वह ईश्वर की अनुमति से और शहीदों के खून से हाथ आती है और मर्द संघर्षकर्ताओं के साहस से, मर्द मर्द मर्द ...

(यह अरबी समाचार पत्र अर्रायुलयौम में प्रसिद्ध अरब विश्लेषक अब्दुलबारी अतवान के आलेख का हिन्दी अनुवाद है। लेखक की राय से रेडियो तेहरान का सहमत होना आवश्यक नहीं है। )

समाचार पत्र  अर्रायुलयौम में छपे आलेख का लिंकः http://www.raialyoum.com/?p=129450

    

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