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बृहस्पतिवार, 19 जून 2014 14:49

मूसिल तक फैलता आतंकवाद का कैंसर

मूसिल तक फैलता आतंकवाद का कैंसर

इस्लामिक स्टेट इराक़ एंड सीरिया आईएसआईएल या दाइश आतंकवादी संगठन ने पिछले वर्ष अंबार प्रांत में कार्यवाही शुरू की थी और रेमादी और फल्लूजा के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था।

दाइश के यह हमले और कार्यवाही बहुत आश्चर्यजनक नहीं थी क्योंकि अंबार, इराक़ के पश्चिमी छोर पर स्थित है और सीरिया के साथ लंबी सीमाओं के कारण इस प्रांत में दाइश का घुसना और अपने लिए एक ठिकाना बनाना सरल था। अब यह आतंकवादी समूह नैनवा प्रांत के मूसिल शहर पर क़ब्ज़ा कर चुका है और सलाहुद्दीन प्रांत के कुछ क्षेत्रों पर भी इसका नियंत्रण हो गया है।

दाइश के इस हमले को पिछले हमलों की तरह नहीं माना जा सकता क्योंकि इस रणनीति में स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है जो इराक़ के विभाजन और केंद्रीय सरकार के पतन के अर्थ में हो सकता है। इस आधार पर हमलों की इस लहर को सामान्य नहीं समझना चाहिए क्योंकि मध्यपूर्व में कैंसर के इस फोड़े के षड्यंत्र क्षेत्र के लिए बहुत भयानक सिद्ध हो सकते हैं।

सबसे पहले तो इस बात पर ध्यान रखना चाहिए कि दाइश ने अलक़ायदा की एक उप शाखा के रूप में वर्षों तक इराक़ में आतंकवादी गतिविधियां अंजाम दी हैं। सीरिया संकट में तीव्रता आने के बाद यह गुट, सीरिया के सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंच गया और दमिश्क सरकार के विरुद्ध लड़ने लगा लेकिन उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा और सीरियाई सेना ने दाइश के बहुत से आतंकियों को काल के गाल में पहुंचा दिया।

इस स्थिति को देखते हुए यह आतंकवादी गुट वापस इराक आ गया। उल्लेखनीय है कि दाइश के अधिकांश लोग, सद्दाम के शासनकाल में राष्ट्रपति गारद और बास पार्टी के सदस्य हैं। कहा जाता है कि दाइश के कुल सदस्यों की संख्या पांच हज़ार है जिनमें से तीन हजार लोगों ने मूसिल पर कब्जा किया है।

तीन हजार लोगों के साथ एक शहर पर क़ब्ज़ा करना, सामान्य बात नहीं है, इस आधार पर दाइश के साथ सुरक्षा बल के कुछ लोगों के सहयोग की संभावना की अनदेखी नहीं की जा सकती और शायद सलाहुद्दीन प्रांत के पुलिस प्रमुख को इसलिए बर्खास्त कर दिया गया है। बहरहाल दाइश, इराक़ में आतंकवाद के कैंसर की तरह है और यदि इराक़ी राजनेताओं और जनता ने तेजी के साथ इसको समाप्त नहीं किया तो यह पूरे देश को अपनी चपेट में ले सकता है।

*रख़शिंदा*

( नोटः लेखक के विचारों से रेडियो तेहरान हिंदी सेवा का सहमत होना आवश्यक नहीं है)

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