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बुधवार, 03 दिसम्बर 2014 14:55

ईरानी सिनेमा का इतिहास

ईरानी सिनेमा का इतिहास

एनिमेशन, चित्र, हरकत और आवाज़ की ज़बान है। यह रंग, नस्ल व भाषा से इतर हर स्थान पर पहुंच जाता है और सभी को प्रभावित करता है। एनिमेटर, अपने पात्रों की रचना उन मानकों के आधार पर कर सकता है जो उसके मन में हैं और यह ऐसी सुविधा है जो फ़ीचर फ़िल्म बनाने वाले के पास नहीं होती। एनिमेशन, उन हरकतों की कला है जिनकी योजना बनाई गई होती है न कि वे योजनाएं जो हरकत कर रही हों। एनिमेशन, एक ऐसी सशक्त और प्रभावी कला है जो सांकेतिक रूप से मानवीय समस्याओं को बयान करता है। दूसरी ओर इस कला ने अपने भीतर की कल्पना को बाहरी दुनिया के समक्ष पेश करने की मनुष्य की दीर्घकालीन आकांक्षा को व्यवहारिक रूप प्रदान कर दिया है। अत्यंत साधारण विचारों व उपकरणों से एनिमेशन की दुनिया में ऐसी फ़िल्में बनाई जाती हैं जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं और उनके साथ गहरा संबंध स्थापित करती हैं।

 

पांच हज़ार साल पहले, ईरानी कलाकारों ने देश के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र में स्थित शहरे सूख़ते या बर्न्ट सिटी में मिट्टी के बर्तनों पर जो चित्र बनाए थे, वे संसार में पहले चलचित्र माने जाते हैं। ये चित्र एक पहाड़ी बकरी व आसूरीक पेड़ के बीच होने वाले एक काव्यात्मक शास्त्रार्रथ से लिए गए थे। ईरान के प्राचीन साहित्य में ये कविता इसी नाम से अर्थात बुज़े कूही व देरख़ते आसूरीक से मौजूद है। इसे बच्चों व किशोरों के लिए शिक्षा सामग्री समझी जाती है। इस चित्र में पहाड़ी बकरी जीवन, धरती व खुशी का प्रतीक है और आसूरीक पेड़ की ओर कई क़दम बढ़ा कर, जो अमरत्व, विनम्रता और आकाश का प्रतीक है, उससे खजूर और पत्ते प्राप्त करके अपना पेट भरती है। ईरानी कलाकार पांच हज़ार वर्ष पहले, मिट्टी को कैन्वस के स्थान पर प्रयोग करते थे और मिट्टी के गोल बर्तनों को घुमा कर इन चित्रों को चलचित्र की भांति प्रस्तुत किया करते थे। इस प्राचीन एनिमेशन की समयावधिक कुछ क्षणों से अधिक नहीं होती थी किंतु इसने संसार के पुरातनविदों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया और इस प्रकार इसे संसार के सबसे प्राचीन एनिमेशन के रूप में मान्यता दी गई।

 

एनिमेशन की कला वर्तमान व नवीन रूप में बीसवीं शताब्दी के आरंभ में एमिल कोल के माध्यम से फ़्रांस में आरंभ हुई। पचास वर्षों में यह कला परिपूर्णता तक पहुंच गई और कुछ दशकों के बाद ईरानी पहुंची। सन पचास के दशक में तेहरान की सड़कें नए नियोन बल्बों से परिचित हुईं और तेहरान की रातें, रंगीन प्रकाश से सुसज्जित होने लगीं जिन्हें देख कर उनके हरकत करने का आभास होता था। तेहरान की लालेज़ार सड़क प्रकाश के इन खेलों का केंद्र थी। ईरान में विज्ञापन व इसी प्रकार चलचित्र या एनिमेशन के प्राचीन गुरुओं में से एक मुर्तज़ा मुमय्यिज़ के विज्ञापन, केंद्रीय तेहरान के फ़िरदौसी चौराहे और लालेज़ार सड़क की प्रख्यात इमारतों के ऊपरी भाग पर दिखाए देते थे।

 

 

वर्ष 1956 से 1961 के बीच ईरान की संस्कृति व ललित कला या फ़ाइन आर्ट्स की संस्था में, जिसका नाम बाद में इस्लामी संस्कृति व शिक्षा मंत्रालय हो गया, एनिमेशन बनाने के लिए एक कार्यालय का गठन किया गया और इस विषय के विशेषज्ञ उसमें काम करने लगे। इस्फ़ंदयार अहमदिए, असदुल्लाह कफ़ाफ़ी और इसी प्रकार के कुछ अन्य लोग, ईरान में एनिमेशन की पहली पीढ़ी के अग्रणी लोगों में शामिल थे और इन्होंने ईरान में आरंभिक फ़िल्में बनाने में सफलता प्राप्त की। ईरान में पहली एनिमेशन फ़िल्म इस्फ़ंदयार अहमदिए की बनाई हुई थी जो तेरह सेकेंड की थी और उसका नाम मुल्ला नस्रुद्दीन था। यह फ़िल्म वर्ष 1957 में बनाई गई और इसमें आवाज़ नहीं थी। अहमदिए कहते हैं कि आरंभ में मुझ इस क्षेत्र में दक्षता नहीं थी और मैं केवल अपने विचारों व रुचियों तथा अध्ययन से लाभ उठा कर देश की पहली एनिमेशन फ़िल्म बनाने में सफल रहा। मुझे या द है कि मैंने कैमरे के लिए स्टूल, बिल्डिंग के मज़दूरों से लिया और कील व रस्सी की सहायता से स्टूल पर कैमरे को सैट किया। मैंने हर सेकेंड में हाथ से बनाए गए चौबीस चित्रों को कैमरे से शूट किया और इस प्रकार मुल्ला नस्रुद्दीन फ़िल्म तैयार हुई। ईरान में एनिमेशन फ़िल्मों का प्रचलन उस समय अधिक बढ़ गया जब 1965 से देश में बाल व किशोर फ़िल्मों का पहला फ़ेस्टिवल आयोजित हुआ।

 

 

ईरान में एनिमेशन की दूसरी पीढ़ी, इस्लामी क्रांति की सफलता के कुछ वर्षों बाद इस क्षेत्र में पहुंची और एनिमेशन फ़िल्मों की तैयारी के लिए अधिक उचित अवसर उपलब्ध हो गए। ईरानी एनिमेटरों द्वारा फ़िल्मों की तैयारी के प्रयास आरंभ हुए और देश-विदेश में ईरानी कलाकारों को अपनी योग्यता दिखाने का पुन! अवसर मिला। इस्लामी क्रांति क बाद एनिमेशन के क्षेत्र में ईरान के प्रख्यात कलाकारों में स्वर्गीय वजीहुल्लाह फ़र्द मुक़द्दम, महीन जवाहेरियान, अब्दुल्लाह अली मुराद और अहमद अरबानी इत्यादि का नाम लिया जा सकता है। महीन जवाहेरियान इस्लामी क्रांति के बाद के आरंभिक वर्षों में एनिमेटेड फ़िल्मों के निर्माण में विलंब के कारण का उल्लेख करते हुए कहती हैं कि इस संबंध में सबसे महत्वपूर्ण कारण, सद्दाम द्वारा ईरान पर थोपा गया युद्ध था किंतु जब युद्ध समाप्त हुआ और कम्प्यूटर घर घर पहुंचने लगे एवं एनिमेशन के फ़ेस्टिवल आयोजित होने लगे तो इस कला के परिवर्तन का काल आ गया।

 

 

इसके अतिरिक्त इस समय जिन विश्व विद्यालयों में एनिमेशन का विषय पढ़ाया जाता है उनकी संख्या में काफ़ी वृद्धि हो गई है। कला विश्व विद्यालय, सिनेमा व रंगमंच विश्व विद्यालय, शिक्षक प्रशिक्षण विश्व विद्यालय, रेडियो व टीवी का विश्व विद्यालय और इसी प्रकार के कई अन्य सरकारी व ग़ैर सरकारी शैक्षिक प्रतिष्ठानों में एनिमेशन पढ़ने वालों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है और इस विषय में पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों की संख्या काफ़ी अधिक हो चुकी है।

 

अलबत्ता कुछ सरकारी व ग़ैर सरकारी संस्थाओं जैसे पुलिस, ट्रेफ़िक पुलिस, नगर पालिका और जल, गैस व विद्युत विभाग ने भी एनिमेशन फ़िल्मों के प्रभाव पर ध्यान देते हुए अपने विज्ञापनों में एनिमेशन का प्रयोग किया और इस प्रकार एनिमेटरों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन विभागों व संस्थाओं के विज्ञापन, टीवी के धारावाहिकों की भांति ही रोचक व शिक्षाप्रद रहे हैं और यह बात ईरान में एनिमेशन की प्रगति के मुख्य कारणों में से एक है। निश्चित रूप से ईरान में एनिमेशन की तैयारी व प्रदर्शन का काम मुख्य रूप से टेलीविजन ने किया है। देशी व विदेशी चैनलों के घंटों तक चलने वाले प्रसारण के कारण रेडियो व टीवी की संस्था आईआरआईबी ने एनिमेशन फ़िल्में तैयार करने के लिए अलग से एक केंद्र बनाने का निर्णय किया और वर्ष 1995 में इस केंद्र की स्थापना की गई। यह केंद्र, ईरान में एनिमेशन को पुनर्जीवित करने वाली संस्था में परिवर्तित हो गया। इस केंद्र के महत्वपूर्ण लक्ष्य कुछ इस प्रकार हैं। समाज विशेष कर बच्चों व किशोरों की सांस्कृतिक, कलात्मक, सामाजिक व प्रशैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति, मल्टी मीडिया के माध्यम से सांस्कृतिक फ़िल्मों व कार्यक्रमों को पेश करना, देश में प्रख्यात निर्माणकर्ता टीमों को एनिमेशन बनाने का ऑर्डर देना और देश-विदेश के संगठनों की फ़िल्मों व कार्यक्रमों का आदान-प्रदान।

 

 

सबा एनिमेशन केंद्र ने अपनी स्थापना के बाद से ही बड़ी तेज़ी से प्रगति की। इस केंद्र ने तकनीकी कलपुर्ज़ों की ख़रीदारी और श्रमबल के प्रशिक्षण का काम किया और फिर धीरे-धीरे फ़िल्मों व कार्यक्रमों का निर्माण आरंभ किया। हर वर्ष इस केंद्र में तैयार होने वाले एनिमेशनों की संख्या बढ़ती गई और इस समय इस केंद्र के अधीन अनेक टीमें, गुट व कंपनियां एनिमेशन तैयार कर रही हैं। सबा एनिमेशन केंद्र ने अमू नौरूज़, माजराहाये मीरज़ा, ज़ाग़ी ज़ीरक, गुलहाये क़ाली, दर इंतेज़ारे ख़ुरशीद, अफ़सानये शिकुफ़्तन, अरूसके कुन्जकाव और अफ़सानये आरश जैसे अनेक एनिमेशन तैयार किए हैं। (HN)

 

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