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सोमवार, 16 जून 2014 14:57

इराक़, अस्पष्ट परिणाम का एक ड्रामा..... अपनी बात

इराक़, अस्पष्ट परिणाम का एक ड्रामा..... अपनी बात

पिछले दिनों इराक़ के कई शहरों के नाटकीय पतन ने इन घटनाओं के कारण, आतंकवादी समूह दाइश की प्रवृत्ति और इन घटनाओं के परिणाम के बारे में कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। तेज़ी से होने वाले घटनाक्रम उस समय शुरू हुए जब प्रधानमंत्री नूरी मलिकी के नेतृत्व वाले क़ानून की संप्रभुता वाले गठबंधन ने संसदीय चुनाव में सबसे अधिक वोट मिले। मलिकी के विरोधियों की आपत्तियों के बावजूद चुनाव परिणाम की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी। इसी दौरान अंबार प्रांत में संकट जारी था और इस संकट की समाप्ति के लिए जार्डन में नूरी मलिकी के प्रतिनिधियों और विरोधियों की वार्ता भी परिणामहीन रही थी।

इसलिए नूरी मलीकी के प्रधानमंत्री के विरोधियों ने षड्यंत्र तैयार किया कि बासियों और दाइश के बंदूकधारी अंबार से नैनवा प्रांत की ओर बढ़ें। नैनवा के राज्यपाल असील नुजैफ़ी जो नूरी मलीकी के कट्टर विरोधी हैं, बिना किसी प्रतिरोध के, इस प्रांत को दाइश के हवाले कर दिया। दाइश के आतंकवादियों ने राज्य में सेना के हथियार डिपो पर कब्जा कर बड़ी मात्रा में हथियार प्राप्त कर लिए और सलाहुद्दीन प्रांत के नगर तिकरीत की ओर बढ़ने लगे।

तिकरीत पर क़ब्जा करने के बाद अब यह आतंकवादी सामर्रा की ओर बढ़े लेकिन सामरा में सेना और स्वयं सेवी बलों ने उनका जमकर मुकाबला किया और उन्हें  पीछे हटने पर विश्व कर दिया। इस विरोध के दृष्टिगत दाइश के लिए बग़दाद की ओर बढ़ना मुश्किल है। इन ज़मीनी कार्यवाहियों के साथ ही नूरी मलिकी के विरोधियों ने देश के अंदर और बाहर, उनके विरुद्ध ज़हर उगलना शुरू कर दिया और देश में शांति स्थापित करने में उन्हें अक्षम बताया। लेकिन इन सारी बातों की आशा, नूरी मलिकी की सरकार को पहले से ही थी।

हालांकि यह नाटक मलिकी के विरोधियों ने तैयार किया है लेकिन ऐसा लगता है कि इसका अंत और परिणाम उनके हाथ में नहीं है विशेष, इसलिए भी कि दाइश या आईएसआईएल ने कर्बला, नजफ़ और सामर्रा में पवित्र स्थानों को नुक़सान पहुंचाने की धमकी दी है और अगर ऐसा होता है तो विभिन्न देशों की जनता के धैर्य का बांध टूट जाएगा और फिर इस संकट को नियंत्रित करना आसान नहीं होगा।

अख़्तर रिज़वी *

( नोटः लेखक के विचारों से रेडियो तेहरान हिंदी सेवा का सहमत होना आवश्यक नहीं है)

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