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रविवार, 15 मार्च 2015 12:45

पारिवारिक संबंधों को मज़बूत बनाने में नौरोज़ की भूमिका

पारिवारिक संबंधों को मज़बूत बनाने में नौरोज़ की भूमिका

 

ईरानियों की प्राचीन ईदों में से एक, नौरोज़ है जो बहुत ही शानो शोकत से मनाई जाती है और जिसका आयोजन वसंत ऋतु के आरम्भ में किया जाता है। दुनिया भर में ईद और अन्य त्योहार लोगों के बीच एकता और भाईचारे के मज़बूत होने का बेहतरीन अवसर होते हैं। ईरान में भी विभिन्न त्योहार विशेष रूप से प्राचीन त्योहार ईदे नौरोज़, पारिवारिक रिश्तों और विभिन्न स्तर पर लोगों के बीच संबंधों के मज़बूत होने का बेहतरीन अवसर माना जाता है। नौरोज़ जिसे ईरानी संस्कृति में बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है, दोस्ती और प्रकृति के पुनर्जीवन का प्रतीक है।

ईरानी संस्कृति में परिवार को विशेष स्थान प्राप्त है। इसी कारण नौरोज़ के अवसर पर ईरानी परिवारों के बीच आपसी मेल मोहब्बत के सुन्दर दृश्यों को देखा जा सकता है। इस जश्न में पत्नी और माँ के रूप में महिलाएं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और परिवार के सदस्यों के बीच मेल मोहब्बत को बढ़ाने में उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है।

 

 

नौरोज़ का जश्न मनाने में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वास्तव में नौरोज़ का त्योहार, परिवार की नींव मज़बूत करने में महिलाओं की भागीदारी को श्रेष्ठ रूप से उजागर करता है। नव वर्ष के प्रारम्भिक क्षणों में घर में ईरानी महिलओं की उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, नौरोज़ के त्योहार के स्वागत के चरणों में भी महिलाओं की भूमिका अहम होती है। नौरोज़ के अवसर पर यात्रा की योजना बनाने, परिजनों से मुलाक़ात, उपहार देने और विशेष दस्तरख़ान लगाने में महिलाओं की प्रभावी भूमिका को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

नौरोज़ का दस्तरख़ान, जिसे हफ़्त सीन कहा जाता है, ईरानी घरों का एक आकर्षण है, जिसकी तैयारी की ज़िम्मेदारी आम तौर पर महिलाओं के कांधों पर होती है। हफ़्त सीन दस्तरख़ान पर फ़ार्सी भाषा के अक्षर सीन से शुरू होने वाली सात चीज़ें चुनी जाती हैं। इसके अलावा दस्तरख़ान पर आईना, क़ुराने मजीद, शमादान, रंगीन मुर्ग़ी का अंडा, फल, फूल, मिठाई, ड्राई फ़्रूट्स, जार में लाल मछली आदि हफ़्त सीन दस्तरख़ान पर रखे जाते हैं। इस सुन्दर दस्तरख़ान को तैयार करने में महिलाएं बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नए वर्ष के आगमन के क्षणों से ठीक पहले घर की ज़िम्मेदार महिला, घर के समस्त सदस्यों को दस्तरख़ान पर एक साथ बैठाती है और समस्त सदस्यों विशेष रूप से अपनी संतान से क़ुरान की आयतों के पढ़ने और दुआ मांगने की सिफ़ारिश करती है।

 

 

नौरोज़ के त्योहार की एक महत्वपूर्ण ईरानी परम्परा कि जिस पर इस्लाम का रंग चढ़ा हुआ है, नौरोज़ की छुट्टियों में परिजनों और संबंधियों से मुलाक़ात है। विभिन्न परम्पराओं के बीच सगे संबंधियों से मेल जोल की परम्परा का विशेष स्थान है। यह परम्परा इस्लामी और ईरानी संस्कृति के निकट संबंधों का कारण भी बनी है। नौरोज़ में ईरानी महिलाओं की अन्य भूमिकाओं में से एक बुज़ुर्गों से मुलाक़ात का कार्यक्रम तय करना है। नव वर्ष के आगमन पर ईरानी महिलाएं दादा-दादी नाना-नानी से मुलाक़ात के लिए अपने परिवार को तैयार करती हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि जिस समाज में रिश्तेदार और संबंधियों के बीच मेल जोल और प्यार मोहब्बत होता है, ऐसे समाज ज़िंदा और ख़ुशहाल होते हैं, जिसका आर्थिक और सांस्कृतिक विकास पर भी प्रभाव पड़ता है।

ईरानी महिलाएं इस परम्परा के महत्व से अच्छी तरह अवगत होती हैं। ईरानी महिलाओं को पता होता है कि इस परम्परा से परिजनों की भावनात्मक ज़रूरतें पूरी होती हैं। जो परिवार और संबंधी आपस में मेल जोल रखते हैं उनमें एक विशेष ख़ुशहाली पाई जाती है और इससे अनेक मानसिक समस्याओं का भी उपचार हो जाता है। आपसी मेल जोल से स्वस्थ वातावरण उत्पन्न होता है। इस प्रकार, लोग एक दूसरे के अनुभवों से लाभ उठाकर अपने जीवन की समस्याओं और तनावों को दूर करते हैं। इस्लामी शिक्षाओं में भी आपसी मेल जोल को आयु में वृद्धि का कारण बताया गया है। इसलिए कि इस प्रकार, इंसान को मानसिक शांति प्राप्त होती है और परिणाम स्वरूप वह शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहता है। आपसी मेल जोल के अन्य लाभों में से एक सामाजिक चेतना में वृद्धि का होना है। सामाजिक स्तर पर जितना भी मेल जोल अधिक होगा उतना ही सामाजिक चेतना में भी वृद्धि होगी।

 

 

इस्लाम में दूसरों विशेष रूप से रिश्तेदारों की सेवा पर अति महत्वपूर्ण बल दिया गया है। जब बात सहायता की होती है तो हमेशा वित्तीय सहायता मन में नहीं आनी चाहिए। पारिवारिक मतभेदों का समाधान कराना, रोज़गार और शिक्षा के संबंध में सलाह देना, लड़के और लड़कियों की शादी के लिए प्रयास करना ग़ैर वित्तीय सहायताओं के कुछ उदाहरण हैं। मुलाक़ात से एक दूसरे की समस्याओं से अवगत होने का अवसर प्राप्त होता है। इस स्थिति में अगर संभव होता है तो एक दूसरे की सहायता की जा सकती है। वित्तीय सहायता दूसरों की सहायता का एक उदाहरण है। संबंधी आपस में, जितने निकट होंगे, उन पर ईश्वर की कृपा भी उतनी अधिक होगी। इसीलिए ज़रूरतमंद रिश्तेदारों से मेल जोल को प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

महिलाओं की एक और भूमिका परिजनों के परस्पर संबंधों और व्यवहार की निगरानी करना है। ईरानी महिलाएं परिजनों और रिश्तेदारों के बीच मनमुटाव को दूर करने के लिए नौरोज़ के अवसर को एक सुनहरे अवसर के रूप में देखती हैं। नव वर्ष शुरू होने के क्षणों में ईरानी महिलाएं अपने परिजनों से कहती हैं कि वह मनमुटाव और नाराज़गियों को दूर कर दें और अपनी परिस्थितियों में परिवर्तन के लिए ईश्वर से दुआ करें। दिलों से द्वेष को दूर करना एक ऐसा कारण है कि जो इंसान की स्थिति को बदल कर रख देता है। नौरोज़ में मांगी जाने वाली दुआ के  मुताबिक़ हमें अच्छी स्थिति के लिए अपने दिलों से द्वेष को दूर करना होगा और मित्रता को बढ़ावा देना होगा। नौरोज़ के अवसर पर छोटी सी ईदी या उपहार देने और मुलाक़ात के लिए जाने से भी दिलों से द्वेष को दूर करने में बड़ी सहायता मिलती है। इस्लामी शिक्षाओं में एक दूसरे से हाथ मिलाने को पापों के धुलने का कारण क़रार दिया गया है। मोहब्बत से पेश आने और द्वेष को समाप्त करने से इंसान और समाज दोनों स्वस्थ रहते हैं।

 

 

नव वर्ष के आगमन के अवसर पर महिलाओं की एक ज़िम्मेदारी परिजनों और रिश्तेदारों के लिए उपहारों का चयन करना है। उपहरा देने से द्वोष और नफ़रतों को दूर करने और प्रेम और भाईचारे के रिश्ते को मज़बूत बनाने में सहायता मिलती है। उपहार से दिल मोहब्बत से भर जाते हैं और दिलों से नफ़रत का मैल साफ़ हो जाता है। विशेष रूप से अगर विशेष अवसरों पर उपहार दिया जाए। इस स्थिति में उस दिन की ख़ुशियों में चार चांद लग जाते हैं और वह दिन याद रह जाता है। इस्लाम ने उपहार देने की बहुत सिफ़ारिश की है। हज़रत अली (अ) फ़रमाते हैं, मुझे अपने मुसलमान भाई की ज़रूरत की चीज़ उसे उपहार में देना, दान देने से कहीं अधिक पसंद है।

प्राचीन काल से ही ईरान में ईदे नौरोज़ के अवसर पर उपहार देने की परम्परा रही है। नव वर्ष के अवसर पर ईरानी महिलाएं उपहार तैयार करती हैं और नया वर्ष शुरू होते ही परिजनों को उपहार देती हैं। इसके अलावा, नौरोज़ के त्योहार के अवसर पर एक दूसरे के घर आने जाने के समय ईरानी महिलाएं छोटों को ईदी देती हैं और पुरुषों से सिफ़ारिश करती हैं कि वे अपने छोटों को ईदी दें। महिलाएं इस बात से अवगत हैं कि छोटे बच्चों और युवाओं को ईदी देने से उनकी ख़ुशियों में बहुत वृद्धि हो जाती है। हालांकि ईरानी समाज में ईदी देना केवल परिजनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस अवसर पर ज़रूरतमंदों की भी सहायता की जाती है।

नई ऋतु के शुरू होते ही नौरोज़ की यात्रा पर जाने का भी सिलसिला शुरू हो जाता है। यात्रा की योजना बनाने में भी ईरानी महिलाएं अहम भूमिका निभाती हैं। नौरोज़ के अवसर पर यात्रा पर जाने से परिजनों के बीच संबंध मज़बूत होते हैं और परिजनों की ख़ुशी में वृद्धि होती है।

 

 

वसंत ऋतु के आरम्भ में ईरानी परिवार समाज के निर्धनों, अनाथों और ज़रूरतमंद महिलाओं की सहायता करके उन्हें अपनी ख़ुशियों में शामिल करते हैं। ईरानियों का मानना है कि वसंत ऋतु के आरम्भ में इन लोगों की सहायता से उनकी ख़ुशियों में वृद्धि होती है। और इस प्रकार वे अपने जीवन को ख़तरों से सुरक्षित रखते हैं और ज़रूरतमंदों की दुआ प्राप्त करते हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ईरानी महिलाओं की भूमिका के बिना इस बड़ी और महत्वपूर्ण ईद का रंग फीका पड़ जाएगा।                  

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