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रविवार, 10 मई 2015 12:55

ईरान का क्रांतिकारी सिनेमा

ईरान का क्रांतिकारी सिनेमा

ईरान की इस्लामी क्रांति को सफल हुए तीन दशकों से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है।  ईरान में आधुनिक सिनेमा को जन्म लिए भी 3 दशकों से अधिक का समय गुज़रा है।  पिछले कुछ दशकों के दौरान ईरान का क्रांतिकारी सिनेमा अब इतनी प्रगति कर चुका है कि वह हर विषय पर फ़िल्में बनाने में सक्षम है।  ईरान के क्रांतिकारी सिनेमा ने पूरे विश्व में अपने प्रशंसकों की संख्या में वृद्धि की है।

 

ईरानी सिनेमा वास्तव में वर्तमान ईरान के अध्ययन के लिए उचित दर्पण है।  ईरानी सिनेमा नामक श्रंखला में हमने ईरान के सिनेमा के इतिहास की हर आयाम से गहन समीक्षा की।  इसका कारण यह है कि ईरान का नवीन सिनेमा, इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद के वर्षों के ईरान के ऐतिहासिक परिवर्तनों का एक पुष्ट प्रमाण है।

 

ईरानी सिनेमा श्रंखला में इस बात का प्रयास किया गया कि कुछ जाने माने निर्माता और निर्देशकों का परिचय करवाया जाए और साथ ही साथ इस बात की भी समीक्षा की गई कि पिछले तीस वर्षों के दौरान सिनेमा ने किस प्रकार प्रगति की है।  निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में सिनेमा ने प्रगति की ओर क़दम बढ़ाया इसीलिए हमने इस श्रंखला के दौरान उन फ़िल्मों का उल्लेख किया जिनको इन वर्षों के दौरान ईरान और विदेश में प्रदर्शित किया गया।

 

इस दौरान हास्य फ़िल्मों के साथ ही साथ सामाजिक विषयों पर भी फ़िल्में बनाई गईं।  सर्वेक्षणों से ज्ञात होता है कि हास्य फ़िल्मों की तुलना में सामाजिक विषयों पर बनने वाली फ़िल्मों ने अधिक प्रतिस्पर्धा की है।  यही कारण है कि पिछले तीन दशकों के दौरान ईरान में यही दो विषय, सिनेमा की अर्थव्यवस्था के स्थाइत्व का कारण रहे हैं।

 

ईरान में सामाजिक विषयों पर बनने वाली कुछ फ़िल्मों के नाम इस प्रकार हैं जैसे मादर, हामून, यक बार बराये हमीशे, शूकरान, ज़ीरे पूस्ते शहर, दो ज़न, अरूस, ज़ीरे नूरे माह, ख़ेलेदूर-ख़ेले नज़दीक, चहारशंबे सूरी, दरबारे इला, संतूरी और जुदाई नादिर अज़ सीमीन आदि।  इन फ़िल्मों ने सामाजिक परिवर्तनों को बहुत प्रभावित किया और साथ ही ईरानी सिनेमा की तकनीक को विकसित किया।

 

अलबत्ता इस बात को भूलना नहीं चाहिए कि सद्दाम की ओर से ईरान पर थोपे गए युद्ध के प्रभाव और उसके परिणामों को कभी भी अनदेखा नहीं किया जा सकता।  सद्दाम जैसे शत्रु और उसके समर्थकों से जनसंघर्ष की शैली और लोगों में प्रतिरोध की भावना का मूल कारण धर्म और उसके बारे में पाई जाने वाली आस्था थी।  इसने कठिन परिस्थितियों में भी समाज में धार्मिक आस्था के कारण प्रतिरोध की भावना को बाक़ी रखा।  प्रतिरक्षा के बारे में जो फ़िल्में बनाई गईं उन्हें पवित्र प्रतिरक्षा के नाम से जाना गया।

आंतरिक या भीतरी विषयों को अनदेखा करते हुए आधुनिक मनुष्य के सामने खड़ी चुनौतियां और परिस्थतियों को भी वर्तमान ईरानी सिनेमा में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त है।  इसके अतिरिक्त आधुनिक मानव के बीच संपर्क, युवा पीढ़ी की स्थिति और मानव समाज में नैतिकता का स्थान आदि ऐवे विषय हैं जिनपपर पिछले कुछ वर्षों के दौरान ईरानी सिनेमा में विशेष रूप से ध्यान दिया गया है।  इस प्रकार के विषयों पर बनी फ़िल्मों ने जहां देश के भीतर न केवल दर्शकों को अपनी ओर आकृष्ट किया वहीं पर ईरान से बाहर भी अपने प्रशंसक पैदा किये जिनका संबन्ध समाज के हर वर्ग से है।  ईरान में बनी फ़िल्मों को यूरोप, अमरीका, एशिया और अफ़्रीका महाद्वीपों में बहुत सराहा गया।  दूसरी ओर यह बात भी उल्लेखनीय है कि ईरानी सिनेमा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार मिले हैं जो उसके महत्व को दर्शाता है।

 

इस्लामी क्रांति की सफलत के बाद के वर्षों में ईरानी सिनेमा का एक अन्य आयाम, इसमें महिलाओं की उपस्थिति तथा युवाओं के लिए फ़िल्म निर्माण के अवसर उत्पन्न करना रहा है।  इस क्षेत्र में प्रविष्ट होकर युवाओं को एकेडमिक सिनेमा को समझने का अवसर मिलता है।  इस प्रकार वे नए-नए विषयों पर फ़िल्में बनाकर उन्हें पेश करते हैं।  युवाओं को यह अवसर 1980 के दशक के आरंभ से मिलना शुरू हुआ जो अब भी जारी है।  इससे युवाओं के भीतर अच्छी फ़िल्में बनाने की भावना उत्पन्न हो रही है।  निश्चित रूप से सिनेमा की ओर दर्शकों को आकर्षित करने में आधुनिक तकनीक और सिनेमाघरों की भी भूमिका है।

वर्तमान समय में ईरान में 247 सिनेमाघर मौजूद हैं।  यह 247 सिनेमाघर, ईरान के 60 नगरों में हैं।  हाल ही में यह घोषणा की गई है कि सिनेमाघरों को डिजिटल सिस्टम से सुसज्जित किया जाएगा।  इस प्रकार सिनेमाघरों का आधुनिकीकरण होगा जो इस वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा।  इस प्रकार सिनेमाघरों की संख्या बढ़कर 273 हो जाएगी।

 

इस समय ईरान में तकनीकी सिनेमा की ओर झुकाव में वृद्धि देखी जा रही है।  दो फ़िल्मों तेहरान-1500 और आक़ाइये अलिफ़ के निर्माण और उसके रिलीज़ होने से इसका आभास अधिक होता है।  बहराम अज़ीमी ने ईरान में पहली बार एनीमेशन फ़िल्म बनाई है जिसका नाम तेहरान-1500 है।  इसके अतिरिक्त अली अतशानी ने Three dimensional techniques या तीन आयामी तकनीक से आक़ाइये अलिफ़ नामक फ़िल्म बनाई है।  इस तकनीक की फ़िल्मों का देश में स्वागत किया जा रहा है जो सराहनीय है।

 

ईरानी सिनेमा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।  सन 1958 से जबसे ईरान ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर फ़िल्मों में भाग लेना आरंभ किया है उसको सन 2013 तक 27413 पुरस्कार मिले हैं।  इनमें से 26774 पुरस्कार इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद की फ़िल्मों से संबन्धित हैं।

 

उल्लेखनीय है कि सन 2011 में ईरानी सिनेमा को सर्वाधिक 226 अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं।  जिस फ़िल्म को सबसे अधिक पुरस्कार मिले उसका नाम है, जुदाई नादिर अज़ सीमीन।  इसे असग़र फ़रहादी ने बनाया है।  इस फ़िल्म को आस्कर अवार्ड भी मिला है।

इसके अतिरिक्त ईरानी फ़िल्म निर्माताओं ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान अन्तर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में निर्णायक की भूमिका निभाई है। QR

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