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सोमवार, 08 फ़रवरी 2016 15:41

पवित्र स्थलों के रक्षकों की शहादत, बड़ा सौभाग्य

पवित्र स्थलों के रक्षकों की शहादत, बड़ा सौभाग्य

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा है कि पवित्र स्थलों के रक्षकों की शहादत, भुलाई न जाने वाली महान उपलब्धि है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शहीद हो जाने वाले पवित्र स्थलों के रक्षकों के परिजनों से भेंट में कहा कि वास्तव में पवित्र स्थलों की सुरक्षा करने वाले स्वयंसेवियों की शहादत बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि हम पर शहीदों के परिजनों के प्रति दायित्व हैं।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि पवित्र स्थलों के रक्षकों ने शत्रु को जमकर टक्कर दी और इस मार्ग में वे शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि यदि वे संघर्ष न करते तो यह शत्रु, ईरान के भीतर तक प्रविष्ट हो जाते।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि यह वास्तविकता है कि पवित्र स्थलों के रक्षकों ने देश, राष्ट्र, धर्म और इस्लामी क्रांति के मार्ग में अपने प्रांण न्योछावर किये।

मुदाफ़ेआने हरम या पवित्र स्थलों के रक्षक उन लोगों को कहा जाता है जो स्वेच्छा से इराक़ और सीरिया की सेना तथा स्वयंसेवी बलों के साथ मिलकर आतंकवादियों का मुक़ाबला करते हैं।

ज्ञात रहे कि शहीद होने वाले पवित्र स्थलों के रक्षकों के परिजनों ने 25 जनवरी 2016 को इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता से मुलाक़ात की थी जिसका कुछ भाग आज वरिष्ठ नेता की वेबसाइट पर जारी किया गया।

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